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	<title>इंदौर जैन समाज &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>इंदौर जैन समाज &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>उत्तम त्याग धर्म: जो हेय है उसका त्याग और उपकारी वस्तु का दान करो—मुनिश्री सुधासागर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Sep 2026 05:40:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उत्तम त्याग धर्म: जो हेय है उसका त्याग और उपकारी वस्तु का दान करो—मुनिश्री सुधासागर पर्युषण पर्व के आठवें दिन विद्या सुधा देशना मंडप में उमड़ा जनसैलाब, मुनिश्री ने श्रावकों ... <a title="उत्तम त्याग धर्म: जो हेय है उसका त्याग और उपकारी वस्तु का दान करो—मुनिश्री सुधासागर" class="read-more" href="https://swarajvani.com/uttam-tyag-dharma-muni-sudhasagar-ji-indore-paryushan-2026/" aria-label="Read more about उत्तम त्याग धर्म: जो हेय है उसका त्याग और उपकारी वस्तु का दान करो—मुनिश्री सुधासागर">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" dir="auto" data-section-id="11u9ux1" data-start="0" data-end="85">उत्तम त्याग धर्म: जो हेय है उसका त्याग और उपकारी वस्तु का दान करो—मुनिश्री सुधासागर</h1>
<p dir="auto" data-start="87" data-end="201"><strong data-start="87" data-end="201">पर्युषण पर्व के आठवें दिन विद्या सुधा देशना मंडप में उमड़ा जनसैलाब, मुनिश्री ने श्रावकों को प्रदान किया गंधोदक</strong></p>
<p dir="auto" data-start="203" data-end="253"><strong data-start="203" data-end="224">दैनिक स्वराज वाणी</strong><br data-start="224" data-end="227" /><strong data-start="227" data-end="253">राजेश जैन दद्दू, इंदौर</strong></p>
<p dir="auto" data-start="255" data-end="605"><strong data-start="255" data-end="265">इंदौर।</strong> दशलक्षण पर्वराज पर्युषण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म के अवसर पर विद्या सुधा देशना मंडप में आयोजित धर्मसभा को परम पूज्य तीर्थ चक्रवर्ती मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज ने संबोधित किया। उन्होंने त्याग धर्म का मर्म समझाते हुए कहा कि वस्तुओं को छोड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रति मोह, ममता और आसक्ति का त्याग करना आवश्यक है।</p>
<p dir="auto" data-start="607" data-end="907">धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि श्रावक संस्कार शिविर के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मुनिश्री ने कहा कि संयोग संबंध को छोड़ने के लिए इच्छाओं का त्याग आवश्यक है, जबकि अंतरंग संबंध को तोड़ने के लिए तप, साधना, भेद-विज्ञान और पूर्ण त्याग की आवश्यकता होती है।</p>
<p dir="auto" data-start="909" data-end="1082">उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सोना भट्टी में तपकर शुद्ध होता है, उसी प्रकार तपस्या से कर्मों की निर्जरा होती है। तप के बाद भी त्याग आवश्यक है, क्योंकि तप से अधिक कठिन त्याग है।</p>
<p dir="auto" data-start="1084" data-end="1377">मुनिश्री ने गृहस्थों को प्रेरणा देते हुए कहा कि जो वस्तु उपकारी हो, उसका पहले दान करें और उसके बाद स्वयं उपयोग करें। साधु-संतों ने जिन उपकारी वस्तुओं का त्याग किया है, उनके लिए आहार और औषधि आदि का दान करना चाहिए। जरूरतमंद, गरीब और असहाय लोगों की सहायता करना ही सच्चे दान और त्याग का स्वरूप है।</p>
<p dir="auto" data-start="1379" data-end="1521">उन्होंने संदेश दिया, “जो हेय है उसका त्याग करो, जो उपकारी है उसका दान करो और दान के बाद ही उसका भोग करो—यही जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है।”</p>
<p dir="auto" data-start="1523" data-end="1688">धर्मसभा में मुनिश्री ने अपने कर कमलों से श्रावकों को गंधोदक प्रदान कर आशीर्वाद दिया। चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा ने मुनिश्री को गंधोदक देकर श्रद्धा और विनय प्रकट की।</p>
<p dir="auto" data-start="1690" data-end="1972">इस अवसर पर सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, मनीष गोधा, सपना गोधा, आलोक, आकाश कोल, अशोक डोशी, हर्ष जैन, संजय पाटोदी, हुकुमचंद जैन, डॉ. जैनेन्द्र जैन, कमल जैन चैलेंजर, ब्रह्मचारी प्रदीप, पारस भैया, विजय धुर्रा, राहुल सेठी और भूपेंद्र भोपाली सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।</p>
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		<item>
		<title>इंदौर सुगंध दशमी 2026: 140 जिनालयों में भव्य मंडल विधान और आकर्षक झांकियां, 21 सितंबर को महापर्व</title>
		<link>https://swarajvani.com/indore-sugandh-dashami-2026/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2026 12:22:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Indore News]]></category>
		<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[इंदौर सुगंध दशमी 2026 का महापर्व 21 सितंबर को उत्तम संयम धर्म के अवसर पर मनाया जाएगा। शहर के 140 जिनालयों में मंडल विधान, धार्मिक झांकियां और आकर्षक विद्युत सज्जा ... <a title="इंदौर सुगंध दशमी 2026: 140 जिनालयों में भव्य मंडल विधान और आकर्षक झांकियां, 21 सितंबर को महापर्व" class="read-more" href="https://swarajvani.com/indore-sugandh-dashami-2026/" aria-label="Read more about इंदौर सुगंध दशमी 2026: 140 जिनालयों में भव्य मंडल विधान और आकर्षक झांकियां, 21 सितंबर को महापर्व">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इंदौर सुगंध दशमी 2026 का महापर्व 21 सितंबर को उत्तम संयम धर्म के अवसर पर मनाया जाएगा। शहर के 140 जिनालयों में मंडल विधान, धार्मिक झांकियां और आकर्षक विद्युत सज्जा होगी।</p>
<h1>इंदौर में सुगंध दशमी 21 सितंबर को, 140 जिनालयों में सजेंगे मंडल विधान और आकर्षक झांकियां</h1>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंदौर सुगंध दशमी 2026</strong> का महापर्व दिगम्बर जैन समाज के पर्युषण पर्व के अंतर्गत 21 सितंबर को उत्तम संयम धर्म के अवसर पर हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। सुगंध दशमी को धूप दशमी के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर नगर के जिनालयों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">धर्म समाज प्रचारक <strong>राजेश जैन दद्दू</strong> ने कहा कि नगर के समस्त <strong>140 जिनालयों</strong> में जैन संस्कृति एवं धर्म पर आधारित मंडल विधान और आकर्षक झांकियों की रचना की जाएगी। इनके माध्यम से दस लक्षण धर्म की महत्ता प्रतिपादित की जाएगी।</p>
