Ujjain News: जगतगुरु स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती पहुंचे बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन, दिया धर्म, संस्कृति और राष्ट्रसेवा का संदेश
उज्जैन | 13 नवंबर 2025
धार्मिक नगरी उज्जैन (Ujjain) एक बार फिर आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो उठी जब अनंत विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती महाराज बाबा महाकालेश्वर के दरबार में दर्शन के लिए पहुंचे। उनकी एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। बाबा महाकाल की पावन नगरी में महाराज के आगमन पर पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
मंदिर परिसर में महाकाल मंदिर समिति की ओर से सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिया ने जगद्गुरु का पारंपरिक तरीके से स्वागत एवं सम्मान किया। स्वामी जी का स्वागत पुष्पमालाओं, दुपट्टों और नारियल अर्पण से किया गया। तत्पश्चात उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने पूज्य महाराज से आशीर्वचन प्राप्त किए।
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में जगद्गुरु का आगमन
उज्जैन सदियों से सनातन धर्म का केन्द्र और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत रहा है। इस पवित्र नगरी में जगद्गुरु स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती महाराज का आगमन अपने आप में एक दिव्य अवसर माना गया। वे द्वारका शारदा पीठ एवं ज्योतिष पीठाधीश्वर हैं और पूज्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिष्य हैं।
जयपुर से रतनगढ़ स्थित शाकंभरी माता मंदिर के आधारशिला समारोह में भाग लेने के बाद महाराज सीधे उज्जैन पहुंचे। यहां बाबा महाकाल के दर्शन के बाद उन्होंने भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, धर्म रक्षा और राष्ट्र निर्माण पर महत्वपूर्ण संदेश दिए।
धर्म, संस्कार और राष्ट्रसेवा का संदेश
पूज्य शंकराचार्य स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा —
“धर्म केवल पूजा-पाठ का विषय नहीं, बल्कि जीवन की रीढ़ है। राष्ट्र तभी सशक्त होगा जब उसके नागरिक धर्म, संस्कार और सेवा के मार्ग पर चलेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत की आत्मा धर्म में बसती है। यहाँ जन्म से लेकर मृत्यु तक हर कर्म धर्म से जुड़ा होता है। इसलिए भारत की पहचान धर्म से है, और धर्म की रक्षा ही राष्ट्र की रक्षा है।
महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि समाज में संस्कारों की स्थापना ही वास्तविक राष्ट्रसेवा है। उन्होंने सभी को संदेश दिया कि धर्म, संस्कृति और मानवता के पथ पर चलना ही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उज्जैन में भव्य स्वागत और श्रद्धालुओं की आस्था
जगद्गुरु स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती महाराज के उज्जैन पहुंचने पर महाकाल मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने महाराज का पुष्पवर्षा से स्वागत किया। मंदिर समिति के सदस्यों, पुजारियों और स्थानीय धर्माचार्यों ने भी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
उज्जैन के संत-समाज ने इसे एक ऐतिहासिक पल बताया। शहर के अनेक धार्मिक संगठनों ने महाराज के स्वागत में विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार पर तीखी प्रतिक्रिया
बाबा महाकाल की नगरी में आशीर्वचन के दौरान स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने हाल ही में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा —
“बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह केवल हिंदू धर्म के प्रति नहीं बल्कि समूची मानवता के खिलाफ अपराध है। उपासना के स्थल तोड़े जा रहे हैं, माता-बहनों का अपमान किया जा रहा है। यह न केवल धर्म बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाएँ हैं।”
उन्होंने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा कि —
“मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार से आग्रह करता हूं कि बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। जो हिंदू भाई भारत आना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षित रूप से यहां लाया जाए। महिलाओं के सम्मान की रक्षा की जाए और उपासना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।”
“भारत धर्म की धड़कन है” – स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती
महाराज ने कहा कि भारत की पहचान धर्म से है, और यही उसकी सबसे बड़ी शक्ति भी है। उन्होंने कहा —
“भारतवर्ष वह भूमि है जहाँ धर्म की धड़कन धड़कती है। यहाँ राजनीति धर्म से दिशा प्राप्त करे तो राष्ट्र और विश्व में शांति स्वतः स्थापित हो जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं, उन्हें बाहर किया जाना चाहिए, क्योंकि भारत को अपने संसाधन और संस्कृति की रक्षा करनी होगी।
स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि धर्म के अधीन राजनीति ही राष्ट्र को सच्चे अर्थों में समृद्ध बना सकती है। जब राजनीति धर्म से प्रेरणा लेगी, तब ही भारत विश्वगुरु के रूप में पुनः प्रतिष्ठित होगा।
उज्जैन बना आध्यात्मिक संदेश का केंद्र
महाराज के आगमन से उज्जैन का धार्मिक महत्व एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। बाबा महाकाल के दरबार से उन्होंने जो संदेश दिया, वह पूरे देश में धर्म और राष्ट्रसेवा की भावना को सशक्त करने वाला है।
धार्मिक नगरी उज्जैन में जहां रोज़ाना लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं, वहीं जगद्गुरु के आगमन ने इस आस्था की भूमि को और भी गौरवान्वित कर दिया।
धर्म, संस्कृति और राष्ट्र कल्याण का संकल्प
पूज्य महाराज ने अपने प्रवचन के अंत में कहा —
“भारत का उत्थान धर्म के उत्थान से ही संभव है। जब हर व्यक्ति अपने आचरण में धर्म और संस्कृति को स्थान देगा, तभी सच्चे अर्थों में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का भाव साकार होगा।”
उन्होंने सभी उपस्थित भक्तों को आशीर्वाद देते हुए धर्म, संस्कृति और राष्ट्र कल्याण के प्रति समर्पण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
निष्कर्ष
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती महाराज का आगमन केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और राष्ट्रभक्ति का संदेश लेकर आया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म ही भारत की आत्मा है, और राष्ट्र का उत्थान तभी संभव है जब हम धर्म, संस्कार और सेवा के मार्ग पर चलें।
