ओंकारेश्वर में 38 साल बाद Rashtrapati का आगमन: द्रौपदी मुर्मू का ऐतिहासिक दौरा
मध्यप्रदेश की पवित्र तीर्थनगरी ओंकारेश्वर एक बार फिर इतिहास रचने जा रही है। करीब 38 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देश की Rashtrapati यहां पहुंचने वाली हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 जून 2026 को दो दिवसीय मध्यप्रदेश दौरे पर ओंकारेश्वर आएंगी। उनके आगमन को लेकर पूरे निमाड़ क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है। जिला प्रशासन, पुलिस और मंदिर प्रबंधन ने सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।
ओंकारेश्वर, जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से देशभर में विशेष महत्व रखता है। ऐसे पवित्र स्थल पर राष्ट्रपति का आगमन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
ज्योतिर्लिंग दर्शन और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होंगी राष्ट्रपति
Rashtrapati द्रौपदी मुर्मू अपने प्रवास के दौरान भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और ममलेश्वर मंदिर में विधिवत दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगी। मंदिर प्रशासन द्वारा विशेष पूजा व्यवस्था की गई है ताकि सभी धार्मिक अनुष्ठान परंपरागत रीति से संपन्न हो सकें।
भव्य आरती में शामिल होने का कार्यक्रम
शाम के समय राष्ट्रपति मंदिर परिसर में आयोजित विशेष आरती में भाग लेंगी। इस दौरान मंदिर में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। धार्मिक अनुष्ठानों को देखते हुए पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण रहेगा।
Rashtrapati का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम
Rashtrapati द्रौपदी मुर्मू का पहला दिन पूरी तरह धार्मिक गतिविधियों और विश्राम के लिए निर्धारित किया गया है।
- दोपहर 12:30 बजे: बैतूल से हेलीकॉप्टर द्वारा प्रस्थान
- लगभग 1:30 बजे: ओंकारेश्वर आगमन
- एनएचडीसी गेस्ट हाउस में विश्राम
- शाम 6:20 बजे: ओंकारेश्वर-ममलेश्वर मंदिर में दर्शन और आरती
- रात्रि विश्राम: एनएचडीसी गेस्ट हाउस
इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे और पूरे मार्ग को नियंत्रित किया जाएगा।
19 जून 2026 का कार्यक्रम
दूसरे दिन राष्ट्रपति का कार्यक्रम सामाजिक और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ा रहेगा।
- सुबह 10:00 बजे: अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के कार्यक्रम में शामिल होंगी
- कार्यक्रम स्थल: ओंकारेश्वर के निकट नोक्त थापना क्षेत्र
- मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन
- सुबह 11:30 बजे: इंदौर के लिए प्रस्थान
यह कार्यक्रम विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
सिकल सेल दिवस कार्यक्रम का महत्व
अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रपति की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से जनजातीय समुदायों में सिकल सेल रोग के प्रभाव और उसके उपचार को लेकर जागरूकता फैलाने पर केंद्रित है।
इस अवसर पर विभिन्न विशेषज्ञ, स्वास्थ्य अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। राष्ट्रपति इस कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी प्रयासों को मजबूत संदेश देंगी।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियां
Rashtrapati के दौरे को देखते हुए ओंकारेश्वर में सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत सख्त किया गया है। SPG, पुलिस बल और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम पूरे क्षेत्र में तैनात है। मंदिर परिसर, हेलीपैड और गेस्ट हाउस को विशेष सुरक्षा घेरे में रखा गया है।
ट्रैफिक और आमजन के लिए निर्देश
प्रशासन ने यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए हैं ताकि राष्ट्रपति की मूवमेंट में कोई बाधा न आए।
- 18 जून को दोपहर बाद आम दर्शन पर रोक रहेगी
- 19 जून को कुछ समय के लिए मार्ग प्रतिबंधित रहेंगे
- मोरटक्का–ओंकारेश्वर मार्ग पर यातायात पूरी तरह नियंत्रित रहेगा
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और सहयोग प्रदान करें।
38 साल बाद ऐतिहासिक वापसी
ओंकारेश्वर में इससे पहले वर्ष 1988 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकटरमण ने दर्शन किए थे। उसके बाद अब लगभग चार दशक बाद यह अवसर दोबारा आया है। इस कारण यह दौरा ऐतिहासिक माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों में इस दौरे को लेकर विशेष उत्साह है। व्यापारी, पुजारी, स्थानीय निवासी और श्रद्धालु सभी इसे गर्व का क्षण मान रहे हैं।
ओंकारेश्वर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान
ओंकारेश्वर नर्मदा नदी के तट पर स्थित एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है। यहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
राष्ट्रपति का आगमन इस धार्मिक स्थल की राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करता है।
प्रशासन की व्यापक तैयारियां
जिला प्रशासन ने मंदिर परिसर, हेलीपैड, मार्ग व्यवस्था, पार्किंग और सुरक्षा को लेकर विस्तृत योजना बनाई है। मंदिर ट्रस्ट ने दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए हैं। पुलिस बल, होमगार्ड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
निष्कर्ष
Rashtrapati द्रौपदी मुर्मू का ओंकारेश्वर दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक अवसर भी है। 38 साल बाद हो रहा यह राष्ट्रपति आगमन क्षेत्र की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक पहचान को नई ऊंचाई देगा।
ओंकारेश्वर का यह ऐतिहासिक पल आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक यादगार घटना के रूप में दर्ज रहेगा।