<h2>140 जिनालयों में होगी आकर्षक विद्युत सज्जा</h2>
<p class="isSelectedEnd"><strong>सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा</strong> और <strong>महामंत्री हर्ष जैन</strong> ने कहा कि नगर के सभी जिनालयों में आकर्षक विद्युत सज्जा होगी। साथ ही इस अवसर पर जिनालयों की बहुमूल्य वस्तुओं और कृतियों को प्रदर्शित कर समाजजनों के दर्शनार्थ रखा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">कई जिनालयों में विशेष झांकियों के माध्यम से समाज के युवा मंडलों द्वारा प्रमुख जैन तीर्थों की रचना के साथ धर्म और संस्कृति का प्रदर्शन भी किया जाएगा। इन धार्मिक झांकियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जैन संस्कृति, परंपरा और दस लक्षण धर्म के महत्व से परिचित कराया जाएगा।</p>
<h2>सुगंध दशमी पर परिवारों के साथ जिनालयों के दर्शन करेंगे श्रद्धालु</h2>
<p class="isSelectedEnd"><strong>राजेश जैन दद्दू</strong> ने बताया कि <strong>इंदौर सुगंध दशमी 2026</strong> के अवसर पर जैन धर्मावलंबी विशेष वेशभूषा में अपने परिजनों के साथ अधिक से अधिक जिनालयों के दर्शन के लिए परंपरागत रूप से निकलेंगे।</p>
<p>सुगंध दशमी को लेकर जिनालयों में तैयारियां की गई हैं। आकर्षक मंडल विधान, धार्मिक झांकियां, बहुमूल्य धार्मिक कृतियों का प्रदर्शन और विद्युत सज्जा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगी। 21 सितंबर को उत्तम संयम धर्म के साथ मनाए जाने वाले इस महापर्व को लेकर दिगम्बर जैन समाज में उत्साह है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>इंदौर : वसीयत से किस्मत नहीं लिखी जाती, उड़ान बताएगी आसमान किसका है: मुनिश्री सुधासागर जी</title>
		<link>https://swarajvani.com/muni-sudhasagar-ji-pravachan-dalal-bagh-indore/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Sep 2026 05:59:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर:पिता, भगवान और गुरु से कृपा नहीं, जीवन में आगे बढ़ने की कला सीखें राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट इंदौर। दलाल बाग परिसर में मंगलवार को आयोजित धर्मसभा में जगतगुरु ... <a title="इंदौर : वसीयत से किस्मत नहीं लिखी जाती, उड़ान बताएगी आसमान किसका है: मुनिश्री सुधासागर जी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/muni-sudhasagar-ji-pravachan-dalal-bagh-indore/" aria-label="Read more about इंदौर : वसीयत से किस्मत नहीं लिखी जाती, उड़ान बताएगी आसमान किसका है: मुनिश्री सुधासागर जी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इंदौर:पिता, भगवान और गुरु से कृपा नहीं, जीवन में आगे बढ़ने की कला सीखें</p>
<p>राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट</p>
<p>इंदौर। दलाल बाग परिसर में मंगलवार को आयोजित धर्मसभा में जगतगुरु महाश्रमण निर्यापक मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने पुरुषार्थ, गुरु-शिष्य संबंध और पारिवारिक संस्कारों पर मंगल देशना दी। उन्होंने कहा कि वसीयत के सहारे किसी व्यक्ति की किस्मत नहीं लिखी जाती। उसकी मेहनत और उड़ान ही तय करती है कि आसमान पर अधिकार किसका होगा।</p>
<p>धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनिश्री ने कहा कि जिन धार्मिक कार्यों के लिए जैन बनना आवश्यक है, उन्हें इसी भव में पूरा करने का प्रयास करना चाहिए। अजैन होने पर श्रावक संस्कार शिविर जैसे दुर्लभ अवसर प्राप्त नहीं हो पाते और इसकी कमी जीव को हमेशा खलती रहती है।</p>
<p>रत्नत्रय धारण करने के लिए बनते हैं मुनि</p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि पंचम काल में कोई अरिहंत नहीं बनता, फिर भी साधु रत्नत्रय धारण करने के लिए मुनि बनते हैं। मनुष्य पर्याय में दिगंबरत्व प्राप्त करने और अगले भव में विदेह क्षेत्र में भी मुनि बनने की पात्रता विकसित करने के लिए पुरुषार्थ करना आवश्यक है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गुरुदेव के पास अनेक लोग मुनि बनने के लिए आते थे, लेकिन योग्यता का अभाव होने पर उन्हें स्पष्ट रूप से मना कर दिया जाता था। यही अयोग्यता व्यक्ति को अगले भव में मुनि बनने के लिए पुरुषार्थ करने की प्रेरणा देती रहती है।</p>
<p>गिरकर स्वयं उठना सिखाता है सच्चा गुरु</p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि गुरु का व्यवहार कभी-कभी शत्रु जैसा दिखाई देता है। गुरु शिष्य के गिरने पर उसे तुरंत उठाता नहीं है, बल्कि ऐसी कला सिखाता है कि वह गिरने के बाद स्वयं उठ सके। वही सच्चा गुरु है।</p>
<p>उन्होंने राजा चंद्रगुप्त और आचार्य चाणक्य का उदाहरण देते हुए कहा कि चाणक्य ने चंद्रगुप्त को शासन और संघर्ष का पूरा हुनर सिखाया, लेकिन विपत्ति के समय हर बार उसका प्रत्यक्ष सहयोग नहीं किया। उनका उद्देश्य चंद्रगुप्त को प्रत्येक परिस्थिति का सामना करने योग्य बनाना था।</p>
<p>गुरु कृपा से नहीं, योग्यता से बनें सफल</p>
<p>मुनिश्री ने शिक्षा व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि 99 अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को एक अतिरिक्त अंक नहीं दिया जाता, जबकि 23 अंक वाले विद्यार्थी को कभी-कभी दस ग्रेस अंक देकर पास कर दिया जाता है। गुरु कृपा के दस अंक लेकर व्यक्ति पास तो हो सकता है, लेकिन जीवन में उसकी योग्यता ही निर्धारित करेगी कि वह किस पद तक पहुंचेगा।</p>
<p>उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि शांतिधारा और कलश जैसी धार्मिक क्रियाएं मुफ्त में प्राप्त करने की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। स्वयं को समर्थ बनाकर बोली के माध्यम से इन्हें प्राप्त करने का पुरुषार्थ करें। यदि इस बार अवसर न मिले तो अगली बार 100 अंक प्राप्त करने जैसी योग्यता विकसित करें।</p>
<p>संपत्ति देने वाला या योग्य बनाने वाला—कौन-सा पिता श्रेष्ठ?</p>
<p>मुनिश्री ने धर्मसभा में प्रश्न किया कि कौन-सा पिता श्रेष्ठ है—वह, जो इतनी संपत्ति छोड़ जाए कि संतान को जीवनभर कमाने की आवश्यकता न पड़े या वह, जो अपनी संतान को योग्य बनाकर धन और सम्मान अर्जित करने की कला सिखाए?</p>
<p>उन्होंने कहा, “पिता की संपत्ति और वसीयत पर नजर रखने वालों, वसीयत से जिंदगी की किस्मत नहीं लिखी जाती। आपकी उड़ान ही बताएगी कि आसमान किसका है।”</p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि पिता, भगवान और गुरु से केवल कृपा की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। पिता से पैसा और सम्मान कमाने की कला तथा गुरु से साधना, तपस्या और संकटों का सामना करने की कला सीखनी चाहिए।</p>
<p>प्रवचन के पांच प्रमुख सूत्र</p>
<ol>
<li>वसीयत से किस्मत नहीं लिखी जाती, उड़ान बताएगी कि आसमान किसका है।</li>
