3 डॉक्टर और 17 कर्मचारी, फिर भी अस्पताल में ताला; महतारी एक्सप्रेस में हुआ प्रसव
बलरामपुर जिले के रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर प्रसव पीड़ा से जूझती रही गर्भवती। सूचना के करीब एक घंटे बाद पहुंची महिला स्वास्थ्यकर्मी, तब जच्चा-बच्चा को अस्पताल में शिफ्ट किया गया।
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था का मामला सामने आया है। राजपुर विकासखंड के ग्राम रेवतपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने खड़ी महतारी एक्सप्रेस में एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती रही, जबकि अस्पताल के मुख्य गेट और कर्मचारियों के सरकारी आवासों पर ताले लगे थे। आखिरकार महिला का प्रसव एम्बुलेंस में ही कराना पड़ा। घटना दशहरे के दिन मंगलवार की है। राहगीरों द्वारा बनाया गया वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला चर्चा में आया।
अस्पताल के बाहर खड़ी थी महतारी एक्सप्रेस
मंगलवार को कुछ लोग अंबिकापुर की ओर से रेवतपुर होते हुए जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने सड़क पर खड़ी महतारी एक्सप्रेस (102) पर पड़ी। वाहन के भीतर गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से परेशान थी। परिजन उसे ढांढस बंधा रहे थे और अस्पताल खुलने का इंतजार कर रहे थे।
जब लोगों ने स्वास्थ्य केंद्र की ओर देखा तो मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था। अस्पताल परिसर में स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए बनाए गए सरकारी आवास भी बंद थे। आसपास कोई डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था। अस्पताल परिसर सुनसान पड़ा था, जबकि गर्भवती महिला को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी।
एम्बुलेंस में ही हुआ प्रसव
स्थानीय लोगों के अनुसार, गर्भवती महिला पास के गांव की रहने वाली थी। उसकी हालत ऐसी थी कि उसे किसी दूसरे अस्पताल या जिला अस्पताल ले जाना संभव नहीं था। परिजन काफी देर तक स्वास्थ्य केंद्र खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन उस समय कोई कर्मचारी वहां नहीं पहुंचा। आखिरकार महिला ने परिजनों की मौजूदगी में महतारी एक्सप्रेस में ही बच्चे को जन्म दिया।
प्रसव के बाद भी अस्पताल का ताला नहीं खुला। गांव के पंचायत प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और उन्होंने फोन से चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य कर्मचारियों को घटना की सूचना दी। खबर मिलने के करीब एक घंटे बाद अंबिकापुर से एक महिला स्वास्थ्यकर्मी रेवतपुर पहुंची। इसके बाद अस्पताल का ताला खोला गया और प्रसूता तथा नवजात को अंदर ले जाकर प्राथमिक उपचार दिया गया। खबर में मां और बच्चे की आगे की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
राहगीरों के वीडियो से सामने आई स्थिति
घटनास्थल से गुजर रहे राहगीरों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाया। वीडियो में महतारी एक्सप्रेस में प्रसव पीड़ा से जूझती महिला और बंद पड़े स्वास्थ्य केंद्र को देखा जा सकता है। अस्पताल कर्मचारियों के आवासों पर लगे ताले भी वीडियो में दिखाई दिए। वीडियो प्रसारित होने के बाद स्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारियों की अनुपस्थिति और आपात स्थिति में उपलब्ध सेवाओं को लेकर सवाल उठे।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उद्देश्य आसपास के गांवों के लोगों को बुनियादी चिकित्सा सुविधा देना है। गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव के समय स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना और समय पर उपचार मिलना विशेष रूप से जरूरी होता है। ऐसे में अस्पताल के बाहर एम्बुलेंस में प्रसव होना स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
तीन डॉक्टरों सहित 17 कर्मचारी पदस्थ
रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुख्य मार्ग के पास स्थित है। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां एक एमबीबीएस डॉक्टर सहित कुल तीन चिकित्सक और 17 कर्मचारी पदस्थ हैं। इतने चिकित्सकों और कर्मचारियों की नियुक्ति के बावजूद घटना के समय अस्पताल में किसी का मौजूद न होना चिंता का विषय बना है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र बंद मिलने और चिकित्सकों के अनुपस्थित रहने की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं। हालांकि इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है। वर्तमान घटना के बाद अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था और कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच की मांग उठ रही है।
प्रभारी चिकित्सक को नोटिस
राजपुर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक को नोटिस जारी किया गया है। उनसे जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद मामले के तथ्यों और गुण-दोष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल घटना के वीडियो और उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की जांच का इंतजार है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि अस्पताल बंद क्यों था, ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक और कर्मचारी कहां थे तथा आपात स्थिति में स्वास्थ्य केंद्र समय पर क्यों नहीं खुल पाया।||||
