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	<title>Sadhvi Dr Amritrasa Shriji &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Sadhvi Dr Amritrasa Shriji &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>समभाव में रहना ही सच्ची सामायिक है: महिदपुर रोड में साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी का संदेश, रविवार को होगी वाद-विवाद प्रतियोगिता</title>
		<link>https://swarajvani.com/true-samayik-means-remaining-in-equanimity/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2026 11:43:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समभाव में रहना ही सच्ची सामायिक है: महिदपुर रोड में साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी का संदेश, रविवार को होगी वाद-विवाद प्रतियोगिता राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान धर्मसभा ... <a title="समभाव में रहना ही सच्ची सामायिक है: महिदपुर रोड में साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी का संदेश, रविवार को होगी वाद-विवाद प्रतियोगिता" class="read-more" href="https://swarajvani.com/true-samayik-means-remaining-in-equanimity/" aria-label="Read more about समभाव में रहना ही सच्ची सामायिक है: महिदपुर रोड में साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी का संदेश, रविवार को होगी वाद-विवाद प्रतियोगिता">Read more</a>]]></description>
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<h2 dir="ltr"><strong>समभाव में रहना ही सच्ची सामायिक है: महिदपुर रोड में साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी का संदेश, रविवार को होगी वाद-विवाद प्रतियोगिता</strong></h2>
<p dir="ltr"><strong>राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान धर्मसभा को किया संबोधित, क्षमा, करुणा, संयम और समता अपनाने की दी प्रेरणा</strong></p>
<p dir="ltr"><strong>महिदपुर रोड।</strong> स्थानीय राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि समभाव में रहकर आत्मा की साधना करना ही सच्ची सामायिक है।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>सामायिक का वास्तविक उद्देश्य</strong></h3>
<p dir="ltr">साध्वीश्रीजी ने कहा कि सामायिक जैन धर्म की महत्वपूर्ण आराधना है। इसका वास्तविक उद्देश्य आत्मा में स्थिर होना, मन को शांत रखना और राग-द्वेष से दूर रहकर समता भाव धारण करना है। जीवन में कभी सुख मिलता है तो कभी दुःख, कभी मान-सम्मान मिलता है तो कभी अपमान का सामना करना पड़ता है। इन सभी परिस्थितियों में जो व्यक्ति अपने मन का संतुलन बनाए रखता है, वही समभाव की साधना करता है।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>केवल क्रिया नहीं, जीवन को संयमित बनाने की प्रेरणा</strong></h3>
<p dir="ltr">उन्होंने कहा कि सामायिक केवल निश्चित समय तक की जाने वाली धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह जीवन को संयमित और आत्मकेंद्रित बनाने की प्रेरणा देती है। सच्ची सामायिक तभी सार्थक होती है, जब व्यक्ति अपने विचारों, वाणी और व्यवहार में भी समता बनाए रखने का प्रयास करे। क्रोध, अहंकार, लोभ और द्वेष से दूर रहकर आत्मचिंतन करना ही आत्मकल्याण का मार्ग है।</p>
<p dir="ltr"><img decoding="async" class="size-medium wp-image-366033 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.17.32-am-300x135.jpeg" alt="whatsapp image 2026 10 10 at 4.17.32 am" width="300" height="135" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.17.32-am-300x135.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.17.32-am-1024x461.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.17.32-am-768x346.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.17.32-am.jpeg 1152w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3 dir="ltr"><strong>श्रावक-श्राविकाओं को क्षमा, करुणा और संयम अपनाने की सीख</strong></h3>