<li>पिता, भगवान और गुरु से कृपा नहीं, जीवन जीने की कला सीखें।</li>
<li>गुरु का व्यवहार शत्रु जैसा दिखाई दे सकता है, लेकिन वही गिरकर उठना सिखाता है।</li>
<li>विचार करें कि कौन-से धार्मिक कार्य श्रावक संस्कार शिविर में बैठे और जैन बने बिना संभव नहीं हैं।</li>
<li>ऐसा संस्कारी परिवार बनाएं, जिसमें आने वाली पीढ़ियों में भी साधु-संतों का आहार और धर्म प्रभावना जारी रहे।</li>
</ol>
<p style="text-align: left;">धर्मसभा में समाजश्रेष्ठी आकाश आलोक कोल, आनंद नवीन गोधा, हर्ष जैन, हुक्मकाका, शैलेष जैन, विजय धुर्रा, कमल जैन चैलेंजर, अरविंद और अखिलेश सोधिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दस लक्षण पर्व से पहले इंदौर के जिनालयों में विशेष तैयारी, प्रतिमाओं का हुआ मंजन</title>
		<link>https://swarajvani.com/das-lakshan-parv-2026-indore-jain-temple/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Sep 2026 13:05:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दस लक्षण पर्व 2026 से पहले इंदौर के दिगंबर जैन मंदिरों में प्रतिमाओं का विशेष विधि से मंजन किया गया। पर्वराज दस लक्षण 16 सितंबर से प्रारंभ होगा। दस लक्षण ... <a title="दस लक्षण पर्व से पहले इंदौर के जिनालयों में विशेष तैयारी, प्रतिमाओं का हुआ मंजन" class="read-more" href="https://swarajvani.com/das-lakshan-parv-2026-indore-jain-temple/" aria-label="Read more about दस लक्षण पर्व से पहले इंदौर के जिनालयों में विशेष तैयारी, प्रतिमाओं का हुआ मंजन">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दस लक्षण पर्व 2026 से पहले इंदौर के दिगंबर जैन मंदिरों में प्रतिमाओं का विशेष विधि से मंजन किया गया। पर्वराज दस लक्षण 16 सितंबर से प्रारंभ होगा।</p>
<p>दस लक्षण पर्व 2026 से पहले इंदौर के जैन मंदिरों में प्रतिमाओं का मंजन, 16 सितंबर से शुरू होगा पर्वराज</p>
<p>श्री महावीर जिनालय संगम नगर में विशेष विधि से हुई प्रतिमाओं की सफाई, समाजजनों ने लिया सेवा का लाभ</p>
<p>इंदौर। दस लक्षण पर्व 2026 के शुभारंभ से पहले इंदौर के दिगंबर जैन मंदिरों में प्रतिमाओं के मंजन यानी विशेष प्रकार की सफाई का कार्य पूरा किया गया। दिगंबर जैन समाज का पर्वराज दस लक्षण 16 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है। इससे पूर्व प्रतिवर्ष मंदिरों की साफ-सफाई के साथ पाषाण और अष्टधातु की प्रतिमाओं का मंजन किया जाता है।</p>
<p>दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद इंदौर के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल एवं प्रचार प्रमुख सतीश जैन (इला बैंक) ने बताया कि शहरभर के दिगंबर जैन मंदिरों में दस लक्षण पर्व से पूर्व यह धार्मिक प्रक्रिया की जाती है।</p>
<p>विशेष विधि से किया जाता है प्रतिमाओं का मंजन</p>
<p>अष्टधातु की प्रतिमाओं का मंजन लौंग के पाउडर में थोड़ा जल डालकर किया जाता है। इसके बाद साफ सूती हथकरघा कपड़े से प्रतिमाओं को साफ किया जाता है। पाषाण प्रतिमाओं के लिए रीठे को धोकर शुद्ध जल में उबाला जाता है और फिर सूती कपड़े की पोटली से प्रतिमाओं की सफाई की जाती है।</p>
<p>मंजन से पहले प्रतिमाओं को बड़ी थालियों में विराजमान किया जाता है। मंजन के बाद शुद्ध जल से प्रतिमाओं को साफ किया जाता है। कुछ प्रतिमाओं को सूखने के बाद गोले (खोपरा) से रगड़ा जाता है। इसके पश्चात वेदी में कपूर का चूरा डाला जाता है, ताकि कोई जीव आदि न आए। प्रतिमाओं के पीछे रखे यंत्र को नींबू तथा छत्र और भामंडल को पानी से साफ किया जाता है।</p>
<p>श्री महावीर जिनालय में इन्हें मिला सेवा का सौभाग्य</p>
<p>श्री महावीर जिनालय, संगम नगर में प्रतिमाओं के मंजन का सौभाग्य मनोज जैन, सुबोध कासलीवाल, पारस जैन, सतीश जैन (इला बैंक), पीयूष चौधरी, कमलेश सिंघई, अभिषेक जैन, दिलीप जैन, सतीश जैन (ठेकेदार), अतिशय जैन, अभिषेक जैन, वर्धमान जैन और पीयूष जैन सहित समाजजनों को प्राप्त हुआ।</p>
<p style="padding-left: 40px;">सतीश जैन (इला बैंक)<br />
प्रचार प्रमुख, दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, इंदौर</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुनिपुंगव सुधासागर जी इंदौर धर्मसभा में बोले- भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं, बल्कि अनादि-अनंत शाश्वत जैन धर्म के महान प्रचारक थे।</title>
		<link>https://swarajvani.com/munipungav-sudhasagar-ji-indore/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Sep 2026 06:55:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर के दलाल बाग देशना मंडप में मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने भगवान महावीर, जैन धर्म, मंदिर दर्शन और श्री सम्मेद शिखरजी की तीर्थयात्रा के वास्तविक आध्यात्मिक उद्देश्य ... <a title="मुनिपुंगव सुधासागर जी इंदौर धर्मसभा में बोले- भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं, बल्कि अनादि-अनंत शाश्वत जैन धर्म के महान प्रचारक थे।" class="read-more" href="https://swarajvani.com/munipungav-sudhasagar-ji-indore/" aria-label="Read more about मुनिपुंगव सुधासागर जी इंदौर धर्मसभा में बोले- भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं, बल्कि अनादि-अनंत शाश्वत जैन धर्म के महान प्रचारक थे।">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इंदौर के दलाल बाग देशना मंडप में मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने भगवान महावीर, जैन धर्म, मंदिर दर्शन और श्री सम्मेद शिखरजी की तीर्थयात्रा के वास्तविक आध्यात्मिक उद्देश्य पर महत्वपूर्ण संदेश दिया।</p>
<h1>भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं, शाश्वत धर्म के महान प्रचारक थे – मुनिपुंगव सुधासागर जी</h1>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंदौर, 13 सितंबर। रिपोर्ट: राजेश जैन दद्दू।</strong><br />
<strong>मुनिपुंगव सुधासागर जी इंदौर</strong> में आयोजित रविवारीय धर्मसभा में जैन धर्म, भगवान महावीर स्वामी, मंदिर दर्शन और तीर्थयात्रा के वास्तविक आध्यात्मिक उद्देश्य पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। दलाल बाग स्थित देशना मंडप में मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी जैन धर्म के संस्थापक नहीं हैं। जैन धर्म अनादि-अनंत और शाश्वत है। भगवान महावीर ने इस धर्म को धारण किया, जिया और जगत को इसका सद् मार्ग दिखाया, इसलिए वे इस धर्म के महान प्रचारक हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">धर्म समाज प्रचारक <strong>राजेश जैन दद्दू</strong> ने बताया कि मुनिश्री रविवारीय धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।</p>
