ओंकारेश्वर नहर ग्रुप-2 में बार-बार लीकेज, 68 से 105 किमी तक MS पाइप डालने की मांग
ओंकारेश्वर चतुर्थ चरण नहर परियोजना के ग्रुप-2 में बार-बार हो रहे लीकेज और पानी आगे नहीं पहुंच पाने को लेकर चिंता जताई जा रही है। परियोजना से क्षेत्र के 119 गांवों की करीब 29,947 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा देने और गांवों में पेयजल आपूर्ति करने का लक्ष्य है। संबंधित क्षेत्र के किसानों का कहना है कि नहर के निर्माण और सीमेंट-कंक्रीट (CC) पाइपों के जॉइंट में खामियों के कारण पानी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। उन्होंने समस्या के स्थायी समाधान के लिए छितरी ग्राम यानी काली बावड़ी से धार रोड, मनावर तक के हिस्से में CC पाइप हटाकर एमएस (लोहे) के पाइप डालने की मांग की है।
दो समूहों में बनाई गई है नहर

पलब्ध विवरण के अनुसार, इस परियोजना के लिए पानी बड़वाह स्थित सिसलिया तालाब से दिया जाता है। नहर व्यवस्था को ग्रुप-1 और ग्रुप-2 में विभाजित किया गया है। ग्रुप-1 सिसलिया तालाब से कारम नदी तक बनाया गया है, जबकि ग्रुप-2 कारम नदी से धुलसर, कुक्षी तक जाता है।
ग्रुप-2 के अंतर्गत कारम नदी से छितरी और काली बावड़ी तक लगभग 68 किलोमीटर का हिस्सा खुली नहर के रूप में है। इसके बाद 68 किलोमीटर से आगे लोहारी, कुक्षी तक नहर भूमिगत पाइपलाइन से जाती है। इस व्यवस्था के जरिए 119 गांवों तक सिंचाई और पेयजल पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
पाइपों के जॉइंट से पानी रिसने की शिकायत


क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि नहर और पाइपलाइन का निर्माण गुणवत्ता के अनुरूप नहीं हुआ। उनके अनुसार, सीमेंट-कंक्रीट पाइपों के जॉइंट ठीक से नहीं लगाए गए, जिसके कारण पाइपों के जोड़ खुलने और पानी रिसने की समस्या बार-बार सामने आती है। इससे नहर का पानी निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है।
लोगों ने निर्माण कार्य में ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि हर वर्ष मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद लीकेज की समस्या बनी हुई है। बार-बार मरम्मत कराने के बाद भी यदि पाइपों के जॉइंट पानी का दबाव नहीं सह पा रहे हैं, तो केवल अस्थायी सुधार से परियोजना का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
86 किलोमीटर के आगे नहीं पहुंचा पानी

दिए गए विवरण के मुताबिक, इस वर्ष नहर में पानी 86 किलोमीटर के आगे नहीं बढ़ पाया है। इससे 68 किलोमीटर के बाद भूमिगत पाइपलाइन वाले हिस्से की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस खंड में पानी आगे नहीं पहुंचने से खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है और गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना भी प्रभावित हो सकती है।
क्षेत्र में सीमांत और आदिवासी किसानों की बड़ी संख्या है। बताया गया है कि परियोजना से जुड़े लाभार्थियों में लगभग 70 प्रतिशत सीमांत एवं आदिवासी किसान आते हैं। ऐसे में नहर का पानी समय पर और पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचना उनकी खेती और आजीविका पर असर डाल सकता है।
68 से 105 किलोमीटर तक एमएस पाइप लगाने की मांग
लीकेज की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए छितरी ग्राम, काली बावड़ी से 105 किलोमीटर स्थित धार रोड, मनावर तक सीमेंट-कंक्रीट पाइपों को हटाकर एमएस यानी लोहे के पाइप लगाने का सुझाव दिया गया है। मांग करने वालों का कहना है कि बार-बार पानी का रिसाव मुख्य रूप से 68 से 105 किलोमीटर के हिस्से में सामने आ रहा है। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इस खंड में मौजूदा सीसी पाइपलाइन से पानी का सुचारु प्रवाह बनाए रखना कठिन हो रहा है।
उनका कहना है कि संबंधित हिस्से में मजबूत एमएस पाइप लगाने से जॉइंट से होने वाले रिसाव को कम किया जा सकेगा और पानी आगे के गांवों तक पहुंचने की संभावना बढ़ेगी। इससे सिंचाई के साथ पेयजल आपूर्ति के लक्ष्य को पूरा करने में भी मदद मिल सकती है।
स्थायी समाधान के लिए कार्रवाई का आग्रह
परियोजना से जुड़े लोगों ने संबंधित विभाग और अधिकारियों से नहर की तकनीकी जांच कराने तथा लीकेज वाले हिस्से की स्थिति का आकलन करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि मरम्मत पर हर साल खर्च करने के बजाय 68 से 105 किलोमीटर के हिस्से में एमएस पाइप लगाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाए। उनका मानना है कि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो नहर से किसानों और गांवों को नियमित पानी मिलने की उम्मीद प्रभावित हो सकती है। संबंधित विभाग से मांग की गई है कि समस्या का परीक्षण कर आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