<p dir="ltr">साध्वीश्रीजी ने कहा कि धर्म आराधना के साथ दैनिक जीवन में भी क्षमा, करुणा, संयम और समता को अपनाना चाहिए। जब मनुष्य बाहरी परिस्थितियों से प्रभावित हुए बिना आत्मा के वास्तविक स्वरूप को समझने का प्रयास करता है, तब उसकी साधना अधिक सार्थक बनती है। धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रवचनों का लाभ लिया।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>आज की भक्ति-प्रभावना के लाभार्थी</strong></h3>
<p dir="ltr">जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि आज की धार्मिक भक्ति, प्रभावना और संपूर्ण दिवस का लाभ अशोक कुमार बापूलाल कोचर (मावावाला) परिवार ने लिया। प्रभावना का लाभ रमेश जैन, अमित कुमार और अंकेश कुमार कोचर (मावावाला) परिवार ने लिया। एक और प्रभावना का लाभ रमेशचंद्र, राजेंद्र कुमार और पारसमल लुणावत परिवार, महिदपुर सिटी ने लिया।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>रविवार को वाद-विवाद प्रतियोगिता</strong></h3>
<p dir="ltr">रविवार सुबह 9:15 बजे श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में श्री सुविधिनाथ भगवान के नाम पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।</p>
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		<title>फेराई नगर में चातुर्मास के दौरान तप और आराधना के आयोजन, 52 सिद्धि तप की जानकारी</title>
		<link>https://swarajvani.com/nagar-observes-52-siddhi-tap-during-chaturmas-under-sadhvi-dr-amritrasa-shriji/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Sep 2026 12:24:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mahidpur]]></category>
		<category><![CDATA[i Nagar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Chaturmas]]></category>
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					<description><![CDATA[फेराई नगर में चातुर्मास के दौरान तप और आराधना के आयोजन, 52 सिद्धि तप की जानकारी साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी की निश्रा में दो दिवसीय सिद्धि तप महोत्सव संपन्न; जैन ... <a title="फेराई नगर में चातुर्मास के दौरान तप और आराधना के आयोजन, 52 सिद्धि तप की जानकारी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/nagar-observes-52-siddhi-tap-during-chaturmas-under-sadhvi-dr-amritrasa-shriji/" aria-label="Read more about फेराई नगर में चातुर्मास के दौरान तप और आराधना के आयोजन, 52 सिद्धि तप की जानकारी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>फेराई नगर में चातुर्मास के दौरान तप और आराधना के आयोजन, 52 सिद्धि तप की जानकारी</strong></h1>
<p><strong>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी की निश्रा में दो दिवसीय सिद्धि तप महोत्सव संपन्न; जैन समाज ने 62 तपस्वियों के सम्मान की दी जानकारी</strong></p>
<p><strong>महिदपुर रोड।</strong> फेराई नगर में चातुर्मास के दौरान जैन समाज की ओर से तप, धार्मिक आराधना और प्रवचन के विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं। नगर में विराजित साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा की निश्रा में हाल ही में दो दिवसीय सिद्धि तप महोत्सव आयोजित हुआ। जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी के अनुसार, महोत्सव में 62 तपस्वियों की सहभागिता रही। उन्होंने नगर में 52 सिद्धि तप सहित अन्य तपस्याएं होने की जानकारी दी है।</p>
<p>समाज के अनुसार, फेराई नगर में लगभग 50 जैन परिवार हैं और जैन समुदाय के लोगों की संख्या करीब 190 है। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि इतने छोटे समुदाय में बड़ी संख्या में लोगों का तप और आराधना से जुड़ना उनके लिए विशेष अवसर है। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रवचन, पूजा और अन्य धार्मिक गतिविधियां भी जारी हैं।</p>
