जैन बगीची में दस लक्षण महापर्व की रहेगी धूम, आर्यिका संगममति माताजी के सान्निध्य में होगी धर्माराधना
दस दिनों तक उत्तम क्षमा से उत्तम ब्रह्मचर्य तक धर्म के दस लक्षणों की होगी आराधना, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय और मंगल प्रवचन में शामिल होंगे श्रद्धालु
संवाददाता: मनोज जैन नायक
मुरैना। जैन धर्म के पावन दस लक्षण महापर्व को लेकर अम्बाह के जैन समाज में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का वातावरण बना हुआ है। जैन बगीची परिसर में परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 संगममति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में महापर्व मनाया जाएगा। इस दौरान दस दिनों तक विभिन्न धार्मिक क्रियाएं, पूजन, स्वाध्याय और धर्माराधना के कार्यक्रम आयोजित होंगे।
प्रतिदिन बड़ी संख्या में समाजजन जैन बगीची पहुंचकर भगवान जिनेंद्र देव का अभिषेक, पूजन और आराधना करेंगे। आर्यिका संगममति माताजी अपने मंगल प्रवचनों के माध्यम से दस लक्षण धर्म का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगी।
पर्व के दौरान महिला-पुरुषों के साथ युवा और बच्चे भी धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। समाज की ओर से आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
दस दिनों में दस धर्मों की आराधना
दस लक्षण महापर्व के प्रत्येक दिन एक विशेष धर्म की आराधना की जाती है। दस दिनों में क्रमशः उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य और उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का चिंतन किया जाएगा।
आर्यिका संगममति माताजी इन धर्मों के वास्तविक अर्थ और जीवन में उनके व्यावहारिक महत्व को सरल भाषा में समझाएंगी। श्रद्धालुओं को बताया जाएगा कि दस लक्षण धर्म केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ये सिद्धांत मनुष्य को अपने विचार, व्यवहार और आचरण को शुद्ध बनाने की प्रेरणा देते हैं।
समाजजनों के अनुसार महापर्व का उद्देश्य व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद दोषों की पहचान करने और उन्हें दूर करने का अवसर देना है। इसके माध्यम से मनुष्य क्षमा, विनम्रता, सरलता, सत्य, संयम और त्याग जैसे सद्गुणों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेता है।
आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर
आर्यिका संगममति माताजी ने कहा कि दस लक्षण महापर्व केवल धार्मिक क्रियाओं का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण अवसर है। व्यक्ति को इस दौरान बाहरी गतिविधियों से अधिक अपने आंतरिक भावों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर मौजूद क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकार आत्मिक शांति में बाधा बनते हैं। इन कषायों को कम करके क्षमा, सरलता, सत्य, संयम, त्याग और तप जैसे गुणों को धारण करना ही धर्माराधना की वास्तविक दिशा है।
धार्मिक अनुष्ठानों की सार्थकता तभी है, जब उनके माध्यम से व्यक्ति के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आए। पूजा-अर्चना के साथ मन, वचन और कर्म की शुद्धता पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
प्रातःकाल से बनेगा भक्तिमय वातावरण
दस लक्षण महापर्व के दौरान जैन बगीची परिसर में प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की उपस्थिति शुरू हो जाएगी। भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक और पूजन के साथ दिन के धार्मिक कार्यक्रम प्रारंभ होंगे।
श्रद्धालु स्वाध्याय के माध्यम से जैन आगम एवं धर्म के सिद्धांतों को समझेंगे। इसके बाद आर्यिका संगममति माताजी के मंगल प्रवचनों का लाभ प्राप्त करेंगे। प्रवचनों में आत्मसंयम, अहिंसा, क्षमा, सत्य, तपस्या और सदाचार से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।
समाज के वरिष्ठजन भी बच्चों और युवाओं को धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व समझाएंगे। उन्हें पूजा की विधि, जैन धर्म के मूल सिद्धांत और दस लक्षण धर्म के व्यावहारिक स्वरूप से परिचित कराया जाएगा।
महिला, पुरुष, युवा और बच्चे करेंगे सहभागिता
महापर्व में जैन समाज के सभी वर्गों की सहभागिता रहेगी। महिलाएं पूजा और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेंगी, जबकि युवा एवं बच्चे भी स्वाध्याय और अन्य कार्यक्रमों से जुड़ेंगे।
समाजजनों का कहना है कि नई पीढ़ी को धार्मिक संस्कारों से जोड़ना वर्तमान समय की आवश्यकता है। यदि बच्चों को प्रारंभ से ही अहिंसा, सत्य, क्षमा, करुणा और संयम का महत्व समझाया जाए तो वे जिम्मेदार एवं संवेदनशील नागरिक बन सकते हैं।
दस लक्षण महापर्व इसके लिए उपयुक्त अवसर है। दस दिनों तक चलने वाली धर्माराधना से युवाओं को जैन दर्शन को जानने और उसके सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलेगी।
क्षमा और विनम्रता का संदेश देता है पर्व
पर्व के प्रथम धर्म उत्तम क्षमा के माध्यम से मनुष्य को क्रोध और प्रतिशोध की भावना छोड़ने की प्रेरणा मिलती है। उत्तम मार्दव अहंकार से दूर रहकर विनम्र बनने का संदेश देता है, जबकि उत्तम आर्जव मन, वचन और कर्म में सरलता अपनाने की प्रेरणा देता है।
उत्तम शौच आंतरिक पवित्रता, उत्तम सत्य सत्यपूर्ण जीवन और उत्तम संयम इंद्रियों पर नियंत्रण का महत्व बताता है। उत्तम तप आत्मशुद्धि, उत्तम त्याग आसक्ति कम करने और उत्तम आकिंचन्य बाहरी वस्तुओं के प्रति मोह छोड़ने का संदेश देता है। उत्तम ब्रह्मचर्य आत्मा में स्थिर रहने और सदाचारी जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
इन दस धर्मों का चिंतन मनुष्य को अपने जीवन का मूल्यांकन करने और गलतियों को सुधारने का अवसर प्रदान करता है।
समापन पर होंगे विशेष धार्मिक कार्यक्रम
दस दिवसीय महापर्व के समापन अवसर पर जैन बगीची परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा समाज की ओर से तैयार की जा रही है।
समाजजनों ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से दस लक्षण महापर्व के कार्यक्रमों में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की है। उनका कहना है कि सामूहिक धर्माराधना से समाज में एकता, सद्भाव और धार्मिक संस्कार मजबूत होते हैं।
आर्यिका संगममति माताजी ससंघ के सान्निध्य में आयोजित होने वाला दस लक्षण महापर्व अम्बाह के जैन समाज के लिए विशेष धार्मिक अवसर होगा। श्रद्धालु दस दिनों तक आत्मसंयम, त्याग, तप और सदाचार की साधना करते हुए भगवान जिनेंद्र देव की आराधना करेंगे।