<h2>मुनिपुंगव सुधासागर जी इंदौर: भगवान महावीर के संदेश को जीवन में उतारने की जरूरत</h2>
<p class="isSelectedEnd">गुरुदेव ने कहा कि हम भगवान महावीर की महिमा तो गाते हैं, लेकिन आवश्यकता उनके संदेश को जीवन में आत्मसात करने की है। मंदिर जाना औपचारिकता नहीं होना चाहिए। मंदिर से लौटते समय पुनः दर्शन का संकल्प लेकर आना चाहिए। आज स्थिति यह है कि मंदिर आते समय समय तय होता है और लौटने की जल्दी रहती है। इस मानसिकता को बदलना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने श्रद्धालुओं को मंदिर दर्शन को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और जीवन परिवर्तन के माध्यम के रूप में अपनाने का संदेश दिया।</p>
<h2>श्री सम्मेद शिखरजी की यात्रा को पर्यटन न समझें</h2>
<p class="isSelectedEnd">श्री सम्मेद शिखरजी का उदाहरण देते हुए मुनिश्री ने कहा कि तीर्थयात्रा को पर्यटन न समझें। तीर्थ आत्मा को मोक्ष दिशा देने वाला स्थान है। यदि मन में पहले से ही लौटने का भाव है, तो यात्रा का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुनिपुंगव सुधासागर जी ने कहा कि तीर्थयात्रा का वास्तविक उद्देश्य आत्मा के कल्याण और आध्यात्मिक चिंतन की ओर बढ़ना होना चाहिए।</p>
<h2>जैन होना केवल जन्म की पहचान नहीं</h2>
<p class="isSelectedEnd">मुनिश्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को चिंतन करना चाहिए कि उसका वास्तविक घर और वास्तविक पिता कौन है। सांसारिक माता-पिता पूज्य हैं, लेकिन आत्मा के लक्ष्य की दृष्टि से जिनेंद्र भगवान ही परम आश्रय हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि जैन होना केवल जन्म की पहचान नहीं, बल्कि एक बड़ी आध्यात्मिक जिम्मेदारी है। जिनेंद्र भगवान के मार्ग को जीवन में धारण करना ही जैनत्व की सार्थकता है। मंदिर और तीर्थयात्रा को परंपरा नहीं, आत्मचिंतन और जीवन परिवर्तन का माध्यम बनाएं।</p>
<h2>धर्मसभा में बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित</h2>
<p class="isSelectedEnd">धर्मसभा में <strong>परम संरक्षक भरत मोदी, चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन आनंद गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक डोशी, महामंत्री हर्ष जैन, आलोक आकाश कोल, प्रिंसपाल टोंग्या, संजय पाटोदी, श्रीमती मुक्ता जैन और सोनाली बागढीया</strong> सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुनिपुंगव सुधासागर जी इंदौर की इस धर्मसभा में भगवान महावीर के सिद्धांतों को केवल स्मरण करने के बजाय उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने और तीर्थ-मंदिरों को आत्मकल्याण का माध्यम बनाने का संदेश प्रमुख रूप से सामने आया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>Indore दलालबाग में गिन्नी परिवार का विशेष सम्मान, मुनि श्री सुधा सागर महाराज ने दिया आशीर्वाद</title>
		<link>https://swarajvani.com/indore-punyarjak-ginni-parivar-samman/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Sep 2026 16:42:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[Indore]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर जैन समाज]]></category>
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					<description><![CDATA[Indore के दलालबाग में मुनि श्री सुधा सागर महाराज के भव्य चातुर्मास के दौरान दोनों समय के सम्पूर्ण भोजन के पुण्यार्जक गिन्नी ग्रुप परिवार का शाल-श्रीफल और माला पहनाकर सम्मान ... <a title="Indore दलालबाग में गिन्नी परिवार का विशेष सम्मान, मुनि श्री सुधा सागर महाराज ने दिया आशीर्वाद" class="read-more" href="https://swarajvani.com/indore-punyarjak-ginni-parivar-samman/" aria-label="Read more about Indore दलालबाग में गिन्नी परिवार का विशेष सम्मान, मुनि श्री सुधा सागर महाराज ने दिया आशीर्वाद">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>Indore के दलालबाग में मुनि श्री सुधा सागर महाराज के भव्य चातुर्मास के दौरान दोनों समय के सम्पूर्ण भोजन के पुण्यार्जक गिन्नी ग्रुप परिवार का शाल-श्रीफल और माला पहनाकर सम्मान किया गया।</p>
<h1>मुनि श्री सुधा सागर महाराज के भव्य चातुर्मास में पुण्यार्जक गिन्नी परिवार का विशेष सम्मान</h1>
<p class="isSelectedEnd"><strong>दोनों समय के सम्पूर्ण भोजन के पुण्यार्जक गिन्नी ग्रुप परिवार को शाल-श्रीफल और माला पहनाकर किया सम्मानित, मुनिश्री ने दिया विशेष आशीर्वाद</strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>रिपोर्टर — प्रदीप जैन</strong><br />
<strong>Indore।</strong> पुण्यार्जक गिन्नी परिवार का सम्मान रविवार, 6 सितंबर 2026 को दलालबाग, एयरपोर्ट रोड पर आयोजित मुनि श्री सुधा सागर महाराज जी के भव्य चातुर्मास के दौरान किया गया। प्रवचन कार्यक्रम के पश्चात दोनों समय के सम्पूर्ण भोजन के पुण्यार्जक परिवार <strong>गिन्नी ग्रुप परिवार के श्री गजेंद्र जी-माया देवी, गौतम-शीतल जैन एवं गिरीश जैन</strong> का शाल-श्रीफल और माला पहनाकर सम्मान किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">परिवार की सेवा को देखते हुए <strong>मुनि श्री सुधा सागर महाराज जी</strong> ने भी पुण्यार्जक परिवार को विशेष आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक एवं सामाजिक वातावरण में पुण्यार्जक परिवार द्वारा की गई सेवा का सम्मान किया गया।</p>
<h2>सामाजिक संसद, महासमिति और तीर्थ क्षेत्र कमेटी ने किया सम्मान</h2>
<p class="isSelectedEnd"><strong>पुण्यार्जक गिन्नी परिवार का सम्मान</strong> सामाजिक संसद, Indore दिगम्बर जैन महासमिति और तीर्थ क्षेत्र कमेटी द्वारा किया गया। इस अवसर पर तीनों संस्थाओं के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। पुण्यार्जक परिवार को शाल-श्रीफल भेंट करने के साथ माला पहनाकर सम्मानित किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुनि श्री सुधा सागर महाराज जी के भव्य चातुर्मास के अंतर्गत दलालबाग में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। प्रवचन के पश्चात आयोजित सम्मान कार्यक्रम में गिन्नी ग्रुप परिवार की सेवा को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।</p>
<h2>मुनि श्री सुधा सागर महाराज ने दिया विशेष आशीर्वाद</h2>
<p class="isSelectedEnd">दोनों समय के सम्पूर्ण भोजन के पुण्यार्जक बने गिन्नी ग्रुप परिवार की सेवा को देखते हुए मुनिश्री द्वारा विशेष आशीर्वाद दिया गया। सम्मान समारोह में उपस्थित समाजजनों ने भी परिवार की सेवा के प्रति सम्मान व्यक्त किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में <strong>सुरेंद्र बाकलीवाल, डी.के. जैन, बिजनेस दर्पण (मीडिया ग्रुप) के हेमंत ज्योति जैन, धर्मेंद्र सिनकेम, डॉ. संगीता विनायका, जैनेश झांझरी, पिंकेश टोंग्या, वीरेन्द्र बड़जात्या, प्रदीप शास्त्री, पवन पाटोदी, चंद्रेश जैन, अजय जैन अज्जू, पुष्पेन्द्र जैन सोनू और चंद्रकुमार टोंग्या</strong> सहित सामाजिक संसद, महासमिति और तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।</p>
