भारत में स्वास्थ्य पर खर्च क्यों कम? Raghav Chadha ने उठाया सवाल, ‘वन नेशन वन मेडिकल ट्रीटमेंट’ की मांग
Raghav Chadha ने केंद्र से सवाल उठाया
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद Raghav Chadha ने 2026 के केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कम आवंटन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चड्ढा का कहना है कि यह आवंटन देश की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के लक्ष्य के बिल्कुल विपरीत है और इससे आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में बाधा आती है।
उन्होंने कहा कि भारत को “वन नेशन, वन मेडिकल ट्रीटमेंट” मॉडल की दिशा में बढ़ना चाहिए। इसका मकसद है कि देश के हर नागरिक को उनकी आय या पहचान की परवाह किए बिना समान गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा मिल सके। चड्ढा ने जोर दिया कि यह कदम सिर्फ नीति का विषय नहीं, बल्कि जीवन की प्राथमिकता का मामला है।
स्वास्थ्य बजट केवल 2% खर्च, लक्ष्य से बहुत पीछे
Raghav Chadha ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जानकारी दी कि इस साल केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। उनका कहना है कि यह आंकड़ा वास्तविक जरूरतों की तुलना में बहुत कम है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के अनुसार भारत को GDP का 2.5% स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन 2026 में यह आंकड़ा केवल 0.5% GDP के आसपास है। चड्ढा ने कहा कि इस कम निवेश के कारण देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों प्रभावित हो रही हैं।
विकसित देशों में स्वास्थ्य पर निवेश
Raghav Chadha ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए विकसित देशों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जब देश जीवन को प्राथमिकता देता है, तो वे स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूत निवेश करते हैं।
- अमेरिका स्वास्थ्य सेवाओं पर GDP का 18% खर्च करता है।
- ब्रिटेन 12%, जर्मनी 13% और स्वीडन, नीदरलैंड, डेनमार्क, जापान, स्पेन लगभग 10% GDP खर्च करते हैं।
उनका कहना था कि “क्योंकि जान है तो जहान है। जीवन की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाले देश ही अपने नागरिकों को सशक्त और स्वस्थ बना पाते हैं।”
सरकारी अस्पतालों की वर्तमान स्थिति
AAP नेता ने भारत में सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कई अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी है, डॉक्टरों पर अत्यधिक काम का बोझ है और उपकरणों व बेड की संख्या भी अपर्याप्त है।
इसके अलावा दवाओं की कमी और लंबी वेटिंग लिस्ट के कारण इलाज में देरी भी आम समस्या बन गई है। चड्ढा ने कहा कि इस कारण परिवार मजबूरी में महंगे प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेने को मजबूर हो जाते हैं। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक संकट पैदा हो जाता है।
वन नेशन, वन मेडिकल ट्रीटमेंट की आवश्यकता
Raghav Chadha ने जोर देकर कहा कि भारत को “वन नेशन, वन मेडिकल ट्रीटमेंट” मॉडल अपनाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सभी नागरिकों के लिए समान रहेगी।
इस मॉडल के तहत किसी भी व्यक्ति को उसकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। चाहे वह ग्रामीण इलाका हो या शहरी क्षेत्र, सभी को समान स्तर की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिलेगी।
संसद में उठाया मुद्दा
Raghav Chadha ने संसद में भी इस मुद्दे को उठाया और केंद्र सरकार से स्वास्थ्य बजट पर दोबारा विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश तभी स्वस्थ बन सकता है जब हर नागरिक को सुलभ और गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा मिल सके।
उनका कहना था कि बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाकर ही सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के लक्ष्यों को हासिल कर सकती है। उन्होंने इस अवसर पर स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारियों, डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ की मुश्किलों की ओर भी ध्यान खींचा।
सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव
राघव चड्ढा ने यह भी बताया कि कम स्वास्थ्य बजट केवल मरीजों को प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह पूरे देश की आर्थिक और सामाजिक संरचना पर भी असर डालता है।
- बीमारी और अस्पतालों में देरी के कारण लोगों की कामकाजी क्षमता घटती है।
- परिवार को महंगे प्राइवेट अस्पतालों की ओर जाना पड़ता है।
- स्वास्थ्य सेवाओं में असमानता बढ़ती है।
उन्होंने जोर दिया कि स्वास्थ्य में निवेश केवल खर्च नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा और विकास का निवेश है।
निष्कर्ष
Raghav Chadha का यह बयान इस बात का संकेत है कि भारत को स्वास्थ्य क्षेत्र में अपने निवेश और नीति को गंभीरता से पुनर्विचार करने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आर्थिक आंकड़े बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना आवश्यक है।
“वन नेशन, वन मेडिकल ट्रीटमेंट” मॉडल के माध्यम से भारत सभी नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकता है। Raghav Chadha ने कहा कि देश तभी स्वस्थ और सशक्त बन सकता है जब हर नागरिक की स्वास्थ्य जरूरतों का ध्यान रखा जाए और बजट आवंटन नीति के अनुरूप हो।
