झाबुआ में जर्जर आंगनबाड़ी भवन में पढ़ने को मजबूर मासूम, हर दिन मंडरा रहा हादसे का खतरा
बोलासा-तारखेड़ी के मंदिर फलिया स्थित केंद्र की बदहाल स्थिति से ग्रामीण चिंतित, नए भवन निर्माण और मूलभूत सुविधाओं की उठी मांग
रिपोर्ट: मनीष कुमट
झाबुआ जिले के बोलासा-तारखेड़ी क्षेत्र के वार्ड मंदिर फलिया स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की बदहाल स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी की एक गंभीर तस्वीर सामने ला रही है। करीब तीन दशक पुराने इस आंगनबाड़ी भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि इसकी दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, छत कमजोर हो चुकी है और कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसके बावजूद मासूम बच्चों को इसी खस्ताहाल भवन में बैठाकर शिक्षा और पोषण सेवाएं दी जा रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस भवन को अनुपयोगी घोषित कर नया भवन नहीं बनाया गया तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। इस केंद्र में आने वाले बच्चों के अभिभावक भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
1998 में बना था भवन, अब पूरी तरह हो चुका है जर्जर
ग्रामीणों के अनुसार मंदिर फलिया स्थित यह आंगनबाड़ी भवन वर्ष 1998 में बनाया गया था। निर्माण के लगभग 28 वर्ष बाद अब भवन पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है।
भवन की दीवारों में जगह-जगह चौड़ी दरारें दिखाई देती हैं। छत भी कमजोर होकर झुकने लगी है। बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, क्योंकि छत पर घास, मिट्टी और नमी जमा होने से उसके गिरने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के बाद से आज तक भवन की न तो समुचित मरम्मत कराई गई और न ही नियमित रखरखाव किया गया। वर्षों से उपेक्षा का शिकार यह भवन अब बच्चों और कर्मचारियों के लिए खतरे का कारण बन गया है।
हर दिन खतरे के साए में पढ़ रहे हैं छोटे-छोटे बच्चे
आंगनबाड़ी केंद्र का उद्देश्य छोटे बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना होता है, लेकिन मंदिर फलिया का यह केंद्र स्वयं ही असुरक्षित बना हुआ है।
प्रतिदिन यहां आने वाले मासूम बच्चे कमजोर दीवारों और जर्जर छत के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि वे हर दिन इस डर में रहते हैं कि कहीं भवन का कोई हिस्सा गिर न जाए।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि जर्जर भवनों में बच्चों को बैठाना गंभीर लापरवाही मानी जाती है, क्योंकि किसी भी समय दीवार या छत का हिस्सा गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा भी दांव पर
सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि इस केंद्र में कार्यरत दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा भी लगातार खतरे में बनी हुई है।
कार्यकर्ताओं को प्रतिदिन कई घंटे इसी भवन में रहकर बच्चों को शिक्षा, पोषण एवं अन्य सेवाएं देनी पड़ती हैं। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में उनकी जान भी जोखिम में पड़ सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो भविष्य में होने वाली किसी भी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
भवन की जर्जर स्थिति के अलावा केंद्र में मूलभूत सुविधाओं की भी भारी कमी है।
ग्रामीणों ने बताया कि यहां—
- शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है।
- बच्चों के लिए शौचालय उपलब्ध नहीं है।
- भवन में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का अभाव है।
- बरसात के दौरान पानी टपकने की समस्या बनी रहती है।
- साफ-सफाई और रखरखाव भी संतोषजनक नहीं है।
इन परिस्थितियों में छोटे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण सेवाएं उपलब्ध कराना बेहद कठिन हो गया है।
बरसात में और बढ़ जाता है खतरा
वर्तमान समय में बारिश का मौसम होने के कारण भवन की स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई है।
छत पर जमा पानी और नमी के कारण दीवारों में सीलन बढ़ रही है। कई स्थानों पर प्लास्टर झड़ चुका है और ईंटें भी दिखाई देने लगी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि लगातार बारिश हुई तो भवन का कोई हिस्सा कभी भी गिर सकता है। ऐसे में बच्चों और कर्मचारियों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और महिला एवं बाल विकास विभाग से मांग की है कि इस भवन का तत्काल निरीक्षण कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि भवन रहने योग्य नहीं है तो उसे तुरंत अनुपयोगी घोषित कर बच्चों के लिए वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था की जाए।
साथ ही नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की भी मांग की गई है।
बाल विकास परियोजना अधिकारी ने क्या कहा
बाल विकास परियोजना अधिकारी ने बताया कि विभाग को आंगनबाड़ी भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी है।
उन्होंने कहा कि विभाग बच्चों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। नए भवन के निर्माण के लिए आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है तथा संबंधित अधिकारियों के माध्यम से प्रस्ताव पर कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि सुरक्षित भवन उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
पंचायत सचिव बोले— ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव भेजा गया
पंचायत सचिव ने बताया कि भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और उसकी वर्तमान स्थिति उपयोग योग्य नहीं रही।
उन्होंने जानकारी दी कि भवन को डिस्मेंटल (ध्वस्तीकरण) करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर संबंधित विभाग को भेज दिया गया है।
प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी तथा नए भवन के निर्माण की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
सरपंच ने नए भवन निर्माण का दिया आश्वासन
ग्राम पंचायत की सरपंच गुड्डी बाई ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर नए आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा एवं पोषण सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि इस विषय को प्राथमिकता से संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ता ने जताई चिंता

सामाजिक कार्यकर्ता चरणसिंह लववंशी ने आंगनबाड़ी भवन की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार संबंधित विभागों को इसकी जानकारी देने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते भवन की समस्या का समाधान नहीं किया गया और कोई दुर्घटना हुई, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।
आंगनबाड़ी केंद्र क्यों है महत्वपूर्ण?
आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के सर्वांगीण विकास की पहली कड़ी माने जाते हैं।
इन केंद्रों पर—
- तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है।
- पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है।
- गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं मिलती हैं।
- टीकाकरण और पोषण संबंधी जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
ऐसे महत्वपूर्ण केंद्र का असुरक्षित भवन में संचालित होना बच्चों के भविष्य और सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखी हैं—
- जर्जर भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।
- भवन को अनुपयोगी घोषित कर ध्वस्त किया जाए।
- बच्चों के लिए अस्थायी सुरक्षित भवन की व्यवस्था की जाए।
- नए आंगनबाड़ी भवन का शीघ्र निर्माण कराया जाए।
- शुद्ध पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- भवन निर्माण तक बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
बच्चों की सुरक्षा पर जल्द निर्णय की जरूरत
बोलासा-तारखेड़ी के मंदिर फलिया स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति केवल एक भवन की जर्जरता का मामला नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
एक ओर सरकार बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे जर्जर भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र कई सवाल खड़े करते हैं।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग पर टिकी हैं कि वे इस मामले में कितनी शीघ्रता से कार्रवाई करते हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द ही नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी, ताकि मासूमों को भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण में शिक्षा एवं पोषण सेवाएं मिल सकें।