<h2>दलालबाग में भव्य चातुर्मास</h2>
<p class="isSelectedEnd">दलालबाग, एयरपोर्ट रोड पर चल रहे <strong>मुनि श्री सुधा सागर महाराज जी के भव्य चातुर्मास</strong> के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ समाजसेवा और पुण्यार्जन से जुड़े परिवारों का सम्मान भी किया जा रहा है। रविवार के कार्यक्रम में पुण्यार्जक गिन्नी परिवार का सम्मान प्रमुख आकर्षण रहा।</p>
<p>गिन्नी ग्रुप परिवार के श्री गजेंद्र जी-माया देवी, गौतम-शीतल जैन और गिरीश जैन को मिले इस सम्मान के दौरान सामाजिक संसद, इंदौर दिगम्बर जैन महासमिति और तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सदस्यों की मौजूदगी रही। मुनिश्री के विशेष आशीर्वाद के साथ सम्मान कार्यक्रम संपन्न हुआ।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>इंदौर में 26वां दिगम्बर जैन परिचय सम्मेलन, देशभर के युवक-युवतियों के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू; 28-29 नवंबर को आयोजन</title>
		<link>https://swarajvani.com/indore-me-26-digmber-jain-parichay-sammelan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 14:49:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain Samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Indore Jain Parichay Sammelan 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Indore News]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Matrimonial Conference]]></category>
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		<category><![CDATA[Madhya Pradesh News]]></category>
		<category><![CDATA[अनिल जैन सप्पू]]></category>
		<category><![CDATA[अनिल रावत]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[दिगम्बर जैन युवक-युवती परिचय सम्मेलन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगम्बर जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[देवेन्द्र जैन जनता]]></category>
		<category><![CDATA[रवीन्द्र नाट्यगृह इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[राकेश चेतक]]></category>
		<category><![CDATA[राजेश जैन दद्दू]]></category>
		<category><![CDATA[श्री दिगम्बर जैन परवार सभा]]></category>
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					<description><![CDATA[इंदौर में 28-29 नवंबर को 26वां अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवक-युवती परिचय सम्मेलन आयोजित होगा। सकल दिगम्बर जैन समाज के विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू ... <a title="इंदौर में 26वां दिगम्बर जैन परिचय सम्मेलन, देशभर के युवक-युवतियों के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू; 28-29 नवंबर को आयोजन" class="read-more" href="https://swarajvani.com/indore-me-26-digmber-jain-parichay-sammelan/" aria-label="Read more about इंदौर में 26वां दिगम्बर जैन परिचय सम्मेलन, देशभर के युवक-युवतियों के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू; 28-29 नवंबर को आयोजन">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इंदौर में 28-29 नवंबर को 26वां अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवक-युवती परिचय सम्मेलन आयोजित होगा। सकल दिगम्बर जैन समाज के विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं।</p>
<p>इंदौर में 26वां अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवक-युवती परिचय सम्मेलन 28-29 नवंबर को, रजिस्ट्रेशन शुरू</p>
<p>राजेश जैन दद्दू</p>
<p>इंदौर। दिगम्बर जैन युवक-युवती परिचय सम्मेलन इंदौर में इस वर्ष 28 और 29 नवंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। श्री दिगम्बर जैन परवार सभा, इंदौर द्वारा आयोजित होने वाला यह 26वां अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवक-युवती परिचय सम्मेलन दो दिवसीय होगा। सम्मेलन को आधुनिक तकनीक और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके साथ ही विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए रजिस्ट्रेशन भी प्रारंभ हो गया है।</p>
<p>भारत के सबसे स्वच्छ शहर एवं मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में होने वाले इस परिचय सम्मेलन में सकल दिगम्बर जैन समाज के विवाह योग्य युवक-युवतियों को शामिल होने का अवसर मिलेगा।</p>
<p>28-29 नवंबर को होगा दिगम्बर जैन युवक-युवती परिचय सम्मेलन इंदौर</p>
<p>परवार सभा के अध्यक्ष राकेश चेतक एवं मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि सम्मेलन 28 एवं 29 नवंबर 2026, शनिवार और रविवार को प्रातः 10 बजे से रवीन्द्र नाट्यगृह, आर.एन.टी. मार्ग, इंदौर में आयोजित किया जाएगा।</p>
<p>दो दिवसीय सम्मेलन को आधुनिक तकनीक के साथ सुव्यवस्थित रूप से आयोजित करने की तैयारी की जा रही है, जिससे इसमें शामिल होने वाले प्रत्याशियों और उनके परिजनों को बेहतर सुविधा मिल सके।</p>
<p>रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 15 नवंबर</p>
<p>परवार सभा के महामंत्री अनिल रावत ने बताया कि परिचय सम्मेलन के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 15 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।</p>
<p>सम्मेलन में सकल दिगम्बर जैन समाज के विवाह योग्य युवक-युवतियों का पंजीयन कराया जा सकता है। इसके लिए ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन फॉर्म भरने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।</p>
<p>ऑनलाइन फॉर्म परवार सभा की वेबसाइट <a href="https://www.djpsindore.com/?utm_source=chatgpt.com" rel="nofollow noopener" target="_blank">www.djpsindore.com</a>⁠ पर भरे जा सकते हैं। ऑनलाइन प्रविष्टि एवं पेमेंट के लिए सम्मेलन के पोस्टर में दिए गए QR Code को भी स्कैन किया जा सकता है।</p>
<p>प्रत्याशियों के लिए 950 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क</p>
<p>सभा के कार्य अध्यक्ष अनिल जैन ने बताया कि सम्मेलन में प्रत्याशियों के रजिस्ट्रेशन के लिए मात्र 950 रुपये की राशि निर्धारित की गई है।</p>
<p>वहीं, डाक के माध्यम से परिचय स्मारिका मंगाने पर 1150 रुपये देने होंगे।</p>
<p>संदीप जैन गिन्नी एवं प्रदीप बल्ला ने बताया कि केवल परिचय स्मारिका में परिचय प्रकाशन कराने के लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।</p>
