झुमरीतिलैया में 16 से 25 सितंबर तक लगेगा दस दिवसीय विरागोदय संस्कार शिविर
मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में दसलक्षण महापर्व के साथ होंगे धार्मिक आयोजन
झुमरीतिलैया। चर्या शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विशुद्धसागर जी महामुनिराज के मंगल आशीर्वाद तथा जैन संत मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में झुमरीतिलैया में दस दिवसीय विरागोदय संस्कार शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर दसलक्षण महापर्व के अवसर पर 16 से 25 सितंबर तक जैन मंदिर के बगल स्थित प्रांगण में आयोजित होगा।
दस दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक एवं संस्कारमय शिविर में धर्मलाभ लेने के लिए स्थानीय जैन समाज के साथ झारखंड के विभिन्न शहरों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आयोजन को लेकर विरागोदय वर्षायोग कमेटी और कोडरमा जैन समाज के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है। शिविर की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और प्रतिभागियों की सुविधाओं तथा धार्मिक कार्यक्रमों के व्यवस्थित संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
मन की तैयारी भी आवश्यक: मुनि श्री
शिविरार्थियों को संदेश देते हुए मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज ने कहा कि विरागोदय संस्कार शिविर के माध्यम से श्रावकों को आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। धर्म और संस्कारों के साथ व्यक्ति जितना तपेगा, उसका जीवन उतना ही निखरेगा।
मुनि श्री ने कहा कि शिविर में शामिल होने के लिए जितनी तैयारी आवश्यक सामग्री की होती है, उतनी ही तैयारी मन की भी होनी चाहिए। व्यक्ति को अपने मन में धर्म, साधना, संयम और आत्मचिंतन का भाव लेकर शिविर में प्रवेश करना चाहिए। दस दिनों के इस आध्यात्मिक अवसर को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम मानकर पूरा नहीं किया जाए, बल्कि इससे प्राप्त शिक्षा और संस्कारों को जीवन में आत्मसात करने की भावना से सहभागिता की जाए। ऐसा करने पर ही विरागोदय संस्कार शिविर का वास्तविक उद्देश्य सार्थक होगा।
नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने की पहल
आज के बदलते सामाजिक परिवेश में बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति, धर्म और संस्कारों से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए शिविर में नई पीढ़ी के लिए विशेष धार्मिक एवं संस्कारपूर्ण गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
शिविर के दौरान जैन धर्म के मूल सिद्धांतों, भगवान महावीर के संदेश, अहिंसा, सत्य, संयम, त्याग, तप, करुणा और सदाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। बच्चों एवं युवाओं को सरल और प्रेरक माध्यमों से जैन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं तथा जीवन मूल्यों से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।
मुनि श्री सुयश सागर जी महाराज के मंगल प्रवचनों और पावन सानिध्य में श्रद्धालुओं को धर्म के साथ अपने जीवन को अनुशासित, संस्कारवान और संयमित बनाने की प्रेरणा प्राप्त होगी। आयोजन समिति का मानना है कि ऐसे शिविरों के माध्यम से नई पीढ़ी में धार्मिक चेतना जागृत करने के साथ उन्हें जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा भी दी जा सकती है।
सामायिक, स्वाध्याय और प्रतिक्रमण सहित होंगे कार्यक्रम
दस दिवसीय शिविर में सामायिक, स्वाध्याय, पूजा-अर्चना, धार्मिक चर्चा, प्रतिक्रमण, मंगल प्रवचन तथा विभिन्न संस्कारमय गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक कार्यक्रम का उद्देश्य शिविरार्थियों को आत्मचिंतन, धर्म साधना और संयम की दिशा में प्रेरित करना होगा।
शिविर में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को 24 घंटे गुरुदेव द्वारा निर्धारित कार्यक्रम और अनुशासन के अनुसार रहना होगा। प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 8 बजे तक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अवधि में शिविरार्थी सांसारिक गतिविधियों से दूर रहकर पूजा, साधना, स्वाध्याय, प्रवचन और आत्मकल्याण से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता करेंगे।
आयोजन समिति के अनुसार, शिविर का वातावरण पूरी तरह धर्ममय रहेगा। शिविरार्थियों को निर्धारित दिनचर्या का पालन करते हुए तप, त्याग, संयम और साधना के माध्यम से आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होगा।
विरागोदय वर्षायोग कमेटी के नेतृत्व में होगा आयोजन
विरागोदय संस्कार शिविर का संपूर्ण आयोजन जैन समाज के अंतर्गत विरागोदय वर्षायोग कमेटी के नेतृत्व में किया जाएगा। कार्यक्रम स्थानीय पंडित अभिषेक शास्त्री के निर्देशन में संपन्न होगा। आयोजन को व्यवस्थित और सफल बनाने के लिए कमेटी के पदाधिकारियों तथा समाज के श्रद्धालुओं को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
शिविर संयोजक सिद्धार्थ जैन सेठी और कुणाल जैन ठोल्या ने मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा एवं नवीन जैन को बताया कि आयोजन की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने समाज के श्रद्धालुओं, विशेषकर बच्चों और युवाओं से शिविर में सहभागी बनकर धर्म, संस्कार और आत्मकल्याण का लाभ लेने का आग्रह किया है।
दसलक्षण महापर्व के साथ आयोजित यह विरागोदय संस्कार शिविर श्रद्धालुओं के लिए धर्म साधना, आत्मचिंतन और संस्कार निर्माण का महत्वपूर्ण अवसर बनेगा।
