उमरिया में बच्चों की जान से खिलवाड़ पर शिक्षा विभाग की कार्रवाई, प्रभारी प्राचार्य पद से हटाए गए
तेज बारिश में बड़की नदी का जलस्तर बढ़ने के बावजूद करीब 40 बच्चे नदी पार कर पहुंच रहे थे स्कूल, वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने की कार्रवाई
रिपोर्ट: संभागीय ब्यूरो चीफ सुनील रैदास, दैनिक स्वराज वाणी
उमरिया। जिले के करकेली विकासखंड अंतर्गत मानिकपुर गांव से बिलासपुर हाई स्कूल जाने वाले करीब 40 स्कूली बच्चों की जान जोखिम में डालकर बड़की नदी पार करने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने और कई स्थानों पर पानी बच्चों की कमर तक पहुंचने के बावजूद विद्यार्थी नदी पार कर स्कूल आ-जा रहे थे। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने और मामला अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचने के बाद बिलासपुर हाई स्कूल के प्रभारी प्राचार्य अमित पटेल को प्रभारी प्राचार्य पद से हटा दिया गया है।
मामले ने स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और उन्हें किसी भी स्थिति में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कमर तक पानी में नदी पार करते दिखे स्कूली बच्चे
जानकारी के अनुसार मानिकपुर गांव के करीब 40 विद्यार्थी पढ़ाई के लिए बिलासपुर हाई स्कूल जाते हैं। बारिश के दिनों में बड़की नदी का जलस्तर बढ़ने के बावजूद बच्चे इसी नदी को पार कर स्कूल पहुंच रहे थे। बताया जा रहा है कि नदी में कई स्थानों पर पानी बच्चों की कमर तक पहुंच रहा था। ऐसे में जरा सी चूक या अचानक तेज बहाव किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।
बच्चों के नदी पार करने का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। वीडियो में बच्चों के जोखिम भरे तरीके से नदी पार करने की स्थिति सामने आने के बाद मामला शिक्षा विभाग तक पहुंचा। इसके बाद अधिकारियों ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए स्कूल प्रबंधन से जवाब-तलब करते हुए सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिला शिक्षा अधिकारी ने दिए थे सुरक्षित आवागमन के निर्देश

मामले की जानकारी मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह मरकाम ने स्कूल प्रबंधन को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। स्कूल प्रबंधन से कहा गया था कि विद्यार्थियों को नदी के खतरनाक रास्ते से आने-जाने से रोका जाए और उनके लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इसके बावजूद बताया गया कि बच्चों को दोबारा उसी नदी के रास्ते घर जाने दिया गया। विभाग ने इसे निर्देशों की अनदेखी और बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही माना। इसके बाद बिलासपुर हाई स्कूल के प्रभारी प्राचार्य अमित पटेल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें प्रभारी प्राचार्य पद से हटा दिया गया।
निर्देशों की अनदेखी पर प्रभारी प्राचार्य पर कार्रवाई
शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद स्पष्ट संदेश दिया गया है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से संबंधित मामलों में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। विभाग ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि बच्चों के आवागमन के लिए सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाए।
इसके साथ ही एक शिक्षक को विद्यार्थियों की निगरानी की जिम्मेदारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि बच्चे बारिश के दौरान नदी के रास्ते स्कूल न आएं और न ही छुट्टी के बाद इस जोखिम भरे मार्ग से घर लौटें।
विभाग की ओर से यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि स्कूल आने और वापस जाने के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा पर नजर रखी जाए। बारिश के समय नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बच्चों को नदी के आसपास जाने से रोकना भी स्कूल और अभिभावकों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
एक किलोमीटर का छोटा रास्ता बना बच्चों के लिए बड़ा खतरा
मानिकपुर से बिलासपुर जाने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता मौजूद है, लेकिन बताया जा रहा है कि यह करीब 10 किलोमीटर लंबा है और जंगल से होकर गुजरता है। इसके विपरीत बड़की नदी पार कर स्कूल पहुंचने वाला रास्ता लगभग एक किलोमीटर का है। दूरी कम होने के कारण विद्यार्थी इसी रास्ते को प्राथमिकता देते रहे हैं।
सामान्य दिनों में नदी का जलस्तर कम होने के कारण बच्चे इस मार्ग का उपयोग करते हैं, लेकिन बारिश के दौरान यही रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है। तेज बारिश के बाद नदी का पानी अचानक बढ़ सकता है और बहाव भी तेज हो सकता है। ऐसे में बच्चों का नदी पार करना गंभीर दुर्घटना की आशंका पैदा करता है।
यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तक पहुंच के साथ सुरक्षित सड़क और आवागमन की व्यवस्था की जरूरत को भी सामने लाती है। बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए या तो लंबा जंगली रास्ता तय करना पड़ता है या फिर कम दूरी के लिए नदी पार करने का जोखिम उठाना पड़ता है।
अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के साथ होगी बैठक
जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि मामले को लेकर स्कूल प्रबंधन और विद्यार्थियों के अभिभावकों के साथ बैठक की जाएगी। बैठक में बच्चों के सुरक्षित आवागमन को लेकर चर्चा कर ऐसी व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे किसी भी विद्यार्थी को नदी पार कर स्कूल न जाना पड़े।
बारिश के दौरान यदि मार्ग असुरक्षित रहता है तो अभिभावकों से बच्चों को जोखिम भरे रास्ते से स्कूल नहीं भेजने के लिए कहा जाएगा। सुरक्षित मार्ग उपलब्ध होने के बाद ही विद्यार्थियों को स्कूल भेजने की व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा।
स्कूल प्रबंधन को भी निर्देशित किया गया है कि वह विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को नदी के बढ़े हुए जलस्तर तथा तेज बहाव से जुड़े खतरों के बारे में जागरूक करे। बच्चों को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि कम दूरी के चक्कर में नदी पार करना उनकी जान के लिए खतरा बन सकता है।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: शिक्षा विभाग
शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को जान जोखिम में डालनी पड़े, ऐसी स्थिति को रोकना जरूरी है। विभाग ने नदी के रास्ते बच्चों की आवाजाही रोकने और सुरक्षित विकल्प सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद हुई कार्रवाई ने मामले को गंभीरता से लेने की दिशा में पहला कदम जरूर उठाया है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती बच्चों के लिए स्थायी और व्यावहारिक सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने की है।
स्थायी समाधान की ओर टिकी ग्रामीणों की नजर
मानिकपुर के बच्चों की समस्या केवल बारिश के कुछ दिनों तक सीमित नहीं है। लंबा वैकल्पिक रास्ता और नदी से होकर गुजरने वाला छोटा मार्ग उनके सामने वर्षों से आवागमन की चुनौती खड़ी कर सकता है। ऐसे में ग्रामीणों और अभिभावकों की नजर अब प्रशासन और शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर है।
फिलहाल विभाग ने प्रभारी प्राचार्य को पद से हटाने के साथ स्कूल प्रबंधन को बच्चों की निगरानी और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन, शिक्षा विभाग, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के समन्वय से ऐसी स्थायी व्यवस्था तैयार होगी, जिससे बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।