<h2><strong>52 सिद्धि तप और दो मासक्षमण की जानकारी</strong></h2>
<p>सचिन भंडारी ने बताया कि नगर में <strong>52 सिद्धि तप</strong>, <strong>दो मासक्षमण</strong> और <strong>आठ अठाई</strong> की तपस्याएं हुई हैं। इसके अलावा 35 आराधकों ने नौ दिवसीय नवकार महामंत्र आराधना में भाग लिया। समाज की ओर से बेले और तेले की तपस्याओं तथा आयंबिल तप की निरंतर चल रही शृंखला की भी जानकारी दी गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि चातुर्मास शुरू होने के बाद से नगर में अलग-अलग रूपों में तप साधना का क्रम चल रहा है। आराधक अपनी क्षमता और संकल्प के अनुसार इन गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। समाज के सदस्य इसे व्यक्तिगत साधना के साथ सामूहिक धार्मिक आयोजन के रूप में भी देख रहे हैं।</p>
<h2><strong>दो दिवसीय सिद्धि तप महोत्सव संपन्न</strong></h2>
<p>साध्वीजी की निश्रा में फेराई नगर में दो दिवसीय सिद्धि तप महोत्सव आयोजित किया गया। समाज के अनुसार, आयोजन में 62 तपस्वी शामिल हुए। समाज ने इसे नगर में आयोजित प्रमुख धार्मिक कार्यक्रमों में से एक बताया।</p>
<p>सिद्धि तप की बताई गई संख्या और महोत्सव में शामिल तपस्वियों की संख्या अलग-अलग दी गई है। समाज की जानकारी के अनुसार 52 सिद्धि तप हुए, जबकि दो दिवसीय महोत्सव में कुल 62 तपस्वियों की सहभागिता रही। आयोजन के दौरान समाज के लोगों ने तपस्वियों के प्रयासों का सम्मान किया और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।</p>
<h2><strong>प्रवचन और पूजा में शामिल हो रहे श्रद्धालु</strong></h2>
<p>समाज के मीडिया प्रभारी के अनुसार, साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी के प्रतिदिन होने वाले प्रवचनों में नगर और आसपास के लोग शामिल हो रहे हैं। जैन समुदाय के साथ अन्य समाजों के लोगों की भी उपस्थिति बताई गई है। प्रवचन में श्रद्धालु धार्मिक विचार सुनने और चातुर्मास की गतिविधियों से जुड़ने पहुंचते हैं।</p>
<p>नगर में श्रद्धालु अभिषेक, स्नात्र पूजा और प्रभु पूजा जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में भी भाग ले रहे हैं। चातुर्मास के दौरान आयंबिल और अन्य तपस्याओं के साथ इन आयोजनों का क्रम जारी है। समाज के सदस्यों का कहना है कि साध्वीजी के मंगल प्रवेश के बाद नगर में धार्मिक गतिविधियों में लोगों की भागीदारी बढ़ी है।</p>
<h2><strong>समाज ने जताई प्रसन्नता</strong></h2>
<p>जैन समाज के अनुसार, साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी, साध्वी भुवनप्रभा श्रीजी की सुशिष्या हैं और गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज साहब की आज्ञानुवर्तिनी हैं। चातुर्मास के लिए उनके फेराई नगर में विराजने के बाद समाज ने तप और आराधना के कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं।</p>
<p>समाज के पदाधिकारियों ने तपस्वियों, आराधकों और कार्यक्रमों में सहयोग देने वाले लोगों के प्रति प्रसन्नता व्यक्त की। सचिन भंडारी ने कहा कि छोटे नगर में बड़ी संख्या में तपस्याओं और दो दिवसीय महोत्सव का आयोजन समाज के सामूहिक सहयोग से संभव हुआ। चातुर्मास की शेष अवधि में भी प्रवचन और धार्मिक आराधना का क्रम जारी रहेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व</title>
		<link>https://swarajvani.com/paryushan-day-7-in-mahidpur-road-sadhvi-dr-amritrasa-shriji-calls-the-festival-an-ideal-time-for-spiritual/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Sep 2026 12:31:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Jai]]></category>
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					<description><![CDATA[पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व दैनिक स्वराज वाणी। महिदपुर रोड। पर्यूषण महापर्व के सप्तम दिवस रविवार को नगर में ... <a title="पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व" class="read-more" href="https://swarajvani.com/paryushan-day-7-in-mahidpur-road-sadhvi-dr-amritrasa-shriji-calls-the-festival-an-ideal-time-for-spiritual/" aria-label="Read more about पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व</strong></h1>