<p>बैंक खाते में भी जमा कर सकते हैं राशि</p>
<p>सम्मेलन के लिए उपलब्ध कराए गए बैंक विवरण के अनुसार भुगतान HDFC Bank, Ram Bag, Indore की शाखा में किया जा सकता है।</p>
<p>A/c Name: Shri Digambar Jain Parwar Sabha<br />
A/c No.: <a href="tel:50100838710273">50100838710273</a><br />
IFSC Code: HDFC0005222</p>
<p>रजिस्ट्रेशन और आवास के लिए इन नंबरों पर करें संपर्क</p>
<p>ऑनलाइन जानकारी एवं रजिस्ट्रेशन संबंधी जानकारी के लिए प्रमुख संयोजक अनिल रावत – <a href="tel:9329765795">9329765795</a> से संपर्क किया जा सकता है।</p>
<p>संयोजक अनिल जैन (सप्पू) – <a href="tel:9425910554">9425910554</a> से भी सम्मेलन से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।</p>
<p>वहीं बाहर से आने वाले समाजजनों एवं प्रत्याशियों की आवास व्यवस्था से संबंधित जानकारी के लिए संयोजक देवेन्द्र जैन (जनता) – <a href="tel:9424889955">9424889955</a> से संपर्क किया जा सकता है।</p>
<p>आयोजकों के अनुसार, इंदौर में होने वाले इस 26वें अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवक-युवती परिचय सम्मेलन को व्यवस्थित एवं आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। सम्मेलन के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक विवाह योग्य युवक-युवतियां निर्धारित अंतिम तिथि से पहले अपना पंजीयन करा सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Indore में मुनि सुधासागर जी महाराज का प्रेरक संदेश: ‘भगवान रास्ता दिखा सकते हैं, गाड़ी हमें ही चलानी है’</title>
		<link>https://swarajvani.com/muni-sudhasagar-ji-maharaj-indore-5-sandesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Aug 2026 10:49:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Indore News]]></category>
		<category><![CDATA[Dalal Bagh Indore]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Muni Sudhasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Sudhasagar Ji Maharaj Indore]]></category>
		<category><![CDATA[Swaraj Vani]]></category>
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		<category><![CDATA[इंदौर जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर धार्मिक समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर न्यूज़]]></category>
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		<category><![CDATA[चातुर्मास 2026]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास 2027]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[दलाल बाग चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि सुधासागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि सुधासागर जी महाराज इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[राजेश जैन दद्दू]]></category>
		<category><![CDATA[सुधासागर जी महाराज]]></category>
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					<description><![CDATA[Indore दलाल बाग चातुर्मास में मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने कर्म, भाव, चरित्र और सच्ची भक्ति का महत्व बताया। गुजरात से 1000 से अधिक श्रद्धालुओं ने पहुंचकर 2027 ... <a title="Indore में मुनि सुधासागर जी महाराज का प्रेरक संदेश: ‘भगवान रास्ता दिखा सकते हैं, गाड़ी हमें ही चलानी है’" class="read-more" href="https://swarajvani.com/muni-sudhasagar-ji-maharaj-indore-5-sandesh/" aria-label="Read more about Indore में मुनि सुधासागर जी महाराज का प्रेरक संदेश: ‘भगवान रास्ता दिखा सकते हैं, गाड़ी हमें ही चलानी है’">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>Indore दलाल बाग चातुर्मास में मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने कर्म, भाव, चरित्र और सच्ची भक्ति का महत्व बताया। गुजरात से 1000 से अधिक श्रद्धालुओं ने पहुंचकर 2027 के चातुर्मास के लिए श्रीफल समर्पित किया।</p>
<h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" data-section-id="k9ethz" data-start="907" data-end="975">भगवान पर विश्वास रखो, पर जीवन की गाड़ी खुद चलाओ : मुनि सुधासागर जी</h1>
<p data-start="977" data-end="996"><strong data-start="977" data-end="996">राजेश जैन दद्दू</strong></p>
<p data-start="998" data-end="1482"><strong data-start="998" data-end="1008">Indore।</strong> <strong data-start="1009" data-end="1042">मुनि सुधासागर जी महाराज इंदौर</strong> के दलाल बाग चातुर्मास में दलाल बाग स्थित देशना मंडप में पूज्य मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने कहा कि भगवान पर विश्वास रखना अच्छी बात है, लेकिन पूरी जिंदगी भगवान भरोसे छोड़ देना उचित नहीं है। हम अक्सर भगवान को ही अपनी जिंदगी का ड्राइवर बना लेते हैं, सोचते हैं भगवान सब ठीक कर देंगे। जबकि गाड़ी हमारी है, रास्ता हमारा है, ड्राइवर भी हमें ही बनना होगा। भगवान रास्ता दिखा सकते हैं, आशीर्वाद दे सकते हैं, लेकिन गाड़ी हमें ही चलानी है।</p>
<h2 data-section-id="13op7z2" data-start="1484" data-end="1511">कर्म से पहले भाव को देखो</h2>
<p data-start="1513" data-end="1783">गुरुदेव ने कहा कि मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण उसके भाव हैं। बाहर का कर्म बाद में आता है, शुरुआत भीतर की भावना से होती है। गलत भावना ही पाप कर्म का कारण बनती है। इसलिए केवल बाहरी आचरण नहीं, भीतर के भावों को शुद्ध करना जरूरी है। भाव शुद्ध होंगे तो कर्म शुद्ध होंगे।</p>
<h2 data-section-id="1w4bujg" data-start="1785" data-end="1825">जाति से बड़ा कर्म, कुल से बड़ा चरित्र</h2>
<p data-start="1827" data-end="2155">उन्होंने कहा मनुष्य का परिचय जन्म-जाति से नहीं, कर्म और चरित्र से होता है। हमारे कर्म इतने अच्छे हों कि कुल का नाम हमारे कारण ऊंचा हो। केवल मंदिर जाना पर्याप्त नहीं, मंदिर हमें भीतर देखने की प्रेरणा देता है। धर्म तब सार्थक है जब उसे जीवन में धारण किया जाए। सच्ची भक्ति भगवान से मांगना नहीं, भगवान के गुणों को जीवन में उतारना है।</p>
<p data-start="2157" data-end="2428">धर्म समाज प्रचारक <strong data-start="2175" data-end="2194">राजेश जैन दद्दू</strong> ने बताया कि मुनि श्री ने यह भी कहा कि कर्म की कभी उपेक्षा मत करना। एक बार भले ही मां-बाप की, धर्म की बात मत मानना चलेगा, लेकिन कर्म की बात अवश्य मानना, क्योंकि कर्म बहुत शक्तिशाली होता है और वह न किसी को छोड़ता है और न क्षमा करता है।</p>
