75 हजार स्नेह दीपों से जगमगाएंगे घर, दिव्यांगजनों ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की
नागदा (प्रमोद कुमार जैन)। इस दीपावली देशभर के हजारों घरों में स्नेह परिसर में बने दीपक रोशनी फैलाएंगे। इन दीपकों को दिव्यांगजनों ने अपनी मेहनत, प्रशिक्षण और रचनात्मकता से तैयार किया है। दीपकों की बिक्री से प्राप्त आय से स्नेह के 175 दिव्यांगजनों और 42 प्रशिक्षकों को लगभग पांच लाख रुपये मूल्य के दीपावली उपहार दिए गए। उपहार वितरण समारोह स्नेह परिसर में हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में एसडीएम रंजना पाटीदार, सीएसपी कमल निगवाल, ग्रेसिम उद्योग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोविंद कांकरा, तहसीलदार मधु नायक, ग्रेसिम उद्योग के लीगल हेड अशोक शर्मा, लायंस जोन चेयरपर्सन अशोक बिसानी, लायंस क्लब नागदा ग्रेटर के अध्यक्ष डॉ. ओम बैरागी, लायंस क्लब नागदा गोल्ड के अध्यक्ष लखन गुर्जर और लियो क्लब स्नेह के अध्यक्ष दक्ष प्रजापत अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
एक हजार दीपकों से शुरू हुआ सफर
स्नेह के संस्थापक डॉ. पंकज मारू ने स्वागत उद्बोधन में संस्था की इस पहल की यात्रा बताई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में केवल एक हजार दीपकों के निर्माण से आत्मनिर्भरता का यह प्रयास शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह पहल आगे बढ़ी और इस वर्ष दिव्यांगजनों ने 75 हजार आकर्षक एवं कलात्मक दीपक तैयार किए।
बीते ढाई महीनों में स्नेह के सेल्फ एडवोकेट्स और अन्य दिव्यांगजनों ने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में दीपक बनाने का काम किया। मिट्टी और अन्य सामग्री से दीपकों को आकार देने से लेकर उन्हें आकर्षक रूप देने तक, निर्माण की प्रक्रिया में दिव्यांगजनों ने अपने कौशल का उपयोग किया। संस्था के अनुसार, यह पहल केवल दीपक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों को अपने काम के माध्यम से पहचान और आत्मनिर्भरता का अवसर भी देती है।
देशभर में पहुंचे स्नेह दीप
आत्मनिर्भर भारत की भावना से तैयार इन दीपकों का विक्रय देश के विभिन्न हिस्सों में किया गया। इस वर्ष स्नेह दीप राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों, विभिन्न राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों तक पहुंचाए गए। इन्हें तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ मध्यप्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों तक भी भेजा गया।
संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में इन दीपकों की मांग और पहुंच से दिव्यांगजनों के काम को व्यापक पहचान मिली है। दीपावली पर इन दीपकों के माध्यम से उनके श्रम और हुनर का संदेश भी लोगों तक पहुंचेगा।
मेहनत की आय से उपहार और बोनस
समारोह में दीपकों की बिक्री से प्राप्त आय का उपयोग दिव्यांगजनों और प्रशिक्षकों के लिए दीपावली उपहार देने में किया गया। 175 दिव्यांगजनों को उनकी पसंद के नए कपड़े, मिठाइयां और पटाखे भेंट किए गए। 42 प्रशिक्षकों को भी उपहारों के साथ बोनस दिया गया। इन उपहारों का कुल मूल्य करीब पांच लाख रुपये बताया गया।
दीपावली उपहार वितरण ने समारोह को विशेष बना दिया। जिन दीपकों को दिव्यांगजनों ने मेहनत से बनाया, उनकी बिक्री से मिली आय से उनके लिए त्योहार की खुशियां जुटाई गईं। इससे दिव्यांगजनों को अपने श्रम का प्रत्यक्ष लाभ मिला और प्रशिक्षकों के योगदान को भी सम्मानित किया गया।
प्रशिक्षण और रचनात्मक कौशल पर वीडियो
कार्यक्रम के दौरान स्नेह के दिव्यांगजनों द्वारा दीपक निर्माण की पूरी प्रक्रिया पर आधारित विशेष वीडियो दिखाया गया। वीडियो में प्रशिक्षण, दीपक तैयार करने के अलग-अलग चरणों, रचनात्मक कौशल और आत्मनिर्भरता की यात्रा को प्रस्तुत किया गया। उपस्थित लोगों ने दिव्यांगजनों की मेहनत और हुनर को सराहा।
समारोह में सतीश बजाज, सलीम खान, आशीष पोखरना सहित दिव्यांगजनों के अभिभावक और स्नेह परिवार के सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन स्नेह के उपनिदेशक महेशचंद्र राठौड़ ने किया। स्नेह के सचिव विनय राज शर्मा ने आभार माना।
स्नेह दीपों का यह अभियान बताता है कि प्रशिक्षण और उचित अवसर मिलने पर दिव्यांगजन अपनी प्रतिभा से उपयोगी उत्पाद तैयार कर सकते हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। इस दीपावली इन 75 हजार दीपकों के साथ उनकी मेहनत, रचनात्मकता और आत्मसम्मान का संदेश भी अनेक घरों तक पहुंचेगा।
