पितृपक्ष 2026 में श्राद्ध किस तिथि पर करें? नागदा के कर्मकांड विद्वानों ने मृत्यु तिथि, पूर्णिमा, चतुर्दशी और सर्वपितृ अमावस्या के श्राद्ध का शास्त्रीय विधान बताया।
पितृपक्ष 2026: मृत्यु तिथि पर श्राद्ध को प्राथमिकता, जानिए विद्वानों ने क्या बताया शास्त्रीय विधान
पूर्णिमा को मृत्यु होने पर पूर्णिमा में, अज्ञात मृत्यु के लिए रिक्त चतुर्दशी और तिथि ज्ञात न होने पर सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध
रिपोर्टर – निलेश मेहता
नागदा, नि.प्र.।
पितृपक्ष 2026 में पितरों का श्राद्ध सनातन धर्म में श्रद्धा, कृतज्ञता और पितृऋण से जुड़ा महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। वर्ष 2026 में 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध से श्राद्ध कर्म आरंभ होंगे और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या तक चलेंगे। शास्त्रीय तिथि-विधान के अनुसार जिस पितर की मृत्यु तिथि ज्ञात हो, उसके श्राद्ध में उसी तिथि को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अंत्यकर्म-श्राद्ध प्रकाश में कहा गया है— “या तिथिर्यस्य मासस्य मृताहे तु प्रवर्तते। सा तिथिः पितृपक्षे तु पूजनीया प्रयत्नतः॥” अर्थात जिस तिथि को व्यक्ति का निधन हुआ हो, पितृपक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध करने का प्रयत्न करना चाहिए। गरुड़ पुराण में भी मृतक की तिथि के आधार पर श्राद्ध-विधान का उल्लेख मिलता है।
पितृपक्ष 2026 में मृत्यु तिथि को प्राथमिकता
पंडित अजय पंड्या ने बताया कि मृत्यु तिथि अज्ञात होने पर आश्विन कृष्ण पक्ष में भरणी नक्षत्र में श्राद्ध करने का महत्व है।
पंडित दीपक पंड्या ने बताया कि श्राद्ध कर्म विधान दर्शिका ‘अंत्यकर्म-श्राद्ध प्रकाश’ पुस्तक के पृष्ठ 10 एवं 11 पर तिथि निर्णय के लिए प्रमाण अंकित है, जिसमें मृत्यु तिथि ज्ञात होने पर केवल पूर्णिमा अथवा अमावस्या को सभी पितरों का श्राद्ध करना तिथि-विधान के अनुरूप नहीं माना जाता।
प्रत्येक पितर के लिए उनकी ज्ञात मृत्यु तिथि को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि किसी पितर की मृत्यु पूर्णिमा को हुई हो तो पूर्णिमा पर श्राद्ध, अज्ञात मृत्यु के लिए रिक्त चतुर्दशी व मृत्यु तिथि ज्ञात न होने पर सर्वपितृ अमावस्या पर ही श्राद्ध करना शास्त्र सम्मत है। अन्यथा ज्ञात मृत्यु तिथि पर ही श्राद्ध को प्राथमिकता देना शास्त्रीय तिथि-विधान के अनुरूप है।
श्राद्ध कर्म को लेकर भ्रांतियां दूर करने की पहल
ब्राह्मण समाज नागदा-युवा संस्कार परिवार के संयोजक एवं ज्योतिष सलाहकार पंडित निलेश मेहता ने बताया कि श्राद्ध कर्म को लेकर जन सामान्य में कई तरह की भ्रांतियां प्रचलित हैं। इन्हें दूर करने के लिए विभिन्न कर्मकांड आचार्य एवं विद्वानों से उनके मत लिए गए।
कर्मकांड विद्वान पं. अजय पंड्या, पं. दीपक पंड्या, पं. तेज प्रसाद भट्ट और पंडित सुंदरलाल जोशी से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि श्राद्ध कर्म को लेकर भ्रम अथवा अपूर्ण जानकारी के कारण कई परिवार अपने सभी पितरों का श्राद्ध, पिंडदान व तर्पण पूर्णिमा पर करने की परंपरा अपनाते हैं।
ज्ञात मृत्यु तिथि हो तो उसी दिन करें श्राद्ध
विद्वानों के अनुसार, मृत्यु तिथि ज्ञात होने पर भी पूर्णिमा या अमावस्या को ही सभी पितरों का श्राद्ध करने का कोई शास्त्रीय आधार नहीं है। अज्ञात मृत्यु तिथि अथवा अमावस्या को मृत्यु होने की स्थिति में पितृ अमावस्या का विधान लागू होता है, जबकि अन्य मामलों में संबंधित मृत्यु तिथि को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
तिथि-क्षय या तिथि-वृद्धि जैसी विशेष स्थिति में स्थानीय पंचांग, कुलाचार एवं देशाचार के अनुसार निर्णय किया जाना चाहिए। आवश्यकता होने पर योग्य कर्मकांड आचार्य से परामर्श लिया जा सकता है।
जानकारी ब्राह्मण समाज नागदा युवा संस्कार परिवार के संयोजक निलेश मेहता ने दी।