<h2 data-section-id="jlnf9t" data-start="2430" data-end="2480">जैन कुल और संस्कार पूर्व जन्म के कर्म का परिणाम</h2>
<p data-start="2482" data-end="2748">मुनि श्री ने कहा कि जो तुम्हें आज जैन कुल मिला, जैन धर्म के संस्कार मिले, देव दर्शन, अभिषेक, पूजन की सुविधा मिली, गुरु का सानिध्य, आशीर्वाद और चातुर्मास मिला, वह सब तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्म और मरते समय की गई कर्म बद्ध (भावना) का परिणाम है कि तुम्हें जैन कुल मिला।</p>
<p data-start="2750" data-end="2928">उन्होंने कहा कि भारत में आज ऐसे भी गांव हैं, जहां आज तक कोई मुनि महाराज नहीं पहुंचे। लेकिन इंदौर के लोग सौभाग्यशाली हैं कि यहां निरंतर साधु का सानिध्य और चातुर्मास होते रहते हैं।</p>
<p data-start="2930" data-end="2997">धर्म सभा का संचालन <strong data-start="2949" data-end="2988">आवाज की दुनिया के जादूगर अनुराग जैन</strong> ने किया।</p>
<h2 data-section-id="ge2z33" data-start="2999" data-end="3073">2027 के चातुर्मास की भावना लेकर गुजरात से पहुंचे 1000 से अधिक श्रद्धालु</h2>
<p data-start="3075" data-end="3319">दद्दू ने बताया कि आज गुजरात से <strong data-start="3106" data-end="3132">1000 से अधिक श्रद्धालु</strong> दलाल बाग पहुंचे। श्रद्धालुओं ने 2027 के अगले चातुर्मास की भावना लेकर मुनि श्री के समक्ष श्रीफल समर्पित किया और उनसे अगला चातुर्मास गुजरात की वसुंधरा पर करने का विनम्र भाव से निवेदन किया।</p>
<p data-start="3321" data-end="3536">इस अवसर पर <strong data-start="3332" data-end="3500">आलोक, आकाश कोल, अक्षय कासलीवाल, नवीन गोधा, आनंद गोधा, हर्ष जैन, भूपेंद्र भोपाली, डॉ. जैनेंद्र जैन, वीरेंद्र देवरी, अखिलेश, अरविंद सोधिया, राजेश दद्दू और संजय पाटोदी</strong> सहित अनेक समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे।</p>
<h2 data-section-id="97fpo" data-start="3538" data-end="3589">मुनि सुधासागर जी महाराज के संदेश की प्रमुख बातें</h2>
<p data-start="3591" data-end="3965">मुनि सुधासागर जी महाराज इंदौर के दलाल बाग में धर्मसभा के दौरान श्रद्धालुओं को जीवन में कर्म की शक्ति को समझने, अपने भावों को शुद्ध रखने और धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखते हुए आचरण में उतारने का संदेश दिया। उन्होंने समझाया कि भगवान पर श्रद्धा और विश्वास के साथ मनुष्य को स्वयं भी पुरुषार्थ करना चाहिए। जीवन की दिशा तय करने और आगे बढ़ने की जिम्मेदारी स्वयं मनुष्य की है।</p>
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		<title>पगडंडियां अनेक, मंजिल एक: इंदौर में मुनि सुधासागर जी ने बताया जीवन में क्यों जरूरी है सही दिशा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 13:33:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि सुधासागर जी इंदौर के दलाल बाग में बोले कि संसार में पगडंडियां अनेक हैं, लेकिन मंजिल एक है। गुरु मोक्ष की सही दिशा बताते हैं और धर्म-संस्कार जीवन की ... <a title="पगडंडियां अनेक, मंजिल एक: इंदौर में मुनि सुधासागर जी ने बताया जीवन में क्यों जरूरी है सही दिशा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/muni-sudhasagar-ji-indore-pravachan/" aria-label="Read more about पगडंडियां अनेक, मंजिल एक: इंदौर में मुनि सुधासागर जी ने बताया जीवन में क्यों जरूरी है सही दिशा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मुनि सुधासागर जी इंदौर के दलाल बाग में बोले कि संसार में पगडंडियां अनेक हैं, लेकिन मंजिल एक है। गुरु मोक्ष की सही दिशा बताते हैं और धर्म-संस्कार जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं।</p>
<h1>पगडंडियां अनेक, मंजिल एक &#8211; गति से ज्यादा जरूरी दिशा : मुनि सुधासागर जी</h1>
<p class="isSelectedEnd"><strong>राजेश जैन दद्दू</strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंदौर।</strong> <strong>मुनि सुधासागर जी इंदौर</strong> के दलाल बाग, छत्रपति नगर में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को जीवन की सही दिशा और मोक्ष मार्ग का संदेश दे रहे हैं। पूज्य मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने देशना मंडप में कहा कि संसार में पगडंडियां अनेक हैं, पर मंजिल एक है। पगडंडी कोई भी बना सकता है, लेकिन सही रास्ता गुरु और भगवान बताते हैं। हमारा कैंप मोक्ष है और संसार घना जंगल है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुनि श्री ने कहा कि जैसे NCC के नाइट मार्च में दिशा-सूचक दिशा बताता है, वैसे ही गुरु मनुष्य को मोक्ष की दिशा बताते हैं। गुरु सही मार्ग बता सकते हैं, लेकिन उस मार्ग पर चलना स्वयं को ही पड़ेगा। जीवन में केवल तेज गति से चलना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सही दिशा में आगे बढ़ना अधिक आवश्यक है।</p>
<h2>मुनि सुधासागर जी का संदेश- ‘मैं अच्छा हूं, जगत बुरा है’ सबसे खतरनाक सोच</h2>
<p class="isSelectedEnd">धर्म समाज प्रचारक <strong>राजेश जैन दद्दू</strong> ने बताया कि गुरुदेव ने आगे कहा कि सबसे खतरनाक पगडंडी यह सोचना है कि <strong>“मैं अच्छा हूं और जगत बुरा है।”</strong> जब व्यक्ति अपने दोष देखना बंद कर देता है और हर गलती दूसरे व्यक्ति में देखने लगता है, तब उसके स्वयं के सुधार का मार्ग बंद हो जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">गुरुदेव ने दूसरी खतरनाक पगडंडी <strong>“मैं जैसा हूं, वैसा ही दुनिया को बना दूं”</strong> वाली सोच को बताया। उन्होंने समाज को संबोधित करते हुए संकल्प दिलाया कि <strong>“मैं स्वयं गिरूं तो भी किसी को नहीं गिराऊंगा, अपने दोष को अगली पीढ़ी की विरासत नहीं बनाऊंगा।”</strong></p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि यदि रात्रि भोजन जैसी कमजोरी खुद नहीं छोड़ पा रहे हैं तो कम से कम बच्चों को उसकी प्रेरणा न दें। बच्चों से स्पष्ट कहें कि <strong>“मैं नहीं छोड़ पा रहा, पर तू मत अपनाना।”</strong> अपनी कमजोरी को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना उचित नहीं है।</p>
<h2>गंधोदक नहीं, बच्चों को धर्म और संस्कार दें</h2>
<p class="isSelectedEnd"><strong>मुनि सुधासागर जी इंदौर</strong> की धर्मसभा में गुरुदेव ने परिवार और बच्चों को संस्कार देने के महत्व पर भी विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गंधोदक की कीमत नहीं, बल्कि उस हाथ की कीमत पहचानो जो अभिषेक कर परिवार को गंधोदक देता है। वह केवल जल नहीं, बल्कि अपने परिवार को धर्म और संस्कार देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">गुरुदेव ने श्रद्धालुओं से कहा कि अभिषेक करते समय मन में यह संकल्प रखें कि यह मेरे बेटे-बेटी और पूरे परिवार के कल्याण के लिए है। धार्मिक क्रियाओं के पीछे भावना और संस्कार का होना अत्यंत आवश्यक है।</p>
