हिन्दी पखवाड़े पर काव्य एवं साहित्य गोष्ठी आयोजित, रचनाओं ने बांधा समां
साहित्यकारों ने रचनाओं के माध्यम से हिन्दी की संवेदना, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को किया अभिव्यक्त
Chanderi। हिन्दी पखवाड़े के अवसर पर मध्यप्रदेश लेखक संघ, चन्देरी के तत्वावधान में स्थानीय श्री सरस्वती विद्यालय, नवीन बस स्टैंड परिसर में काव्य एवं साहित्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नगर के साहित्यकारों, कवियों और साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता करते हुए हिन्दी भाषा के प्रति अपनी भावनाओं और संवेदनाओं को विभिन्न रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया। काव्य पाठ और साहित्यिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को भावपूर्ण और साहित्यिक वातावरण से भर दिया।
मां सरस्वती की वंदना से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मध्यप्रदेश लेखक संघ के अध्यक्ष डॉ. रामदास शर्मा एवं विद्यालय के प्राचार्य जितेन्द्र कुमार पाठक ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलित करके किया। मंगलाचरण के अवसर पर श्री परमलाल परम ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की।
इसके बाद कार्यक्रम को साहित्यिक स्वरूप प्रदान करते हुए लेखक संघ के कोषाध्यक्ष डॉ. जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ राष्ट्रीय गौरव ने प्रभावी संचालन किया। उन्होंने भगवान श्री गणेश की स्तुति के साथ काव्य गोष्ठी का शुभारंभ किया। हिन्दी भाषा की महत्ता और उसके भावात्मक पक्ष को केंद्र में रखते हुए प्रस्तुत किए गए उनके गीत ने उपस्थित श्रोताओं को प्रभावित किया।

गजल प्रस्तुति ने बांधा समां
गोष्ठी में गजल गायक संतोष कुमार सिमरैया ने अपनी गजलों और चुनिंदा मिसरों की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति ने साहित्यिक आयोजन में संगीत का रंग भर दिया। गजलों के दौरान श्रोताओं ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया और प्रस्तुतियों की सराहना की।
ग्रामीण जीवन और सामाजिक सरोकारों की झलक
श्री परमलाल परम ने चुनाव के दौरान ग्रामीण अंचलों में देखे-सुने जीवन और सामाजिक परिस्थितियों को अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया। उनकी रचनाओं में गांव, ग्रामीण परिवेश, आम आदमी के जीवन और सामाजिक सरोकारों की तस्वीर दिखाई दी। सरल एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं से जोड़ने का प्रयास किया।
संघर्ष और जीवन का संदेश लेकर आए गीत
विद्यालय के प्राचार्य जितेन्द्र कुमार पाठक ने अपने चर्चित गीत “कभी पर्वत झुकें भी हैं, कभी दरिया रुकें भी हैं…” सहित अन्य रचनाओं का काव्यपाठ किया। उनकी रचनाओं में जीवन के संघर्ष, निरंतरता और मनुष्य के संकल्प को प्रमुखता से अभिव्यक्त किया गया।
उनके गीतों के माध्यम से जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों के बीच निरंतर आगे बढ़ने और संघर्ष करते रहने का संदेश उभरकर सामने आया। काव्य पाठ को उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने सराहा।
डॉ. रामदास शर्मा ने की साहित्यिक समीक्षा
गोष्ठी के समापन चरण में लेखक संघ के अध्यक्ष डॉ. रामदास शर्मा ने प्रस्तुत रचनाओं की साहित्यिक समीक्षा की। उन्होंने रचनाओं के भाव, शिल्प और सामाजिक सरोकारों पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए। इसके साथ ही उन्होंने स्वयं भी काव्यपाठ किया, जिसे श्रोताओं ने सराहा।
हिन्दी केवल भाषा नहीं, संवेदनाओं की पहचान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य जितेन्द्र कुमार पाठक ने सभी साहित्यकारों, कवियों, अतिथियों और साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
हिन्दी पखवाड़े के अवसर पर आयोजित यह गोष्ठी केवल काव्य पाठ तक सीमित नहीं रही, बल्कि हिन्दी भाषा, साहित्य, समाज और मानवीय संवेदनाओं के बीच संवाद का माध्यम बनी। साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से यह संदेश दिया कि हिन्दी केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की स्मृतियों, संस्कारों, भावनाओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने वाली महत्वपूर्ण शक्ति भी है।
