नई दिल्ली के राजाबाजार में धर्मसभा को संबोधित करते हुए पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने श्रद्धा, विनय, व्यवहार और सकारात्मक जीवन दृष्टि का संदेश दिया।
व्यवहार से होता है कुल-धर्म का बोध, श्रद्धा में ही है आनंद : पट्टाचार्य विशुद्धसागर गुरुदेव
राजेश जैन दद्दू
नई दिल्ली, 27 सितंबर। राजाबाजार में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति के उन्नायक पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने जीवन में अच्छे व्यवहार, श्रद्धा, विनय और सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मंदिर की घंटी की आवाज से मंदिर का बोध होता है, उसी प्रकार व्यक्ति के व्यवहार से उसके कुल, जाति और धर्म का परिचय मिलता है।
गुरुदेव ने कहा कि सरोवर के समीप पहुंचने पर शीतलता का अनुभव होता है। इसी प्रकार जिसका चित्त प्रसन्न रहता है, चेहरे पर मुस्कान होती है और जो श्रद्धा एवं विनय के भाव से युक्त होता है, वही सज्जनता के वास्तविक गुणों को धारण करता है।
विरोध नहीं, जीवन में शोध प्रारंभ करें
पट्टाचार्य विशुद्धसागर गुरुदेव ने कहा कि जहां विरोध, प्रतिकार, प्रतिस्पर्धा और कषाय के भाव होते हैं, वहां क्लेश एवं परेशानी उत्पन्न होती है। जीवन में कष्टों से बचने के लिए बड़ों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उनके प्रति श्रद्धा का भाव रखना चाहिए। उन्होंने संदेश दिया कि व्यक्ति को विरोध छोड़कर शोध की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और क्लेश के मार्ग के स्थान पर कल्याण का रास्ता अपनाना चाहिए।
श्रद्धा में आनंद और सुख
श्रद्धा के महत्व को समझाते हुए गुरुदेव ने कहा कि जीवन में परिस्थितियों को स्वीकार करने की भावना व्यक्ति को कठिन समय में भी मजबूत बनाए रखती है। गृहस्थ जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति पहले से जानता है कि जीवन में सुख और कठिनाइयां दोनों आएंगी, फिर भी वह अपने दायित्वों का निर्वहन करता है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा में आनंद और सुख का अनुभव होता है। जहां श्रद्धा होती है, वहां व्यक्ति को दूसरों की अच्छाइयां और गुण दिखाई देते हैं, जबकि श्रद्धा के अभाव में गुण भी दिखाई नहीं देते।
धर्मसभा के अंत में गुरुदेव ने आत्मचिंतन का संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अनंत आंतरिक शक्तियों से संपन्न है। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने चित्त को सकारात्मक और अनुकूल रखने का प्रयास किया जाए तो जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना बेहतर ढंग से किया जा सकता है।
