राज्यसभा चुनाव 2026: Bihar में NDA का सफ़ाया, ओडिशा में क्रॉस वोटिंग का असर, हरियाणा में मतगणना विवाद के कारण रुकी
2026 के राज्यसभा चुनावों में देश के 10 राज्यों में 37 सीटों के लिए मतदान हुआ। इन चुनावों ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों की रणनीतियों और राजनीतिक समीकरणों को स्पष्ट रूप से उजागर किया। सात राज्यों में अधिकांश उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जबकि बिहार, ओडिशा और हरियाणा में प्रत्यक्ष मुकाबला देखने को मिला।
चुनाव का सारांश
असम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में चुनाव अपेक्षाकृत सरल रहे। इन राज्यों में कुल 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। लेकिन बिहार, ओडिशा और हरियाणा में 11 सीटों के लिए मतदान हुआ—बिहार में 5, ओडिशा में 4 और हरियाणा में 2 सीटों के लिए। इन राज्यों में राजनीतिक रणनीति, क्रॉस वोटिंग और मतपत्र गोपनीयता विवाद ने चुनाव प्रक्रिया को और रोचक बना दिया।
Bihar : NDA की पूर्ण जीत
Bihar के राज्यसभा चुनाव इस बार सबसे चर्चा में रहे। यहां एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला था। एनडीए ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार को मैदान में उतारा। वहीं, महागठबंधन ने अमरेंद्र धारी सिंह को उम्मीदवार बनाया।
मतदान के बाद एनडीए की रणनीति सफल रही और सभी पांच सीटें एनडीए के खाते में गईं। कुल 202 विधायक मतदान में शामिल हुए। नीतीश कुमार और नितिन नवीन को 44-44 वोट मिले, जबकि उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर को 42-42 वोट प्राप्त हुए।
पांचवीं सीट का मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। इस सीट पर एनडीए के शिवेश कुमार और महागठबंधन के अमरेंद्र धारी सिंह के बीच कड़ी टक्कर थी। पहले चरण में अमरेंद्र धारी सिंह को 37 वोट और शिवेश कुमार को 30 वोट मिले। लेकिन दूसरे चरण की मतगणना में चार महागठबंधन विधायकों ने मतदान से दूरी बनाई, जिससे शिवेश कुमार की स्थिति मजबूत हो गई। उनका कुल वोट मूल्य 4,202 तक पहुंच गया जबकि अमरेंद्र धारी सिंह केवल 3,700 पर अटक गए। इस तरह बिहार की सभी पांच सीटें NDA के खाते में चली गईं।
ओडिशा: क्रॉस वोटिंग ने बदला समीकरण
ओडिशा में चार सीटों के लिए चुनाव काफी रोचक रहा। यहां बीजू जनता दल (BJD), कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहे। क्रॉस वोटिंग ने परिणामों पर गहरा असर डाला।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और भाजपा के सुजीत कुमार जीत हासिल करने में सफल रहे। सबसे दिलचस्प जीत पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय की रही, जो भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार थे। बीजेडी और कांग्रेस के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जिससे उनकी राह आसान हो गई। बीजेडी के संतृप्त मिश्रा भी जीतने में सफल रहे।
हरियाणा: मतपत्र गोपनीयता विवाद
हरियाणा में मतपत्र गोपनीयता को लेकर विवाद ने मतगणना को कई घंटों तक रोक दिया। आरोप लगे कि कुछ विधायकों ने अपने वोट अनधिकृत लोगों को दिखाए। कांग्रेस ने भाजपा मंत्री अनिल विज के वोट को अमान्य करने की मांग की, जबकि भाजपा ने कांग्रेस विधायकों परमवीर सिंह और भरत बेनीवाल के वोट पर सवाल उठाया।
इस विवाद के कारण मतगणना लगभग पांच घंटे तक रुकी रही। चुनाव आयोग ने मामले की जांच कर फैसला सुनाया—अनिल विज और भरत बेनीवाल के वोट मान्य किए गए, जबकि परमवीर सिंह का वोट अमान्य घोषित किया गया। इसके बाद देर रात मतगणना फिर शुरू हुई। फिलहाल हरियाणा के परिणाम जारी नहीं हुए हैं।
राजनीतिक निष्कर्ष
2026 के राज्यसभा चुनाव कई महत्वपूर्ण रुझानों को उजागर करते हैं:
- सघन रणनीति का महत्व: बिहार में एनडीए की सफलता ने दिखाया कि गठबंधन की रणनीति और विधायकों की अनुशासनबद्ध मतदान प्रणाली कितनी महत्वपूर्ण होती है।
- क्रॉस वोटिंग का असर: ओडिशा में क्रॉस वोटिंग ने चुनाव परिणाम पर बड़ा प्रभाव डाला और निर्दलीय या समर्थक उम्मीदवारों की जीत आसान बनाई।
- चुनावी पारदर्शिता की चुनौती: हरियाणा में मतपत्र गोपनीयता विवाद ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की चुनौतियों को उजागर किया।
निष्कर्ष
Bihar में एनडीए की पूर्ण जीत और ओडिशा में क्रॉस वोटिंग के असर ने इस चुनाव की दिशा तय की। हरियाणा के परिणाम अभी प्रतीक्षित हैं। सात राज्यों में निर्विरोध चुने गए 26 उम्मीदवारों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट रही, लेकिन प्रमुख राज्य जैसे बिहार, ओडिशा और हरियाणा ने चुनाव में असली राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दिखाई।
ये चुनाव न केवल राज्यसभा के सदस्यों का गठन तय करते हैं बल्कि भारतीय राजनीति में गठबंधन, रणनीति और विधायकों के व्यवहार के बदलते स्वरूप को भी दर्शाते हैं। आने वाले महीनों में इन नतीजों का प्रभाव संसद की कार्यवाही और राज्यों की राजनीति पर पड़ने की संभावना है।