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<h2>बेटी को संपत्ति से पहले धर्म-संस्कार देने का संदेश</h2>
<p class="isSelectedEnd">मुनि श्री ने कहा कि बेटी को संपत्ति से पहले <strong>धर्म और संस्कार</strong> दें। संपत्ति का महत्व अपनी जगह है, लेकिन धर्म और संस्कार ऐसी पूंजी हैं जो आने वाली पीढ़ियों तक जाती है। परिवार में दिए गए अच्छे संस्कार ही बच्चों के जीवन और भविष्य की सही दिशा तय करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने अपने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन की प्रेरणा देते हुए समझाया कि मनुष्य को दूसरों के दोष देखने से पहले अपने भीतर झांकना चाहिए। स्वयं में सुधार की भावना होगी तभी परिवार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव होगा।</p>
<h2>गति से ज्यादा जरूरी है जीवन की सही दिशा</h2>
<p class="isSelectedEnd">मुनि सुधासागर जी महाराज की देशना का मुख्य संदेश रहा कि जीवन में मनुष्य कितनी तेजी से चल रहा है, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वह किस दिशा में चल रहा है। संसार में अलग-अलग रास्ते और पगडंडियां दिखाई दे सकती हैं, लेकिन मनुष्य के आध्यात्मिक जीवन की अंतिम मंजिल मोक्ष है।</p>
<p class="isSelectedEnd">गुरु और भगवान उस मंजिल तक पहुंचने की सही दिशा बताते हैं। इसके बाद पुरुषार्थ प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं करना होता है। इसलिए मनुष्य को अपनी कमियों और दोषों को पहचानकर उनमें सुधार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।</p>
<h2>बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सुनी देशना</h2>
<p class="isSelectedEnd">दलाल बाग, छत्रपति नगर में आयोजित धर्मसभा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मुनि श्री की देशना का लाभ लिया। इस अवसर पर <strong>चक्रवर्ती आकाश आलोक कोल, आनंद नवीन गोधा, अशोक डोशी, हर्ष जैन, डॉ. जैनेन्द्र जैन, विजय पाटोदी, प्रिंसपाल टोंग्या</strong> सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
<p>मुनि सुधासागर जी महाराज के संदेश में आत्मसुधार, परिवार में धर्म-संस्कार और जीवन में सही दिशा को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर रहा। उन्होंने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि व्यक्ति को स्वयं की कमजोरियों को पहचानकर उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचने से रोकना चाहिए और बच्चों को धर्म एवं संस्कारों की ऐसी विरासत देनी चाहिए जो जीवनभर उनका मार्गदर्शन करे।</p>
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		<title>Indore के सुदामा नगर में रक्षाबंधन विधान, श्रद्धालुओं ने समर्पित किए 600 अर्घ्य</title>
		<link>https://swarajvani.com/sudama-nagar-rakshabandhan-vidhan-600-arghya/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:59:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[Indore गणाचार्य श्री सिद्धान्त सागर जी ससंघ के सानिध्य में सुदामा नगर में रक्षाबंधन विधान का भक्तिमय आयोजन। दिपटेश रावका के जन्मदिन पर रावका परिवार ने अभिषेक एवं शांतिधारा का ... <a title="Indore के सुदामा नगर में रक्षाबंधन विधान, श्रद्धालुओं ने समर्पित किए 600 अर्घ्य" class="read-more" href="https://swarajvani.com/sudama-nagar-rakshabandhan-vidhan-600-arghya/" aria-label="Read more about Indore के सुदामा नगर में रक्षाबंधन विधान, श्रद्धालुओं ने समर्पित किए 600 अर्घ्य">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>Indore गणाचार्य श्री सिद्धान्त सागर जी ससंघ के सानिध्य में सुदामा नगर में रक्षाबंधन विधान का भक्तिमय आयोजन। दिपटेश रावका के जन्मदिन पर रावका परिवार ने अभिषेक एवं शांतिधारा का पुण्य अर्जित किया।</p>
<h1>Indore सुदामा नगर रक्षाबंधन विधान में उत्साह: आज 600 अर्घ्य समर्पित, 28 अगस्त को चढ़ेंगे 100 अर्घ्य</h1>
<p class="isSelectedEnd"><strong>सुदामा नगर रक्षाबंधन विधान</strong> में गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ 600 अर्घ्य समर्पित किए गए। पूज्य गणाचार्य श्री सिद्धान्त सागर जी ससंघ के पावन सानिध्य में आयोजित विधान में बड़ी संख्या में समाजजनों ने भाग लेकर धर्मलाभ लिया। अब 28 अगस्त को विधान के अंतर्गत 100 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
<h2>पूज्य गणाचार्य श्री सिद्धान्त सागर जी ससंघ का मिला सानिध्य</h2>
<p class="isSelectedEnd">सुदामा नगर में आयोजित <strong>रक्षाबंधन विधान</strong> को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह और भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। पूज्य गणाचार्य श्री सिद्धान्त सागर जी ससंघ के पावन सानिध्य में समाजजन पूरी श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर रहे हैं। गुरुवार को विधान में समाजजनों की बहुत अच्छी उपस्थिति रही और श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ 600 अर्घ्य समर्पित किए।</p>
<h2>दिपटेश रावका के जन्मदिन पर अभिषेक एवं शांतिधारा</h2>
<p class="isSelectedEnd">आज समाज के <strong>श्री दिपटेश रावका जी</strong> के जन्मदिन के उपलक्ष्य में <strong>श्री कमल जी एवं किरण जी रावका परिवार</strong> ने विधान के अंतर्गत अभिषेक एवं शांतिधारा करने का पुण्य अर्जित किया। इस धार्मिक अवसर पर समाजजनों ने दिपटेश रावका को जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दीं।</p>
<h2>प्रतिष्ठाचार्य नितिन झांझरी करा रहे विधान</h2>
<p class="isSelectedEnd"><strong>प्रतिष्ठाचार्य श्री नितिन जी झांझरी जी</strong> विधि-विधान के साथ अत्यंत भक्तिभाव से <strong>सुदामा नगर रक्षाबंधन विधान</strong> को सम्पन्न करवा रहे हैं। धार्मिक क्रियाओं और मंत्रोच्चार से पूरे आयोजन स्थल पर धर्ममय वातावरण बना हुआ है।</p>
<p>समाज में विधान के प्रति विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। चातुर्मास कमेटी ने कहा कि समस्त सुदामा नगर समाज के पुण्य से यह पावन अवसर प्राप्त हुआ है। <strong>सुदामा नगर आचार्य श्री सिद्धान्त सागर जी ससंघ चातुर्मास कमेटी, इंदौर</strong> ने समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में धार्मिक आयोजन में सम्मिलित होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है। 28 अगस्त को विधान में 100 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
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