कुंडाली में 14 स्थानों से एक साथ निकला चल समारोह, बम्होरी में रातभर गूंजे ढोल-नगाड़े
बम्होरी/कुंडाली। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां भगवती की आराधना में लीन रहे ग्राम कुंडाली और बम्होरी में माता रानी की विदाई श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई। दशहरा पर्व से शुरू हुआ विसर्जन का सिलसिला ग्यारस तिथि तक जारी रहा। दोनों स्थानों पर माता की प्रतिमाओं के चल समारोह निकाले गए, जिनमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों, भजनों और माता के जयकारों से गांव और कस्बे का माहौल भक्तिमय बना रहा।
14 पंडालों से एक साथ निकला चल समारोह
ग्राम कुंडाली में इस वर्ष 14 स्थानों पर माता रानी के पंडाल सजाए गए थे। नौ दिनों तक पूरे गांव में पूजा-अर्चना, आरती, भजन और अन्य धार्मिक आयोजन होते रहे। ग्यारस तिथि पर सभी समितियों ने माता की प्रतिमाओं को एक साथ विदाई देने का निर्णय लिया। इसके बाद 14 स्थानों से प्रतिमाएं एक भव्य जुलूस के रूप में निकाली गईं।
चल समारोह में ग्रामीणों का पारंपरिक परिवेश आकर्षण का केंद्र रहा। पुरुष धोती-कुर्ता पहनकर और सिर पर पगड़ी बांधकर जुलूस में शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन के साथ निकले चल समारोह में मुख्य अखाड़ा भी शामिल रहा। अखाड़े के प्रदर्शन और धार्मिक जयकारों के बीच श्रद्धालु माता रानी की प्रतिमाओं के साथ आगे बढ़ते रहे।
पंडा परंपरा और घोड़े बने आकर्षण
कुंडाली के जुलूस में पंडा परंपरा भी देखने को मिली। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जिन पंडों में माता का अंश आता है, वे कील वाली चप्पल और खड़ाऊ पहनकर चलते नजर आए। घोड़े भी जुलूस का हिस्सा रहे। इस परंपरा और आयोजन को देखने के लिए ग्रामीण मार्गों के किनारे एकत्र हुए।
ग्राम की माताएं और बहनें भक्ति में झूमते हुए माता रानी को विदाई देती नजर आईं। श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और मां भगवती से परिवार तथा क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। जुलूस के दौरान माता के जयकारे गूंजते रहे। नौ दिनों तक आराधना के बाद विदाई के समय भक्तों में श्रद्धा के साथ भावुकता भी दिखाई दी।

बम्होरी में देर रात तक चला विसर्जन

बम्होरी में भी माता रानी की विदाई का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। विभिन्न समितियों के सदस्य माता की प्रतिमाओं को लेकर ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर नाचते-गाते विसर्जन के लिए रवाना हुए। पूरे कस्बे में रातभर भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। श्रद्धालु जुलूस देखने और माता के दर्शन करने के लिए मार्गों पर मौजूद रहे।
बम्होरी में अधिकांश प्रतिमाओं का विसर्जन निमानपुर घाट और पड़रिया घाट पर किया गया। श्रद्धालुओं ने परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना कर माता को विदाई दी। विसर्जन के दौरान मां भगवती से क्षेत्र में सुख-समृद्धि और शांति बनाए रखने की कामना की गई।
‘अगले बरस जल्दी आ’ के जयकारों के साथ दी विदाई
माता की विदाई के दौरान ‘मां, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने मां भगवती से अगले वर्ष फिर दर्शन देने की प्रार्थना की। नवरात्रि के नौ दिनों तक चले धार्मिक आयोजनों का समापन भावपूर्ण विसर्जन के साथ हुआ।
कुंडाली में 14 स्थानों से निकली प्रतिमाओं का एक साथ चल समारोह और बम्होरी में देर रात तक चला विसर्जन श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक बना। पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्ति में शामिल श्रद्धालुओं ने माता रानी की विदाई को यादगार बनाया। दोनों गांवों में लोगों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर आयोजन में भाग लिया और भक्तिभाव से माता को विदा किया।
