सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल बड़वानी में ‘नशे से दूरी है जरूरी’ विषय पर कार्यशाला, विद्यार्थियों को साइबर क्राइम के प्रति भी किया जागरूक
इंटरनेशनल कराते चैंपियन डॉ. विशाल कैलाश दमके ने विद्यार्थियों को बताए नशे के दुष्परिणाम, सवाल-जवाब के जरिए समझाई सामाजिक और डिजिटल सुरक्षा की अहमियत
बड़वानी। विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराने और उन्हें सुरक्षित एवं जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल, बड़वानी में ‘नशे से दूरी है जरूरी’ विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विद्यार्थियों को न केवल नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान की जानकारी दी गई, बल्कि तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति भी जागरूक किया गया।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में इंटरनेशनल कराते चैंपियन डॉ. विशाल कैलाश दमके उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और सही संगति के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाएं रखीं और नशामुक्ति तथा साइबर सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों को समझने का प्रयास किया।
नशा व्यक्ति के साथ परिवार और समाज को भी करता है प्रभावित
मुख्य अतिथि डॉ. विशाल कैलाश दमके ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को नशे के विभिन्न दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नशे की आदत केवल संबंधित व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि उसके परिवार, शिक्षा, करियर और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किशोरावस्था और युवावस्था जीवन की वह महत्वपूर्ण अवधि होती है, जिसमें लिए गए निर्णय भविष्य की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऐसे समय में गलत संगति, दबाव या किसी प्रकार के प्रलोभन में आकर नशे की ओर बढ़ना जीवन के लिए गंभीर समस्या बन सकता है।
कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार के नशे से दूरी बनाए रखना स्वस्थ और सफल जीवन के लिए आवश्यक है। युवाओं को खेल, शिक्षा और सकारात्मक गतिविधियों में अपनी ऊर्जा का उपयोग करना चाहिए।
अनुशासन और आत्मविश्वास को बताया सफलता की कुंजी

इंटरनेशनल कराते चैंपियन होने के नाते डॉ. दमके ने खेल और अनुशासन के महत्व पर भी विद्यार्थियों से चर्चा की। उन्होंने बताया कि खेल व्यक्ति को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ मानसिक दृढ़ता, आत्मविश्वास, समय प्रबंधन और अनुशासन भी सिखाते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक गतिविधियों से जुड़कर युवा न केवल अपने व्यक्तित्व का बेहतर विकास कर सकते हैं, बल्कि गलत आदतों और नकारात्मक प्रभावों से भी स्वयं को दूर रख सकते हैं।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें सही जानकारी देकर जागरूक बनाना रहा, ताकि वे जीवन में सोच-समझकर निर्णय ले सकें।
साइबर क्राइम के बढ़ते खतरे से भी कराया अवगत
कार्यशाला का दूसरा महत्वपूर्ण विषय साइबर क्राइम और डिजिटल सुरक्षा रहा। डॉ. विशाल कैलाश दमके ने विद्यार्थियों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के उपयोग के दौरान सावधानी बरतने की आवश्यकता के बारे में बताया।
विद्यार्थियों को समझाया गया कि डिजिटल दुनिया जहां शिक्षा, संचार और जानकारी के लिए बेहद उपयोगी है, वहीं असावधानी कई तरह के साइबर जोखिम पैदा कर सकती है। अनजान लिंक पर क्लिक करना, संदिग्ध संदेशों पर भरोसा करना, निजी जानकारी साझा करना या अनजान लोगों से ऑनलाइन संपर्क बढ़ाना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
विद्यार्थियों को सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील विवरण सुरक्षित रखने की आवश्यकता के बारे में भी जागरूक किया गया। साथ ही किसी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि या साइबर ठगी जैसी स्थिति सामने आने पर अभिभावकों, शिक्षकों अथवा जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत जानकारी देने का संदेश दिया गया।
सवाल-जवाब के जरिए विद्यार्थियों ने समझी विषय की गंभीरता

कार्यशाला की खास बात विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। विद्यार्थियों ने नशे, गलत संगति, साइबर अपराध, सोशल मीडिया और व्यक्तिगत सुरक्षा से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे।
प्रश्नोत्तर के माध्यम से विद्यार्थियों ने विषय की गंभीरता को समझने का प्रयास किया। उनकी जिज्ञासाओं का समाधान सरल तरीके से किया गया, जिससे कार्यक्रम केवल औपचारिक व्याख्यान तक सीमित न रहकर संवादात्मक कार्यशाला के रूप में सामने आया।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि विद्यार्थियों को किताबी शिक्षा के साथ सामाजिक चुनौतियों और आधुनिक डिजिटल खतरों की जानकारी देना भी आवश्यक है। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम बच्चों को व्यावहारिक जीवन में सही निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं।
हेड मास्टर हर्ष सिंह परिहार ने किया अतिथि का स्वागत
कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय के हेड मास्टर हर्ष सिंह परिहार द्वारा मुख्य अतिथि डॉ. विशाल कैलाश दमके का स्वागत किया गया। विद्यालय परिवार ने उनकी उपस्थिति और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवन, स्वस्थ आदतों, अनुशासन और साइबर सुरक्षा से जुड़े संदेशों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रधानाचार्य डॉ. पी.वी. सत्य रमेश ने जताया आभार
कार्यशाला के समापन अवसर पर संस्था के प्रधानाचार्य डॉ. पी.वी. सत्य रमेश ने समापन भाषण दिया और मुख्य अतिथि सहित कार्यक्रम से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने विद्यार्थियों से कार्यशाला में प्राप्त जानकारी को केवल कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखने, बल्कि अपने जीवन में उसका पालन करने का आह्वान किया। साथ ही विद्यार्थियों को अपने परिवार और मित्रों को भी नशे से दूरी तथा साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया।
जागरूक और जिम्मेदार युवा बनाने की दिशा में पहल
सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को ‘नशे से दूरी है जरूरी’ का संदेश देने के साथ आधुनिक समय में साइबर सुरक्षा के महत्व से भी परिचित कराया गया।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि स्वस्थ शरीर, सकारात्मक सोच, अनुशासन, सही संगति और डिजिटल सतर्कता बेहतर भविष्य के महत्वपूर्ण आधार हैं। विद्यालय में आयोजित यह पहल विद्यार्थियों को सामाजिक रूप से जागरूक, जिम्मेदार और आत्मविश्वासी नागरिक बनाने की दिशा में उपयोगी प्रयास के रूप में सामने आई।
