Vijay Mallya News: ‘भगोड़ा नहीं हूं, मेरा रिफंड कब मिलेगा’, विजय माल्या ने सरकार और बैंकों से मांगा हिसाब
सोशल मीडिया पर साझा किए कई पोस्ट, दावा—ब्रिटेन छोड़ने पर कानूनी रोक; बैंक वसूली के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली। ब्रिटेन में रह रहे कारोबारी विजय माल्या एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट साझा करते हुए खुद को ‘भगोड़ा’ और ‘धोखेबाज’ कहे जाने पर आपत्ति जताई है। माल्या ने दावा किया कि वह वर्ष 1992 से ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और वर्तमान में कानूनी पाबंदियों के कारण देश नहीं छोड़ सकते।
माल्या ने बैंकों द्वारा की गई कथित वसूली के आंकड़ों पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से पूरा हिसाब देने की मांग करते हुए पूछा कि यदि उनके ऊपर निर्धारित देनदारी से अधिक राशि वसूल की जा चुकी है तो अतिरिक्त रकम का रिफंड उन्हें कब मिलेगा। हालांकि, यह विजय माल्या का दावा है और संबंधित देनदारी तथा वसूली का मामला विभिन्न अदालतों में कानूनी प्रक्रिया के अधीन है।
‘जानबूझकर भारत आने से इनकार नहीं कर रहा’
विजय माल्या ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया जाता है, जो जानबूझकर भारत लौटने से बच रहा है। उन्होंने इस धारणा को गलत बताते हुए दावा किया कि ब्रिटेन में जारी कानूनी प्रक्रियाओं के कारण उनके वहां से बाहर जाने पर प्रतिबंध है।
माल्या के अनुसार, वह वर्ष 1992 से यूनाइटेड किंगडम के स्थायी निवासी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने उनके मामले में अनुचित व्यवहार किया है। माल्या की इस दलील का उल्लेख उन्होंने अदालत के समक्ष भी किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया था कि अंग्रेजी अदालतों के आदेश के कारण वह इंग्लैंड और वेल्स से बाहर नहीं जा सकते और अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज के लिए आवेदन करने या उसे रखने पर भी रोक है। में इस दावे का विवरण दिया गया है।
आधिकारिक रूप से घोषित हैं भगोड़ा आर्थिक अपराधी
माल्या की आपत्ति के बावजूद भारत में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है। अक्टूबर 2025 में केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत घोषित लोगों की सूची में विजय माल्या का नाम भी शामिल था।
इसलिए ‘भगोड़ा’ शब्द केवल मीडिया द्वारा इस्तेमाल किया गया संबोधन नहीं है, बल्कि उनके खिलाफ हुई कानूनी कार्रवाई से भी जुड़ा है। हालांकि, माल्या लगातार अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों और उन्हें प्रस्तुत किए जाने के तरीके पर सवाल उठाते रहे हैं।
भारत सरकार का कहना रहा है कि विदेशों में रह रहे वांछित आर्थिक अपराधियों को देश वापस लाकर अदालतों का सामना कराने के लिए प्रयास जारी हैं। माल्या के प्रत्यर्पण से जुड़ी प्रक्रिया ब्रिटेन में लंबे समय से लंबित है।
बैंकों पर कितना बकाया होने का आरोप?
विजय माल्या और बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस पर भारतीय बैंकों के हजारों करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुकाने का आरोप है। अलग-अलग रिपोर्टों में ब्याज सहित बकाया राशि करीब 9,000 से 9,900 करोड़ रुपये बताई जाती रही है। इसमें भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह की बड़ी हिस्सेदारी है।
किंगफिशर एयरलाइंस आर्थिक संकट के कारण वर्ष 2012 में बंद हो गई थी। इसके बाद बैंकों ने कर्ज की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की। माल्या मार्च 2016 में भारत से ब्रिटेन चले गए थे। भारतीय जांच एजेंसियों ने उन पर बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप लगाए, जिनका वह लगातार खंडन करते रहे हैं।
माल्या ने क्यों मांगा रिफंड?