<p><strong>दैनिक स्वराज वाणी। महिदपुर रोड।</strong> पर्यूषण महापर्व के सप्तम दिवस रविवार को नगर में चातुर्मास हेतु विराजित पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा के सान्निध्य में धर्मसभा आयोजित हुई। साध्वीश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महापर्व के दिनों का सदुपयोग करने और धर्म आराधना के लिए तत्पर रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि पर्यूषण के आठ दिन तथा पर्व तिथियां मानव मात्र के लिए आराधना का श्रेष्ठ अवसर हैं।</p>
<p>धर्मसभा में साध्वीश्री ने बताया कि महापर्व के दौरान की गई थोड़ी-सी धर्म आराधना भी अत्यंत फलदायी होती है। इसलिए इन दिनों को श्रद्धा और साधना के साथ बिताना चाहिए। आयोजन में सकल जैन श्रीसंघ के सदस्यों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<h2><strong>महापर्व के आठ दिनों का करें सदुपयोग</strong></h2>
<p>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने अपने संबोधन में पर्यूषण के आठ दिनों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह समय धर्म आराधना के लिए विशेष अवसर प्रदान करता है। श्रद्धालुओं को महापर्व के दिनों में धर्म से जुड़ने और आराधना करने के लिए तत्पर रहना चाहिए।</p>
<p>उनके संदेश का केंद्र समय का सदुपयोग और धार्मिक साधना के प्रति सक्रियता रहा। उन्होंने महापर्व के दिनों तथा पर्व तिथियों को मानव मात्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। धर्मसभा में उपस्थित लोगों को इन अवसरों का लाभ लेने और अपनी क्षमता के अनुसार आराधना में भाग लेने की प्रेरणा मिली।</p>
<h2><strong>थोड़ी-सी आराधना भी होती है फलदायी</strong></h2>
<p>साध्वीश्री ने कहा कि महापर्व के दिनों में थोड़ी-सी धर्म आराधना भी बहुत अधिक फलदायी होती है। इस विचार के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को आराधना के प्रति उत्साहित किया। उनका आग्रह रहा कि पर्व के दौरान मिलने वाले अवसर को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।</p>
<p>प्रवचन में व्यक्त यह संदेश आराधना के लिए तत्परता का भाव सामने लाता है। साध्वीश्री ने उपस्थित धर्मसभा को समझाया कि महापर्व का समय धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने का श्रेष्ठ अवसर है। श्रद्धालुओं ने उनके विचार सुने और धर्मसभा में सहभागिता की।</p>
<h2><strong>चातुर्मास में साध्वीश्री का सान्निध्य</strong></h2>
<p>महिदपुर रोड में पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा चातुर्मास हेतु विराजित हैं। उनके सान्निध्य में पर्यूषण महापर्व के सप्तम दिवस का आयोजन हुआ। रविवार की धर्मसभा में उन्होंने महापर्व की आराधना के महत्व पर मार्गदर्शन दिया।</p>
<p>नगर के जैन समाज को चातुर्मास के दौरान साध्वीश्री का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है। सप्तम दिवस की सभा में भी इसी क्रम में श्रद्धालु एकत्र हुए। प्रवचन के साथ धार्मिक आयोजन में सहभागिता ने समाज के सदस्यों को सामूहिक रूप से धर्मलाभ प्राप्त करने का अवसर दिया।</p>
<h2><strong>भंडारी परिवार ने लिया पूजा आयोजन का लाभ</strong></h2>
<p>जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि इस दिन की स्नात्र पूजा, अंगरचना और प्रभावना का लाभ पारसमल अनोखीलाल भंडारी परिवार, खारवा वाला ने लिया।</p>
<p>परिवार की सहभागिता का उल्लेख सप्तम दिवस के धार्मिक आयोजन में किया गया। पूजा और उससे जुड़ी गतिविधियों में समाज के सदस्यों ने उपस्थित होकर भाग लिया। इस अवसर पर धर्मसभा तथा पूजा आयोजन के माध्यम से महापर्व की आराधना का क्रम आगे बढ़ा।</p>
