फेराई नगर में चातुर्मास के दौरान तप और आराधना के आयोजन, 52 सिद्धि तप की जानकारी
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी की निश्रा में दो दिवसीय सिद्धि तप महोत्सव संपन्न; जैन समाज ने 62 तपस्वियों के सम्मान की दी जानकारी
महिदपुर रोड। फेराई नगर में चातुर्मास के दौरान जैन समाज की ओर से तप, धार्मिक आराधना और प्रवचन के विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं। नगर में विराजित साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा की निश्रा में हाल ही में दो दिवसीय सिद्धि तप महोत्सव आयोजित हुआ। जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी के अनुसार, महोत्सव में 62 तपस्वियों की सहभागिता रही। उन्होंने नगर में 52 सिद्धि तप सहित अन्य तपस्याएं होने की जानकारी दी है।
समाज के अनुसार, फेराई नगर में लगभग 50 जैन परिवार हैं और जैन समुदाय के लोगों की संख्या करीब 190 है। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि इतने छोटे समुदाय में बड़ी संख्या में लोगों का तप और आराधना से जुड़ना उनके लिए विशेष अवसर है। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रवचन, पूजा और अन्य धार्मिक गतिविधियां भी जारी हैं।
52 सिद्धि तप और दो मासक्षमण की जानकारी
सचिन भंडारी ने बताया कि नगर में 52 सिद्धि तप, दो मासक्षमण और आठ अठाई की तपस्याएं हुई हैं। इसके अलावा 35 आराधकों ने नौ दिवसीय नवकार महामंत्र आराधना में भाग लिया। समाज की ओर से बेले और तेले की तपस्याओं तथा आयंबिल तप की निरंतर चल रही शृंखला की भी जानकारी दी गई है।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास शुरू होने के बाद से नगर में अलग-अलग रूपों में तप साधना का क्रम चल रहा है। आराधक अपनी क्षमता और संकल्प के अनुसार इन गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। समाज के सदस्य इसे व्यक्तिगत साधना के साथ सामूहिक धार्मिक आयोजन के रूप में भी देख रहे हैं।
दो दिवसीय सिद्धि तप महोत्सव संपन्न
साध्वीजी की निश्रा में फेराई नगर में दो दिवसीय सिद्धि तप महोत्सव आयोजित किया गया। समाज के अनुसार, आयोजन में 62 तपस्वी शामिल हुए। समाज ने इसे नगर में आयोजित प्रमुख धार्मिक कार्यक्रमों में से एक बताया।
सिद्धि तप की बताई गई संख्या और महोत्सव में शामिल तपस्वियों की संख्या अलग-अलग दी गई है। समाज की जानकारी के अनुसार 52 सिद्धि तप हुए, जबकि दो दिवसीय महोत्सव में कुल 62 तपस्वियों की सहभागिता रही। आयोजन के दौरान समाज के लोगों ने तपस्वियों के प्रयासों का सम्मान किया और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
प्रवचन और पूजा में शामिल हो रहे श्रद्धालु
समाज के मीडिया प्रभारी के अनुसार, साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी के प्रतिदिन होने वाले प्रवचनों में नगर और आसपास के लोग शामिल हो रहे हैं। जैन समुदाय के साथ अन्य समाजों के लोगों की भी उपस्थिति बताई गई है। प्रवचन में श्रद्धालु धार्मिक विचार सुनने और चातुर्मास की गतिविधियों से जुड़ने पहुंचते हैं।
नगर में श्रद्धालु अभिषेक, स्नात्र पूजा और प्रभु पूजा जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में भी भाग ले रहे हैं। चातुर्मास के दौरान आयंबिल और अन्य तपस्याओं के साथ इन आयोजनों का क्रम जारी है। समाज के सदस्यों का कहना है कि साध्वीजी के मंगल प्रवेश के बाद नगर में धार्मिक गतिविधियों में लोगों की भागीदारी बढ़ी है।
समाज ने जताई प्रसन्नता
जैन समाज के अनुसार, साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी, साध्वी भुवनप्रभा श्रीजी की सुशिष्या हैं और गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज साहब की आज्ञानुवर्तिनी हैं। चातुर्मास के लिए उनके फेराई नगर में विराजने के बाद समाज ने तप और आराधना के कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
समाज के पदाधिकारियों ने तपस्वियों, आराधकों और कार्यक्रमों में सहयोग देने वाले लोगों के प्रति प्रसन्नता व्यक्त की। सचिन भंडारी ने कहा कि छोटे नगर में बड़ी संख्या में तपस्याओं और दो दिवसीय महोत्सव का आयोजन समाज के सामूहिक सहयोग से संभव हुआ। चातुर्मास की शेष अवधि में भी प्रवचन और धार्मिक आराधना का क्रम जारी रहेगा।
