गायत्री शक्तिपीठ में मातृ शक्ति सम्मेलन, भोजन और दिनचर्या के प्रति सजग रहने का संदेश
भगवती देवी शर्मा के जन्मदिवस पर गायत्री परिवार और सूर्यायतन सेवा संस्थान का संयुक्त आयोजन; ‘अन्न नारायण कथा’ का हुआ वाचन
संवाददाता: मुकेश सोलंकी
भीनमाल। अखिल विश्व गायत्री परिवार की अधिष्ठात्री वंदनीय भगवती देवी शर्मा के जन्मदिवस पर स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ में मातृ शक्ति सम्मेलन आयोजित किया गया। गायत्री परिवार और सूर्यायतन सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में भोजन, आहार-विहार और दिनचर्या के प्रति सजगता बढ़ाने पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने शरीर और मन से जुड़ी आदतों पर विचार करने के साथ परिवार में संस्कारों की भूमिका पर भी अपने विचार रखे।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता परम आकाश कन्हैयालाल खंडेलवाल ने स्वयं लिखित ‘अन्न नारायण कथा’ का वाचन किया। उन्होंने कहा कि भोजन के प्रति व्यक्ति का व्यवहार उसके दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दौरान उन्होंने सुबह के नाश्ते, दोपहर और शाम के भोजन से जुड़े विषयों को सरल भाषा में समझाया।
‘अन्नमय कोश’ की अवधारणा पर रखे विचार
खंडेलवाल ने अपने संबोधन में ‘अन्नमय कोश’ की आध्यात्मिक अवधारणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भोजन से मिलने वाली ऊर्जा का शरीर और मन पर प्रभाव पड़ता है, इसलिए व्यक्ति को अपने आहार के प्रति सजग रहना चाहिए। उन्होंने ‘जैसा भोजन, वैसी ऊर्जा’ के विचार के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी भोजन संबंधी आदतों पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य वक्ता ने वर्तमान जीवनशैली और आहार-विहार पर भी बात की। उन्होंने सुबह के नाश्ते को ‘ऊर्जावान एल्कलाइन नाश्ता’ बताते हुए दिन के अन्य भोजन के बारे में अपनी अवधारणाएं प्रस्तुत कीं। सम्मेलन में इन विषयों पर प्रशिक्षण और संवाद का उद्देश्य प्रतिभागियों को अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या के प्रति अधिक जागरूक बनाना रहा।
खंडेलवाल ने अपने संबोधन में बढ़ती बीमारियों के लिए दिनचर्या और आहार-विहार को जिम्मेदार बताते हुए 90 प्रतिशत का आंकड़ा भी कहा। यह उनका कथन था; आयोजन में इसके समर्थन में किसी चिकित्सकीय अध्ययन की जानकारी नहीं दी गई।
गीता बहन ने दिया ‘मोबाइल उपवास’ का सुझाव
स्थानीय ब्रह्माकुमारी राजयोग केंद्र की प्रभारी गीता बहन ने सम्मेलन में पारंपरिक उपवास के साथ ‘मोबाइल का उपवास’ रखने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि दिनभर में कुछ समय मोबाइल से दूरी बनाकर व्यक्ति स्वयं और परिवार के लिए समय निकाल सकता है।
गीता बहन ने बच्चों के संस्कारों में माता की भूमिका पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने संतान के व्यवहार और आदतों पर परिवार के प्रभाव को समझाने का प्रयास किया। मातृ शक्ति सम्मेलन में इस विषय पर चर्चा के माध्यम से प्रतिभागियों को परिवार के भीतर संवाद और अपनी जिम्मेदारियों पर विचार करने का अवसर मिला।
अन्य वक्ताओं ने भी किया संबोधित
कार्यक्रम में गायत्री परिवार के राणमल शर्मा और महेश व्यास ने भी अपने विचार रखे। सम्मेलन में जीवनशैली, सकारात्मक सोच और पारिवारिक वातावरण से जुड़े विषयों पर बात हुई। वक्ताओं ने कहा कि दैनिक जीवन में अपनी आदतों को पहचानना बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य शरीर, मन और चेतना के प्रति सजगता बढ़ाना था। इस दौरान भोजन को लेकर दी गई जानकारी के साथ व्यवहार और सोच पर भी ध्यान देने का संदेश रखा गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने वक्ताओं के विचार सुने और गतिविधियों में सहभागिता की।
आयोजन में इनका रहा सहयोग
सम्मेलन के अंत में गायत्री परिवार ट्रस्ट के अध्यक्ष जोगाराम चौधरी ने वक्ताओं, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। आयोजन व्यवस्था में पूर्णा सोनी, हरिराम विश्नोई, दिनेश भाटी, किशोर सुथार, प्रदीप शर्मा, नवरतन अग्रवाल, भरत शर्मा, सुमित बाहेती, दिलीप सोनी, भंवरी खंडेलवाल, सीमा शर्मा, चेतना नागर और सुरेश माली सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया।
भगवती देवी शर्मा के जन्मदिवस पर हुआ यह सम्मेलन भोजन और दिनचर्या पर संवाद के साथ संपन्न हुआ। प्रतिभागियों को आहार-विहार के प्रति सजग रहने तथा परिवार में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