<h2><strong>कोचर और मोदी परिवार ने लिया प्रवचन प्रभावना का लाभ</strong></h2>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-357541 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-300x135.jpeg" alt="dfds" width="591" height="266" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-300x135.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-1024x461.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-768x346.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds.jpeg 1152w" sizes="(max-width: 591px) 100vw, 591px" /><span style="font-size: inherit;">सचिन भंडारी के अनुसार, प्रवचन प्रभावना का लाभ अशोक कुमार हिमांशु कोचर परिवार तथा प्रकाशचंद मोदी परिवार, जावरा ने लिया। दोनों परिवारों की सहभागिता के साथ प्रवचन प्रभावना का आयोजन हुआ।</span></p>
<p>सप्तम दिवस पर पूजा और प्रवचन से जुड़े विभिन्न लाभार्थी परिवारों का विवरण समाज की ओर से साझा किया गया। आयोजन में परिवारों की भागीदारी के साथ सकल जैन श्रीसंघ की उपस्थिति रही। श्रद्धालुओं ने साध्वीश्री के प्रवचन सुनकर धर्म आराधना का महत्व समझा।</p>
<h2><strong>सकल जैन श्रीसंघ ने प्राप्त किया धर्मलाभ</strong></h2>
<p>संपूर्ण आयोजन में सकल जैन श्रीसंघ के सदस्यों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। महापर्व के सप्तम दिवस की धर्मसभा में आराधना के प्रति तत्पर रहने का संदेश प्रमुख रहा।</p>
<p>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने पर्यूषण के दिनों को श्रेष्ठ अवसर बताते हुए श्रद्धालुओं को धर्म साधना से जुड़ने की प्रेरणा दी। उनके संबोधन ने महापर्व के समय का श्रद्धापूर्वक उपयोग करने और थोड़ी-सी आराधना के महत्व को समझने का संदेश दिया।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>सिद्धि तप तपस्वियों की सातवीं लड़ी के बियासने का आयोजन</title>
		<link>https://swarajvani.com/grand-rath-yatra-to-be-held-on-september-17-in-honour-of-54-jain-tapasvis-in-mahidpur-road/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Sep 2026 12:14:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ujjain]]></category>
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		<category><![CDATA[Parna Mahotsav]]></category>
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		<category><![CDATA[Tapasya Anumodana]]></category>
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					<description><![CDATA[सिद्धि तप तपस्वियों की सातवीं लड़ी के बियासने का आयोजन 52 सिद्धि तप और दो मासक्षमण तपस्वियों की अनुमोदना में 17 सितंबर को निकलेगी भव्य रथयात्रा 50 से अधिक श्रीसंघों ... <a title="सिद्धि तप तपस्वियों की सातवीं लड़ी के बियासने का आयोजन" class="read-more" href="https://swarajvani.com/grand-rath-yatra-to-be-held-on-september-17-in-honour-of-54-jain-tapasvis-in-mahidpur-road/" aria-label="Read more about सिद्धि तप तपस्वियों की सातवीं लड़ी के बियासने का आयोजन">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>सिद्धि तप तपस्वियों की सातवीं लड़ी के बियासने का आयोजन</strong></h1>
<h2><strong>52 सिद्धि तप और दो मासक्षमण तपस्वियों की अनुमोदना में 17 सितंबर को निकलेगी भव्य रथयात्रा</strong></h2>
<h3><strong>50 से अधिक श्रीसंघों के हजारों समाजजन होंगे शामिल, 16 सितंबर को चौबीसी गीत और भक्ति संध्या</strong></h3>
<p><strong>महिदपुर रोड।</strong> नगर में चातुर्मास हेतु विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा की पावनकारी निश्रा में सोमवार को 52 सिद्धि तप तपस्वियों की सातवीं लड़ी के बियासने का धार्मिक आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजनों ने उपस्थित होकर तपस्वियों की अनुमोदना की और धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p>सिद्धि तप के 52 एवं मासक्षमण के दो तपस्वियों सहित कुल 54 तपस्वियों की तप आराधना के अनुमोदनार्थ नगर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्य आयोजन 16 और 17 सितंबर को होंगे। इसे लेकर जैन समाज में उत्साह का वातावरण बना हुआ है।</p>