विजय माल्या का दावा है कि ऋण वसूली न्यायाधिकरण ने किंगफिशर एयरलाइंस की देनदारी 6,203 करोड़ रुपये निर्धारित की थी। इसमें करीब 1,200 करोड़ रुपये का ब्याज शामिल था। दूसरी ओर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिसंबर 2024 में संसद को बताया था कि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जब्त की गई माल्या से संबंधित 14,131.60 करोड़ रुपये की संपत्ति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वापस की गई है।
इन्हीं आंकड़ों के आधार पर माल्या का तर्क है कि निर्धारित देनदारी की तुलना में दोगुनी से अधिक राशि वसूल की गई है। उन्होंने कहा कि यदि बैंक और प्रवर्तन निदेशालय अतिरिक्त वसूली का कानूनी आधार नहीं बताते हैं तो वह राहत और रिफंड के हकदार हैं। में भी उनके इस दावे का उल्लेख है।
यहां यह समझना जरूरी है कि जब्त या बैंकों को बहाल की गई संपत्ति का मूल्य और वास्तविक रूप से समायोजित कर्ज की राशि हमेशा समान नहीं होती। ब्याज, गारंटी, संयुक्त देनदारी, संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त वास्तविक रकम और कानूनी खर्चों के कारण अंतिम हिसाब अलग हो सकता है। यही विषय माल्या और बैंकों के बीच विवाद का मुख्य कारण है।
वसूली के आंकड़ों में अंतर का आरोप
माल्या ने पहले भी दावा किया था कि सरकार और बैंकों की ओर से बताए जा रहे वसूली के आंकड़ों में अंतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में लगभग 14,100 करोड़ रुपये की वसूली की जानकारी दी गई, जबकि बैंकों के आंकड़े इससे अलग हैं।
उन्होंने कथित अंतर की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की मांग भी की थी। माल्या का कहना है कि उन्हें अब तक संपूर्ण स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट उपलब्ध नहीं कराया गया है। हालांकि, बैंकों या सरकार ने उनकी रिफंड संबंधी मौजूदा मांग को स्वीकार करने की घोषणा नहीं की है।
किंगफिशर कर्मचारियों के भुगतान पर भी किया दावा
विजय माल्या ने अपने पोस्ट में किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व कर्मचारियों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय ने जब्त धनराशि में से करीब 350 करोड़ रुपये कर्मचारियों के भुगतान के लिए जारी किए हैं।
माल्या ने कहा कि वह कर्मचारियों का भुगतान नहीं कर सके थे, क्योंकि उनकी संपत्तियां और धनराशि जांच एजेंसी ने जब्त कर ली थीं। यह भी माल्या द्वारा प्रस्तुत पक्ष है। कर्मचारियों की देनदारी, जब्त संपत्तियों और भुगतान प्रक्रिया से संबंधित अंतिम स्थिति आधिकारिक दस्तावेजों और अदालती आदेशों पर निर्भर करेगी।
ब्रिटेन में जारी है कानूनी लड़ाई
विजय माल्या भारत प्रत्यर्पण और ब्रिटेन में दिवालियापन से जुड़ी कानूनी लड़ाइयों का सामना कर रहे हैं। अप्रैल 2025 में लंदन हाईकोर्ट ने दिवालियापन आदेश के खिलाफ उनकी अपील खारिज कर दी थी। यह मामला एक अरब पाउंड से अधिक की देनदारी से जुड़ा था। के मुताबिक, अदालत ने उनके खिलाफ लागू दिवालियापन आदेश को बरकरार रखा था।
फिलहाल माल्या ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक बार फिर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और वसूली का पूरा हिसाब मांगने की कोशिश की है। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार, प्रवर्तन निदेशालय और संबंधित बैंक उनके सवालों तथा रिफंड की मांग पर कोई औपचारिक जवाब देते हैं या नहीं।
