Swadeshi Haat में महिलाओं का हौसला और हुनर
इंदौर में विजयनगर चौराहा स्थित आईडीए मैदान में अखिल भारतीय स्वदेशी संघ के तत्वाधान में मध्यप्रदेश समग्र सेवा संघ द्वारा आयोजित ‘राष्ट्रीय विराट Swadeshi Haat’ का आयोजन चल रहा है। यह आयोजन 22 दिसंबर 2025 तक दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक जारी रहेगा। इस मेले में 27 राज्यों के 300 से अधिक हुनरमंद कलाकार अपने हाथों से बनाए गए उत्पाद और कलाकारी लेकर आए हैं। इस साल मेले का थीम है ‘आत्मनिर्भर भारत, सुदृढ़ भारत: स्वदेशी सामान खरीदें, देश को समृद्धशाली बनाएं’, जिसका उद्देश्य न केवल कलाकारों के हुनर को प्रोत्साहित करना है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी विचारों को आम जनता तक पहुंचाना भी है।
इस मेले का उद्देश्य केवल उत्पादों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि महिलाओं और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी है। स्वदेशी हाट में भाग लेने वाले कलाकार विभिन्न क्षेत्रों से आते हैं, जिनमें टेक्सटाइल, हस्तशिल्प, क्रोशिया, बैंबू कार्य, जूट और अन्य पारंपरिक कला शामिल हैं। इस मेले ने इंदौर वासियों के लिए एक ऐसा मंच तैयार किया है, जहां वे पूरे भारत के विविध हुनर और कलाकारी का अनुभव कर सकते हैं।
स्टार्टअप और महिलाओं की भागीदारी
इस मेले में इंदौर की टेक्सटाइल डिजाइनर नैना पाटीदार भी शामिल हैं। उन्होंने छह महीने पहले अपना स्टार्टअप शुरू किया है और इस समय तीन महिलाओं के साथ काम कर रही हैं। इन महिलाओं ने लूम चलाना और कलाकारी दोनों में दक्षता हासिल की है। उन्होंने हैंडलूम के कपड़े और बैंबू स्टिक से टेबल लैंप, हैंगिंग लैंप और बेड रनर तैयार किए हैं। नैना का उद्देश्य न केवल स्वदेशी उत्पादों को देश में बढ़ावा देना है, बल्कि विदेशों में भी इसे पहचान दिलाना है।
इसी प्रकार, इंदौर की सरल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन की सोनिला मिमरोट भाटिया ने बस्तियों की 150 से अधिक महिलाओं और बच्चियों को उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण और रोजगार प्रदान किया है। उनके स्टॉल पर बोतल आर्ट, पर्स, टेबल मेट, वॉल हैंगिंग, लिप्पन आर्ट और जूट से बने पर्स उपलब्ध हैं। इससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है और उनका हुनर भी समाज के सामने आया है।
इंदौर के गांधीनगर स्थित तनवी स्वयं सहायता समूह की अरोमा कपूर ने भी 10 महिलाओं को क्रोशिया कला में प्रशिक्षित किया है। इन महिलाओं ने स्वेटर, शॉल, मोजे और अन्य परिधानों का निर्माण करके अपनी जीविका कमाई है। स्वदेशी हाट में इन महिलाओं की मेहनत और कलाकारी एक स्टॉल पर प्रदर्शित की गई है, जिससे उनके उत्पादों को व्यापक दर्शक वर्ग देखने और खरीदने का अवसर मिला है।
मेले का ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व
Swadeshi Haat का आयोजन 2005 में चिमनबाग मैदान से शुरू हुआ था। तब से यह मेला प्रदेश के प्रमुख शहरों में नियमित रूप से आयोजित किया जा रहा है। इस बार मेले में उन कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है, जिन्हें उनके हुनर और उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री जैसे राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत किया गया है।
Swadeshi Haat के आयोजन में एमएसएमई मंत्रालय और राज्य सरकार के अन्य विभागों ने सहयोग दिया है। यह आयोजन केवल कला और उत्पाद प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यहां पर खाद्य पदार्थों के लिए अलग से फूड जोन बनाया गया है, जिसमें इंदौर और भारत के प्रमुख व्यंजन उपलब्ध हैं। इस तरह यह मेला कला, संस्कृति, परंपरा, व्यवसाय और रोजगार का संगम बन गया है।
Swadeshi Haat के आयोजन के माध्यम से सरकार और संस्थाएं महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर देने के साथ-साथ उन्हें व्यवसायिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास कर रही हैं। यह आयोजन एक ऐसा मंच बन गया है, जो नए स्टार्टअप और हुनरमंद कलाकारों के लिए अवसरों की बहार लेकर आया है।