<h2><strong>16 सितंबर को चौबीसी गीत और भक्ति संध्या</strong></h2>
<p>आयोजन के अंतर्गत 16 सितंबर को दोपहर में चौबीसी गीत का आयोजन किया जाएगा। रात्रि में अहमदाबाद के सुप्रसिद्ध कलाकार आशीष जैन एंड पार्टी द्वारा भव्य प्रभु भक्ति संध्या प्रस्तुत की जाएगी। इस दौरान भक्ति गीतों और धार्मिक प्रस्तुतियों के माध्यम से तपस्वियों की अनुमोदना की जाएगी।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान प्रातः एवं सायंकाल स्वामी वात्सल्य और नवकारसी का आयोजन भी होगा। आयोजन समिति की ओर से सभी कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही हैं।</p>
<h2><strong>17 सितंबर को निकलेगी ऐतिहासिक रथयात्रा</strong></h2>
<p>तपस्वियों के अनुमोदनार्थ 17 सितंबर को नगर में भव्य पारणा रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा में सुप्रसिद्ध बैंड, ढोल-नगाड़े, विभिन्न धार्मिक मंडल, 30 से अधिक बग्घियां तथा भगवान, परमात्मा और गुरुदेव के आकर्षक रथ शामिल होंगे।</p>
<p>समाज की महिलाएं और पुरुष आकर्षक पारंपरिक वेशभूषा में सम्मिलित होकर रथयात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। रथयात्रा के साथ पारणा, फल-चुनरी, स्वामी वात्सल्य और नवकारसी सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। इस अवसर पर 50 से अधिक श्रीसंघों के हजारों समाजजनों के नगर पहुंचने की संभावना है। इससे पूरे नगर में आस्था और भक्ति का जनसैलाब उमड़ेगा।</p>
<h2><strong>लाभार्थी परिवारों ने लिया धर्मलाभ</strong></h2>
<p>सोमवार को आयोजित 52 सिद्धि तप तपस्वियों के प्रातःकालीन बियासने का मंगलकारी लाभ स्वर्गीय शांतिलाल-कांता मुणत की स्मृति में श्रीपाल, रानी, लियांश और श्रेयल मुणत परिवार, जावरा द्वारा लिया गया।</p>
<p>सायंकालीन बियासने का लाभ स्वर्गीय प्रकाशचंद-सुरेशचंद चत्तर की स्मृति में चंदाबाई, शीलाबाई, पीयूष, चंदन, संदीप, सीमा, प्रणय, देशना और पार्थ चत्तर परिवार द्वारा लिया गया।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान 12 श्रीसंघों ने सिद्धि तप तपस्वियों की प्रभावना की। साधर्मिक भक्ति और प्रभावना का लाभ अशोक कुमार-हिमांशु कोचर परिवार ने लिया। संपूर्ण आयोजन में बड़ी संख्या में समाजजनों ने उपस्थित होकर तपस्वियों की अनुमोदना की तथा धर्म आराधना का लाभ प्राप्त किया।</p>
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		<title>सिद्धि तप के तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से हुआ वधामणा, धर्मसभा में उमड़े श्रद्धालु</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 08:31:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[Amritrasa Shriji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Mahidpur Road]]></category>
		<category><![CDATA[Mahidpur Road News]]></category>
		<category><![CDATA[Sadhvi Dr Amritrasa Shriji]]></category>
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					<description><![CDATA[सिद्धि तप के तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से हुआ वधामणा, धर्मसभा में उमड़े श्रद्धालु साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा- ज्ञान अर्जन का प्रमुख माध्यम है धार्मिक पाठशाला, बच्चों ... <a title="सिद्धि तप के तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से हुआ वधामणा, धर्मसभा में उमड़े श्रद्धालु" class="read-more" href="https://swarajvani.com/siddhi-tap-in-mahidpur-road-religious-pathshala-is-the-key-source-of-spiritual-knowledge-says-sadhvi-dr-amritrasa-shriji/" aria-label="Read more about सिद्धि तप के तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से हुआ वधामणा, धर्मसभा में उमड़े श्रद्धालु">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>सिद्धि तप के तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से हुआ वधामणा, धर्मसभा में उमड़े श्रद्धालु</strong></h1>
