उत्तम शौच धर्म की आराधना, पुष्पदंत भगवान के मोक्ष कल्याणक पर हुआ विशेष अभिषेक
श्रीजी की शांतिधारा के बाद श्रद्धालुओं ने चढ़ाए निर्वाण लाडू, दिनभर भक्तिमय रहा चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर
बम्हौरी। पर्वराज पर्युषण के चौथे दिन शनिवार को सकल दिगम्बर जैन समाज ने उत्तम शौच धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की। श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में प्रातःकाल भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और विधि-विधान से पूजन किया गया। भगवान पुष्पदंत के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर विशेष अभिषेक कर निर्वाण लाडू अर्पित किए गए।
सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना प्रारंभ हो गया था। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान मंदिर परिसर भगवान जिनेन्द्र के जयकारों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। समाज के महिला-पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने धार्मिक क्रियाओं में उत्साहपूर्वक भाग लेकर पुण्यार्जन किया। पूरे दिन मंदिर परिसर में आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
भगवान पुष्पदंत का विशेष अभिषेक
मोक्ष कल्याणक के अवसर पर भगवान पुष्पदंत का विशेष अभिषेक किया गया। प्रथम अभिषेक का सौभाग्य शंकरलाल जैन और राजू जैन सपरिवार को प्राप्त हुआ। द्वितीय अभिषेक जिनेंद्र कुमार जैन और नितिन कुमार जैन ने किया।
इसके अतिरिक्त प्रकाशचंद जैन, सुनील जैन, बसंत कुमार जैन, नीरज जैन, विपुल जैन, दिनेश कुमार जैन और आकाश जैन ने भी अभिषेक संपन्न कर पुण्यार्जन किया। अभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान पुष्पदंत के गुणों का स्मरण करते हुए आत्मकल्याण और विश्व शांति की भावना व्यक्त की।
अभिषेक के पश्चात भगवान की शांतिधारा की गई। प्रथम शांतिधारा में बसंत कुमार जैन और सुभाष जैन परिवार सहभागी रहे। विशल्याबाई जैन और मुकेश जैन परिवार ने भी शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि के साथ सभी जीवों के कल्याण की कामना की।
निर्वाण लाडू अर्पित कर मनाया मोक्ष कल्याणक
पूजन के दौरान भगवान पुष्पदंत के मोक्ष कल्याणक से संबंधित धार्मिक विधियां संपन्न हुईं। श्रद्धालुओं ने निर्वाण कांड का पाठ कर भक्तिभाव से लाडू अर्पित किए। किरण जैन, सनत कुमार जैन, कल्पना जैन, सुभाष जैन सपरिवार और संगीतकार राजेश जैन को निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
निर्वाण लाडू अर्पित करने से पहले धार्मिक मंत्रों का उच्चारण किया गया और भगवान पुष्पदंत के जीवन एवं उनके मोक्षगमन का स्मरण किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के बताए अहिंसा, सत्य, संयम और त्याग के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
समाजजनों ने बताया कि मोक्ष कल्याणक आत्मा के समस्त कर्म बंधनों से मुक्त होकर सिद्ध अवस्था प्राप्त करने का प्रतीक है। यह अवसर धर्मावलंबियों को आत्मचिंतन, संयम और साधना के माध्यम से मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
लोभ के त्याग का संदेश देता है उत्तम शौच धर्म
धर्मावलंबियों ने बताया कि उत्तम शौच धर्म का अर्थ केवल बाहरी स्वच्छता नहीं, बल्कि मन और आत्मा की पवित्रता है। मनुष्य के भीतर मौजूद लोभ, लालच, संग्रह और परिग्रह की भावनाएं अशांति एवं दुख का कारण बनती हैं। इन विकारों का त्याग कर संतोष धारण करना ही उत्तम शौच धर्म की वास्तविक साधना है।
धन, संपत्ति और सांसारिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक आसक्ति व्यक्ति को आत्मकल्याण के मार्ग से दूर करती है। उत्तम शौच धर्म सीमित आवश्यकताओं, संतोष और पवित्र विचारों के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। मनुष्य को उपलब्ध साधनों में संतुष्ट रहते हुए जरूरतमंदों के प्रति सहयोग तथा करुणा की भावना रखनी चाहिए।
श्रद्धालुओं ने कहा कि जिस व्यक्ति का मन लोभ और ईर्ष्या से मुक्त होता है, उसके जीवन में शांति एवं संतोष का विकास होता है। पर्युषण पर्व आत्मा में छिपे क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों को पहचानकर उनसे मुक्त होने का अवसर प्रदान करता है।
रात्रि में होगी संगीतमय आरती
दोपहर में श्रद्धालुओं ने धर्मग्रंथों का अध्ययन किया और उत्तम शौच धर्म के महत्व पर विचार साझा किए। समाज के वरिष्ठजनों ने बच्चों और युवाओं को पर्युषण पर्व की धार्मिक परंपराओं तथा दशलक्षण धर्म के सिद्धांतों की जानकारी दी।
रात्रि में मंदिर परिसर में संगीतमय आरती और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें समाज के बच्चे, युवा और महिलाएं धार्मिक प्रस्तुतियां देंगे। आयोजन समिति ने समाज के सभी लोगों से कार्यक्रम में शामिल होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है।
सकल दिगम्बर जैन समाज ने अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और निर्वाण लाडू अर्पित कर उत्तम शौच धर्म के संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पर्युषण पर्व का चौथा दिन श्रद्धा, संयम और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
