मध्यप्रदेश छात्रसंघ चुनाव 2026 को लेकर हाई कोर्ट के निर्देश के बाद प्रदेशभर के विद्यार्थियों में उत्साह बढ़ गया है। मनावर में छात्र नेताओं ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार प्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की। पूरी खबर पढ़ें।
8 साल बाद छात्रसंघ चुनाव की बड़ी उम्मीद: हाई कोर्ट के निर्देश से बढ़ी हलचल, छात्रों ने की प्रत्यक्ष चुनाव की जोरदार मांग
संवाददाता: दिलीप कुमरावत
स्थान: मनावर, जिला धार (मध्यप्रदेश)
मध्यप्रदेश छात्रसंघ चुनाव 2026 को लेकर लंबे समय बाद सकारात्मक माहौल बनता दिखाई दे रहा है। प्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लगभग आठ वर्षों से बंद पड़े छात्रसंघ चुनाव फिर शुरू होने की उम्मीद जगी है। हाई कोर्ट के हालिया निर्देश के बाद विद्यार्थियों, छात्र नेताओं और विभिन्न छात्र संगठनों में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। छात्र नेताओं ने न्यायालय के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र और छात्र नेतृत्व के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया है।
आठ साल बाद जगी उम्मीद
मध्यप्रदेश छात्रसंघ चुनाव 2026 को लेकर प्रदेशभर के विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल है। वर्ष 2017 के बाद से राज्य के अधिकांश महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव आयोजित नहीं किए गए। करीब आठ वर्षों तक चुनाव नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने का अवसर नहीं मिल सका।
अब हाई कोर्ट के निर्देश के बाद उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द ही छात्रसंघ चुनाव कराने की दिशा में निर्णय ले सकती है।
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी हलचल
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद प्रदेशभर के कॉलेज परिसरों में छात्र राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई छात्र संगठनों ने इसे लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। विद्यार्थियों का मानना है कि चुनाव होने से उनकी समस्याओं को संस्थागत स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा।
छात्र नेताओं ने किया स्वागत
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व तहसील संयोजक, महाविद्यालय चुनाव संचालक समिति प्रमुख, एडवोकेट एवं पत्रकार दिलीप कुमरावत ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के लिए लोकतंत्र की पहली पाठशाला है।उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव के माध्यम से विद्यार्थियों में—
- नेतृत्व क्षमता
- जिम्मेदारी की भावना
- संवाद कौशल
- संगठन संचालन
- जनसेवा का भाव
जैसे महत्वपूर्ण गुण विकसित होते हैं। लंबे समय बाद चुनाव की संभावना युवाओं के लिए सकारात्मक अवसर है।
2017 के बाद क्यों नहीं हुए छात्रसंघ चुनाव?
मध्यप्रदेश में वर्ष 2017 के बाद छात्रसंघ चुनाव बंद हो गए थे। इसके कारण हजारों विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर नहीं मिला। छात्र नेताओं का कहना है कि कॉलेज केवल शिक्षा प्राप्त करने का केंद्र नहीं बल्कि भविष्य के नेतृत्व निर्माण की प्रयोगशाला भी होते हैं।छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों को प्रशासन से संवाद, संगठन संचालन, सामूहिक निर्णय और समस्याओं के समाधान का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हैं।
लोकतंत्र की पहली पाठशाला
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र की मजबूत नींव विद्यार्थी जीवन से ही तैयार होती है। चुनाव प्रक्रिया युवाओं को अपने विचार रखने, सहमति-असहमति व्यक्त करने तथा लोकतांत्रिक तरीके से प्रतिनिधि चुनने की समझ विकसित करती है।यदि छात्रसंघ चुनाव पारदर्शी और निर्धारित नियमों के तहत कराए जाएं तो महाविद्यालयों में स्वस्थ लोकतांत्रिक वातावरण विकसित होगा।
लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार चुनाव की मांग
छात्र नेताओं ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि मध्यप्रदेश छात्रसंघ चुनाव 2026 लिंगदोह समिति की अनुशंसाओं के अनुरूप आयोजित किए जाएं।उनकी प्रमुख मांगें—
- प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली लागू की जाए।
- पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया अपनाई जाए।
- निर्धारित नियमों का पालन हो।
- योग्य एवं अनुशासित छात्र नेतृत्व को अवसर मिले।
- चुनाव समयबद्ध तरीके से कराए जाएं।
विद्यार्थियों की समस्याओं को मिलेगा मजबूत मंच
निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि निम्न मुद्दों को प्रभावी ढंग से प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे—
- परीक्षा संबंधी समस्याएं
- पुस्तकालय सुविधाएं
- छात्रावास
- खेल सुविधाएं
- परिवहन व्यवस्था
- छात्रवृत्ति
- आधारभूत सुविधाएं
- कैंपस विकास
छात्रसंघ विद्यार्थियों और महाविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद का मजबूत माध्यम बन सकता है।
छात्रसंघ चुनाव से संभावित लाभ
- विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता का विकास।
- लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ मजबूत होगी।
- छात्र हितों को प्रभावी मंच मिलेगा।
- जवाबदेह युवा नेतृत्व तैयार होगा।
- प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच बेहतर संवाद।
- कॉलेजों में लोकतांत्रिक वातावरण मजबूत होगा।
- सामाजिक जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी।
- राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ेगी।
छात्र नेताओं की प्रमुख मांग
छात्र नेताओं ने सरकार से मांग की है कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप पारदर्शी एवं प्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं, ताकि विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का लोकतांत्रिक अधिकार मिल सके।उन्होंने कहा कि यदि समय रहते चुनाव कराए जाते हैं तो प्रदेशभर के लाखों विद्यार्थियों को नेतृत्व विकसित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिलेगा।