<h2><strong>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा- ज्ञान अर्जन का प्रमुख माध्यम है धार्मिक पाठशाला, बच्चों में धार्मिक संस्कार विकसित करने के लिए पाठशाला भेजना जरूरी</strong></h2>
<p><strong>महिदपुर रोड।</strong> श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब के पावन सान्निध्य में सिद्धि तप के तृतीय दिवस विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर सिद्धि तप करने वाले तपस्वियों का अक्षत के माध्यम से वधामणा किया गया। बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने आयोजन में शामिल होकर तपस्वियों की अनुमोदना की और धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p>बुधवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने जीवन में धार्मिक ज्ञान और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धर्म की साधना और आराधना को सही रूप में समझने के लिए ज्ञान आवश्यक है। ज्ञान के अभाव में केवल क्रिया करने से उसके वास्तविक उद्देश्य को समझना कठिन हो जाता है।</p>
<h3><strong>धार्मिक ज्ञान जीवन के लिए परम आवश्यक</strong></h3>
<p>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा कि जीवन में धर्म का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने धर्मसभा में संदेश देते हुए कहा, <strong>“ज्ञान बिना सब क्रिया झूठी, करें आवश्यक अनुसारी।”</strong> इसका आशय समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति को धार्मिक क्रियाओं का ज्ञान और उनके पीछे का उद्देश्य समझ में नहीं आता, तब तक केवल बाहरी क्रियाएं करना पर्याप्त नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ज्ञान व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता प्रदान करता है। धार्मिक जीवन में भी ज्ञान के साथ की गई आराधना साधक को उसके वास्तविक उद्देश्य की ओर आगे बढ़ाती है।</p>
<h3><strong>बच्चों को धार्मिक पाठशाला भेजने का किया आह्वान</strong></h3>
<p>साध्वी श्रीजी ने वर्तमान पीढ़ी में धार्मिक संस्कारों की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को धार्मिक ज्ञान देने के लिए धार्मिक पाठशालाएं महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यदि हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी रहे तो बच्चों को नियमित रूप से धार्मिक पाठशाला भेजना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बच्चों के मन में छोटी उम्र से ही अच्छे संस्कारों के बीज बोना जरूरी है। बचपन में प्राप्त धार्मिक शिक्षा जीवनभर व्यक्ति के आचरण और विचारों को प्रभावित करती है।</p>
<p>साध्वी श्रीजी ने कहा कि वर्तमान में धर्म प्रभावना कर रहे अनेक बड़े आचार्य, साधु-साध्वी और धर्माचार्यों ने भी अपने जीवन के प्रारंभिक समय में पाठशालाओं से धार्मिक अध्ययन किया। यही ज्ञान आगे चलकर उनकी साधना और आध्यात्मिक यात्रा का आधार बना।</p>
<h3><strong>मानव जीवन भक्त से भगवान बनने के लिए मिला</strong></h3>
<p>धर्मसभा के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने मानव जीवन के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह मानव भव अत्यंत दुर्लभ है। मनुष्य को मिला शरीर केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और धर्म आराधना के लिए भी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मानव जीवन हमें <strong>“भक्त से भगवान बनने”</strong> की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। मनुष्य को तन और मन मिला है तो उसका उपयोग धर्म, साधना, संयम और आत्मकल्याण के लिए करना चाहिए।</p>
<p>जीवन में धार्मिक संस्कार और आध्यात्मिक चेतना व्यक्ति को अपने वास्तविक स्वरूप को समझने में सहायता करते हैं। इसलिए सांसारिक जिम्मेदारियों के साथ धर्म आराधना के लिए भी समय निकालना आवश्यक है।</p>
<h3><strong>कृष्ण महाराजा का प्रसंग सुनाकर समझाई भावों की महत्ता</strong></h3>
