पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व
दैनिक स्वराज वाणी। महिदपुर रोड। पर्यूषण महापर्व के सप्तम दिवस रविवार को नगर में चातुर्मास हेतु विराजित पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा के सान्निध्य में धर्मसभा आयोजित हुई। साध्वीश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महापर्व के दिनों का सदुपयोग करने और धर्म आराधना के लिए तत्पर रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि पर्यूषण के आठ दिन तथा पर्व तिथियां मानव मात्र के लिए आराधना का श्रेष्ठ अवसर हैं।
धर्मसभा में साध्वीश्री ने बताया कि महापर्व के दौरान की गई थोड़ी-सी धर्म आराधना भी अत्यंत फलदायी होती है। इसलिए इन दिनों को श्रद्धा और साधना के साथ बिताना चाहिए। आयोजन में सकल जैन श्रीसंघ के सदस्यों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
महापर्व के आठ दिनों का करें सदुपयोग
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने अपने संबोधन में पर्यूषण के आठ दिनों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह समय धर्म आराधना के लिए विशेष अवसर प्रदान करता है। श्रद्धालुओं को महापर्व के दिनों में धर्म से जुड़ने और आराधना करने के लिए तत्पर रहना चाहिए।
उनके संदेश का केंद्र समय का सदुपयोग और धार्मिक साधना के प्रति सक्रियता रहा। उन्होंने महापर्व के दिनों तथा पर्व तिथियों को मानव मात्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। धर्मसभा में उपस्थित लोगों को इन अवसरों का लाभ लेने और अपनी क्षमता के अनुसार आराधना में भाग लेने की प्रेरणा मिली।
थोड़ी-सी आराधना भी होती है फलदायी
साध्वीश्री ने कहा कि महापर्व के दिनों में थोड़ी-सी धर्म आराधना भी बहुत अधिक फलदायी होती है। इस विचार के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को आराधना के प्रति उत्साहित किया। उनका आग्रह रहा कि पर्व के दौरान मिलने वाले अवसर को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।
प्रवचन में व्यक्त यह संदेश आराधना के लिए तत्परता का भाव सामने लाता है। साध्वीश्री ने उपस्थित धर्मसभा को समझाया कि महापर्व का समय धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने का श्रेष्ठ अवसर है। श्रद्धालुओं ने उनके विचार सुने और धर्मसभा में सहभागिता की।
चातुर्मास में साध्वीश्री का सान्निध्य
महिदपुर रोड में पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा चातुर्मास हेतु विराजित हैं। उनके सान्निध्य में पर्यूषण महापर्व के सप्तम दिवस का आयोजन हुआ। रविवार की धर्मसभा में उन्होंने महापर्व की आराधना के महत्व पर मार्गदर्शन दिया।
नगर के जैन समाज को चातुर्मास के दौरान साध्वीश्री का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है। सप्तम दिवस की सभा में भी इसी क्रम में श्रद्धालु एकत्र हुए। प्रवचन के साथ धार्मिक आयोजन में सहभागिता ने समाज के सदस्यों को सामूहिक रूप से धर्मलाभ प्राप्त करने का अवसर दिया।
भंडारी परिवार ने लिया पूजा आयोजन का लाभ
जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि इस दिन की स्नात्र पूजा, अंगरचना और प्रभावना का लाभ पारसमल अनोखीलाल भंडारी परिवार, खारवा वाला ने लिया।
परिवार की सहभागिता का उल्लेख सप्तम दिवस के धार्मिक आयोजन में किया गया। पूजा और उससे जुड़ी गतिविधियों में समाज के सदस्यों ने उपस्थित होकर भाग लिया। इस अवसर पर धर्मसभा तथा पूजा आयोजन के माध्यम से महापर्व की आराधना का क्रम आगे बढ़ा।
कोचर और मोदी परिवार ने लिया प्रवचन प्रभावना का लाभ
सचिन भंडारी के अनुसार, प्रवचन प्रभावना का लाभ अशोक कुमार हिमांशु कोचर परिवार तथा प्रकाशचंद मोदी परिवार, जावरा ने लिया। दोनों परिवारों की सहभागिता के साथ प्रवचन प्रभावना का आयोजन हुआ।
सप्तम दिवस पर पूजा और प्रवचन से जुड़े विभिन्न लाभार्थी परिवारों का विवरण समाज की ओर से साझा किया गया। आयोजन में परिवारों की भागीदारी के साथ सकल जैन श्रीसंघ की उपस्थिति रही। श्रद्धालुओं ने साध्वीश्री के प्रवचन सुनकर धर्म आराधना का महत्व समझा।
सकल जैन श्रीसंघ ने प्राप्त किया धर्मलाभ
संपूर्ण आयोजन में सकल जैन श्रीसंघ के सदस्यों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। महापर्व के सप्तम दिवस की धर्मसभा में आराधना के प्रति तत्पर रहने का संदेश प्रमुख रहा।
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने पर्यूषण के दिनों को श्रेष्ठ अवसर बताते हुए श्रद्धालुओं को धर्म साधना से जुड़ने की प्रेरणा दी। उनके संबोधन ने महापर्व के समय का श्रद्धापूर्वक उपयोग करने और थोड़ी-सी आराधना के महत्व को समझने का संदेश दिया।
