मुनि सुधासागर जी इंदौर के दलाल बाग में बोले कि संसार में पगडंडियां अनेक हैं, लेकिन मंजिल एक है। गुरु मोक्ष की सही दिशा बताते हैं और धर्म-संस्कार जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
पगडंडियां अनेक, मंजिल एक – गति से ज्यादा जरूरी दिशा : मुनि सुधासागर जी
राजेश जैन दद्दू
इंदौर। मुनि सुधासागर जी इंदौर के दलाल बाग, छत्रपति नगर में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को जीवन की सही दिशा और मोक्ष मार्ग का संदेश दे रहे हैं। पूज्य मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने देशना मंडप में कहा कि संसार में पगडंडियां अनेक हैं, पर मंजिल एक है। पगडंडी कोई भी बना सकता है, लेकिन सही रास्ता गुरु और भगवान बताते हैं। हमारा कैंप मोक्ष है और संसार घना जंगल है।
मुनि श्री ने कहा कि जैसे NCC के नाइट मार्च में दिशा-सूचक दिशा बताता है, वैसे ही गुरु मनुष्य को मोक्ष की दिशा बताते हैं। गुरु सही मार्ग बता सकते हैं, लेकिन उस मार्ग पर चलना स्वयं को ही पड़ेगा। जीवन में केवल तेज गति से चलना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सही दिशा में आगे बढ़ना अधिक आवश्यक है।
मुनि सुधासागर जी का संदेश- ‘मैं अच्छा हूं, जगत बुरा है’ सबसे खतरनाक सोच
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि गुरुदेव ने आगे कहा कि सबसे खतरनाक पगडंडी यह सोचना है कि “मैं अच्छा हूं और जगत बुरा है।” जब व्यक्ति अपने दोष देखना बंद कर देता है और हर गलती दूसरे व्यक्ति में देखने लगता है, तब उसके स्वयं के सुधार का मार्ग बंद हो जाता है।
गुरुदेव ने दूसरी खतरनाक पगडंडी “मैं जैसा हूं, वैसा ही दुनिया को बना दूं” वाली सोच को बताया। उन्होंने समाज को संबोधित करते हुए संकल्प दिलाया कि “मैं स्वयं गिरूं तो भी किसी को नहीं गिराऊंगा, अपने दोष को अगली पीढ़ी की विरासत नहीं बनाऊंगा।”
उन्होंने कहा कि यदि रात्रि भोजन जैसी कमजोरी खुद नहीं छोड़ पा रहे हैं तो कम से कम बच्चों को उसकी प्रेरणा न दें। बच्चों से स्पष्ट कहें कि “मैं नहीं छोड़ पा रहा, पर तू मत अपनाना।” अपनी कमजोरी को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना उचित नहीं है।
गंधोदक नहीं, बच्चों को धर्म और संस्कार दें
मुनि सुधासागर जी इंदौर की धर्मसभा में गुरुदेव ने परिवार और बच्चों को संस्कार देने के महत्व पर भी विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गंधोदक की कीमत नहीं, बल्कि उस हाथ की कीमत पहचानो जो अभिषेक कर परिवार को गंधोदक देता है। वह केवल जल नहीं, बल्कि अपने परिवार को धर्म और संस्कार देता है।
गुरुदेव ने श्रद्धालुओं से कहा कि अभिषेक करते समय मन में यह संकल्प रखें कि यह मेरे बेटे-बेटी और पूरे परिवार के कल्याण के लिए है। धार्मिक क्रियाओं के पीछे भावना और संस्कार का होना अत्यंत आवश्यक है।
बेटी को संपत्ति से पहले धर्म-संस्कार देने का संदेश
मुनि श्री ने कहा कि बेटी को संपत्ति से पहले धर्म और संस्कार दें। संपत्ति का महत्व अपनी जगह है, लेकिन धर्म और संस्कार ऐसी पूंजी हैं जो आने वाली पीढ़ियों तक जाती है। परिवार में दिए गए अच्छे संस्कार ही बच्चों के जीवन और भविष्य की सही दिशा तय करते हैं।
उन्होंने अपने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन की प्रेरणा देते हुए समझाया कि मनुष्य को दूसरों के दोष देखने से पहले अपने भीतर झांकना चाहिए। स्वयं में सुधार की भावना होगी तभी परिवार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव होगा।
गति से ज्यादा जरूरी है जीवन की सही दिशा
मुनि सुधासागर जी महाराज की देशना का मुख्य संदेश रहा कि जीवन में मनुष्य कितनी तेजी से चल रहा है, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वह किस दिशा में चल रहा है। संसार में अलग-अलग रास्ते और पगडंडियां दिखाई दे सकती हैं, लेकिन मनुष्य के आध्यात्मिक जीवन की अंतिम मंजिल मोक्ष है।
गुरु और भगवान उस मंजिल तक पहुंचने की सही दिशा बताते हैं। इसके बाद पुरुषार्थ प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं करना होता है। इसलिए मनुष्य को अपनी कमियों और दोषों को पहचानकर उनमें सुधार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सुनी देशना
दलाल बाग, छत्रपति नगर में आयोजित धर्मसभा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मुनि श्री की देशना का लाभ लिया। इस अवसर पर चक्रवर्ती आकाश आलोक कोल, आनंद नवीन गोधा, अशोक डोशी, हर्ष जैन, डॉ. जैनेन्द्र जैन, विजय पाटोदी, प्रिंसपाल टोंग्या सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मुनि सुधासागर जी महाराज के संदेश में आत्मसुधार, परिवार में धर्म-संस्कार और जीवन में सही दिशा को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर रहा। उन्होंने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि व्यक्ति को स्वयं की कमजोरियों को पहचानकर उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचने से रोकना चाहिए और बच्चों को धर्म एवं संस्कारों की ऐसी विरासत देनी चाहिए जो जीवनभर उनका मार्गदर्शन करे।