<p><img decoding="async" class="wp-image-352532 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/sdsa-300x135.jpeg" alt="sdsa" width="520" height="234" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/sdsa-300x135.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/sdsa-1024x461.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/sdsa-768x346.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/sdsa.jpeg 1152w" sizes="(max-width: 520px) 100vw, 520px" /><br />
साध्वी श्रीजी ने धर्मसभा में कृष्ण महाराजा से जुड़ा धार्मिक प्रसंग सुनाते हुए भावों की महत्ता समझाई। उन्होंने कहा कि कृष्ण महाराजा ने 18 हजार साधुओं को शुद्ध भाव से वंदन कर पुण्य का उपार्जन किया।</p>
<p>इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि धर्म में केवल बाहरी क्रिया नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद शुद्ध भाव का भी अत्यधिक महत्व है। सच्चे और निर्मल भाव से की गई वंदना, आराधना और सेवा व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम बन सकती है।</p>
<h3><strong>हर जीव में शिव के दर्शन करने की प्रेरणा</strong></h3>
<p>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने जीव दया और समभाव का संदेश देते हुए कहा कि हमें प्रत्येक जीव में शिव के दर्शन करने चाहिए। संसार में चींटी से लेकर हाथी तक प्रत्येक जीव में आत्मा विद्यमान है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जैन दर्शन प्रत्येक जीव के प्रति करुणा, अहिंसा और समानता की भावना रखने की प्रेरणा देता है। किसी जीव को छोटा या बड़ा समझने के बजाय उसके भीतर मौजूद आत्मतत्व को देखने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<p>जब मनुष्य प्रत्येक जीव के प्रति दया और करुणा की भावना विकसित करता है, तभी अहिंसा का वास्तविक स्वरूप उसके जीवन में दिखाई देता है।</p>
<h3><strong>तृतीय दिवस तपस्वियों का अक्षत से किया वधामणा</strong></h3>
<p>सिद्धि तप के तृतीय दिवस के मंगलकारी अवसर पर तपस्वियों के अक्षत वधामणा का विशेष आयोजन किया गया। लाभार्थी परिवारों एवं समाजजनों ने अक्षत के माध्यम से तपस्वियों का वधामणा कर उनकी कठिन तपस्या की अनुमोदना की।</p>
<p>धार्मिक वातावरण के बीच आयोजित कार्यक्रम में समाजजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। तपस्वियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके तप की सुख-साता पूछी गई और मंगलकामनाएं की गईं।</p>
<h3><strong>बरडिया परिवार ने लिया संपूर्ण दिवस का लाभ</strong></h3>
<p>जैन समाज के मीडिया प्रभारी <strong>सचिन भंडारी</strong> ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को आयोजित साधार्मिक भक्ति, प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस का लाभ <strong>कांतिलाल, राजेश कुमार, संदीप कुमार और कुलदीप कुमार बरडिया परिवार</strong> द्वारा लिया गया।</p>
<p>वहीं सिद्धि तप के तृतीय दिवस आयोजित अक्षत वधामणा का लाभ <strong>जैन श्वेतांबर सोशल ग्रुप केसरिया यूनिक शाखा, महिदपुर रोड</strong> द्वारा लिया गया।</p>
<h3><strong>दो घंटे तक चला धार्मिक आयोजन</strong></h3>
<p>करीब दो घंटे तक चले धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला-पुरुष, युवा एवं वरिष्ठजन उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब के प्रवचनों का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p>पूरे आयोजन के दौरान धर्म, तप, ज्ञान, जीवदया और संस्कारों का संदेश दिया गया। विशेष रूप से बच्चों को धार्मिक पाठशालाओं से जोड़ने की प्रेरणा देते हुए साध्वी श्रीजी ने समाज से आह्वान किया कि नई पीढ़ी को धार्मिक ज्ञान और संस्कार प्रदान करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।</p>
<p>सिद्धि तप के तृतीय दिवस का आयोजन तपस्वियों के सम्मान, धर्म आराधना और साध्वी श्रीजी के प्रेरणादायी संदेशों के साथ धर्ममय वातावरण में संपन्न हुआ।</p>
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