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उत्पादों और प्रदर्शनियों की विविधता
मेले में परिधान, हैंडीक्राफ्ट और घरेलू उपयोगी सामान का विशेष प्रदर्शन है। यहाँ आपको मिलेगा:
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परिधान: साड़ियां, कुर्ते, ज्वेलरी। यहाँ गुजराती, बनारसी, मधुबनी, भैरवगढ़ प्रिंट, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, कश्मीर, केरल, गुजरात और उत्तरप्रदेश के पारंपरिक और सांस्कृतिक पहनावे उपलब्ध हैं।
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हैंडिक्राफ्ट और घरेलू उपयोगी वस्तुएं: पीतल के बर्तन, फर्नीचर, क्रोकरी, बेडशीट, भदोई के कारपेट, खेल सामग्री और साहित्यिक किताबें।
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लोक-कल्याणकारी प्रदर्शनियां: विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी, जिससे आगंतुकों को जनहितकारी योजनाओं का लाभ समझने में मदद मिले।
इसके अलावा मेले में पर्यावरण के अनुकूल और सस्टेनेबल उत्पादों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। महिलाओं और युवाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद स्वदेशी और इको-फ्रेंडली हैं। इससे महिलाओं और स्टार्टअप को रोजगार के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के संदेश का प्रचार भी मिलता है।

प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम
Swadeshi Haat में प्रतिदिन विभिन्न प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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गुरुवार: मेला थीम पर चित्रकला और भारतीय नृत्य।
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शुक्रवार: महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार और स्वदेशी मौसमी व्यंजनों की प्रतियोगिता।
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20 दिसंबर: विज्ञान मॉडल और घरेलू वस्तु निर्माण प्रतियोगिता।
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21 दिसंबर: नुक्कड़ नाटक।
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22 दिसंबर: पुरस्कार वितरण समारोह, जिसमें शिक्षाविद, पत्रकार और उद्यमी शामिल होंगे।
इस मेले के आयोजन का उद्देश्य केवल प्रदर्शन या बिक्री नहीं है। यहां प्रतिभागी कलाकार, महिला स्टार्टअप और स्वयं सहायता समूह अपने हुनर को प्रदर्शित कर सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर प्राप्त कर रहे हैं।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय विराट स्वदेशी हाट ने महिलाओं, युवाओं और स्टार्टअप कलाकारों को अपने हुनर और उत्पाद को प्रदर्शित करने का अनूठा मंच प्रदान किया है। यह आयोजन न केवल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देता है, बल्कि महिलाओं और युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी देता है।
Swadeshi Haat के माध्यम से इंदौर वासियों को भारत के 27 राज्यों के विविध कलाकारी, परंपरा और सांस्कृतिक उत्पादों का अनुभव मिल रहा है। इसके अलावा, मेले में महिलाओं को स्टार्टअप और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया है।
प्रणम्य पोरवाल, CEO, राष्ट्रीय विराट स्वदेशी हाट ने बताया कि इस तरह के आयोजन देशभर में स्वदेशी उत्पादों और महिला उद्यमिता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मेले के माध्यम से कलाकारों और महिलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और सम्मान मिलता है, जिससे उनका उत्साह और भी बढ़ता है।
इस आयोजन से यह संदेश भी जाता है कि स्वदेशी उत्पादों और महिला उद्यमियों को बढ़ावा देकर न केवल अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समृद्धि भी सुनिश्चित होती है।
