Uttam Arjav Dharma: कपट छोड़कर सरलता का भाव लाने का नाम है आर्जव धर्म—आचार्य चैत्य सागरजी
ग्वालियर के चंपाबाग जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के तीसरे दिन हुई उत्तम आर्जव धर्म की पूजा, अभिषेक और वृहद शांतिधारा में उमड़े श्रद्धालु
ग्वालियर। आत्म साधना पावन वर्षायोग एवं सकल जैन समाज की ओर से पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन दाना ओली स्थित चंपाबाग जैन मंदिर में उत्तम आर्जव धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक आराधना की गई। आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चों ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। इस दौरान भगवान के अभिषेक, पंचामृत अभिषेक, वृहद शांतिधारा और दशलक्षण पूजन के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
छल-कपट से नष्ट होता है धर्म
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में आने वाला छल, कपट और मायाचारी का भाव उसके धर्म को नष्ट कर देता है। जहां सहजता, सरलता और मृदुता के भाव दिखाई देते हैं, वहीं सच्चे अर्थों में आर्जव धर्म होता है। मायाचारी के सहारे कोई भी व्यक्ति वास्तविक ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच सकता।
आचार्य श्री ने कहा कि यदि व्यक्ति के अंदर ऋजुता, सरलता और सहजता का अभाव है तो उसके आगे बढ़ने के रास्ते स्वतः बंद होने लगते हैं। आज छल-कपट मनुष्य की आत्मा को छलनी कर रहा है। उत्तम आर्जव धर्म कपट को छोड़कर जीवन में सरलता का भाव लाने की प्रेरणा देता है। इसे धारण करने से व्यक्ति छल-कपट और मायाचारी के बंधनों से मुक्त हो सकता है।
दूसरों को नीचा दिखाने से शुरू होता है पतन
आचार्य श्री ने कहा कि आगे बढ़ने की होड़ में मनुष्य एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास कर रहा है। यहीं से उसके पतन की शुरुआत होती है। मनुष्य जीवन तभी सार्थक हो सकता है, जब व्यक्ति अपने विचारों, वाणी और व्यवहार में सरलता लाए। मन में कुछ और, वचन में कुछ और तथा आचरण में कुछ और होना कुटिलता का प्रतीक है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान उत्तम आर्जव धर्म के सिद्धांत को केवल सुनें नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन और व्यवहार में भी उतारें। धर्मसभा के दौरान समिति अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, महामंत्री निर्मल पाटनी, प्रशांत गंगवाल, विनय कासलीवाल, पंकज छाबड़ा, संजय गोधा और विकास जैन सहित समाजजनों ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल समर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
दगा किसी का सगा नहीं होता—मुनिश्री अनुमान सागर
मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ने उत्तम आर्जव धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि व्यक्ति को कुटिलता छोड़कर निर्मल भावों के साथ प्रत्येक कार्य करना चाहिए। आर्जव धर्म का अर्थ ही सरलता और निष्कपटता है। संसार में जो व्यक्ति किसी दूसरे के साथ धोखा करता है, उसे स्वयं भी कभी न कभी धोखे का सामना करना पड़ता है। इसलिए कहा गया है कि दगा किसी का सगा नहीं होता।
मुनिश्री ने कहा कि उत्तम आर्जव धर्म हमें सिखाता है कि किसी भी व्यक्ति के साथ छल-कपट नहीं करना चाहिए। मन में जो भाव हो, वही वचन में व्यक्त होना चाहिए और उसी के अनुरूप हमारा आचरण होना चाहिए। छल-कपट करने वाला व्यक्ति न केवल अपने वर्तमान जीवन को बिगाड़ता है, बल्कि कर्मों का बंध कर अपने अगले भव को भी प्रभावित करता है।
कलशों से किया श्रीजी का अभिषेक
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व के तीसरे दिन आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं प्रतिष्ठाचार्य पंडित डॉ. आनंद प्रकाश शास्त्री के मार्गदर्शन में समाजजनों ने श्रीजी का कलशों से जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक किया। भगवान के जयकारों के बीच संपन्न हुए अभिषेक में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
इसके बाद आचार्य श्री ने रिद्धि मंत्रों का उच्चारण करते हुए वृहद शांतिधारा कराई। शांतिधारा करने का सौभाग्य कमलेश बिलाला परिवार को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष विश्व शांति, परिवार की सुख-समृद्धि और समस्त जीवों के कल्याण की मंगल भावना व्यक्त की। धार्मिक अनुष्ठान के बाद दीपकों से श्रीजी की आरती उतारी गई।
अष्ट द्रव्य से हुई दशलक्षण धर्म की पूजा
आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य पंडित डॉ. आनंद प्रकाश शास्त्री के निर्देशन में सोलहकारण पूजा, पंचमेरु पूजन और उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा की गई। महिला, पुरुष और युवाओं ने अष्ट द्रव्य से भगवान की पूजा-अर्चना करते हुए महाअर्घ्य समर्पित किया।
प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि शनिवार, 19 सितंबर को पर्युषण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की पूजा की जाएगी। इसके साथ ही नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा निर्वाण लड्डू समर्पित किया जाएगा।
