एकीकृत शासकीय विद्यालय पड़ाना में धूमधाम से मनाया श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव
धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक रंगों से सजा विद्यालय परिसर
पड़ाना। शासकीय एकीकृत मिडिल स्कूल पड़ाना में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास, उमंग और धूमधाम के साथ मनाया गया। मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में तीन दिवसीय श्रीकृष्ण उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में पड़ाना स्थित एकीकृत शासकीय विद्यालय में भी जन्माष्टमी के अवसर पर विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को लेकर विद्यालय परिसर में कई दिनों से तैयारियां की जा रही थीं। जन्माष्टमी के अवसर पर पूरे विद्यालय परिसर को रंग-बिरंगे फूलों, गुब्बारों और आकर्षक सजावट से सजाया गया। परिसर में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से संबंधित सुंदर झांकियां भी तैयार की गईं। विद्यालय का वातावरण पूरी तरह कृष्णमय नजर आया और विद्यार्थियों में पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
पूजा-अर्चना और आरती से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव की शुरुआत विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के साथ की गई। पूजा के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भगवान श्रीकृष्ण से सभी के सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को जन्माष्टमी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में भी बताया गया। शिक्षकों ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी प्रेरणादायी है। उनके जीवन से विद्यार्थियों को सत्य, कर्तव्य, साहस, प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
कृष्ण और राधा की वेशभूषा में पहुंचे नन्हे विद्यार्थी
जन्माष्टमी समारोह का सबसे आकर्षक पक्ष विद्यालय के छोटे बच्चों की पारंपरिक वेशभूषा रही। अनेक छात्र-छात्राएं भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के रूप में सजकर विद्यालय पहुंचे। नन्हे बाल गोपालों के सिर पर मोरपंख से सजे मुकुट, हाथों में बांसुरी और पारंपरिक पोशाक आकर्षण का केंद्र रहे।
वहीं, बालिकाओं ने राधा रानी की वेशभूषा धारण कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। बच्चों के चेहरे पर दिखाई दे रही खुशी और उत्साह ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया। अभिभावकों और शिक्षकों ने भी बच्चों की तैयारियों की सराहना की।
विद्यालय परिसर में बच्चों की कृष्ण और राधा के रूप में आकर्षक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इस दौरान विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास भी किया गया।
श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों पर आधारित लघु नाटक
उत्सव के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को लघु नाटकों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
विद्यार्थियों ने श्रीकृष्ण जन्म, माखन चोरी और कालिया नाग मर्दन जैसे प्रसंगों का मंचन किया। बच्चों ने अपनी अभिनय प्रतिभा के माध्यम से इन घटनाओं को जीवंत रूप देने का प्रयास किया। प्रस्तुतियों के दौरान विद्यालय परिसर में मौजूद विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने बच्चों का उत्साह बढ़ाया।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संघर्षों से परिचित कराना भी था। शिक्षकों ने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, मंचीय प्रस्तुति और टीम भावना विकसित होती है।
भजनों और गरबा पर छात्राओं ने दी शानदार प्रस्तुति
जन्माष्टमी समारोह में छात्राओं ने भक्ति गीतों और पारंपरिक गरबा धुनों पर सामूहिक नृत्य की प्रस्तुति दी। ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’ जैसे भक्ति गीतों पर विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।
छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में गरबा प्रस्तुत कर कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया। उनकी सामूहिक प्रस्तुति को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। नृत्य और संगीत के माध्यम से बच्चों ने भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
विद्यार्थियों को बताया निष्काम कर्मयोग का महत्व
कार्यक्रम के दौरान प्रधानाध्यापक शंकरलाल भिलाला, शिक्षिका अनीता सक्सेना और शिक्षक रामकरण राठौर ने विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद्गीता के संदेशों से अवगत कराया।
उन्होंने विशेष रूप से निष्काम कर्मयोग के महत्व को समझाया। विद्यार्थियों को बताया गया कि व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए और परिणाम की चिंता किए बिना अच्छे कर्म करते रहना चाहिए।
शिक्षकों ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाएं आज भी विद्यार्थियों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यदि बच्चे बचपन से ही सत्य, अनुशासन, कर्तव्य और अच्छे कर्मों का महत्व समझेंगे, तो वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।
दही हांडी प्रतियोगिता बनी मुख्य आकर्षण
कार्यक्रम का सबसे रोमांचक और आकर्षक हिस्सा मटकी फोड़ दही हांडी प्रतियोगिता रहा। विद्यालय के मैदान में एक रंगीन मटकी को ऊंचाई पर बांधा गया। इसके बाद विद्यार्थियों की टोलियों ने मटकी फोड़ने के लिए मानव पिरामिड बनाया।
बाल गोपालों की तरह विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और जोश के साथ दही हांडी प्रतियोगिता में भाग लिया। एक-दूसरे के सहयोग से विद्यार्थियों ने मानव पिरामिड तैयार किया और आखिरकार मटकी फोड़ने में सफलता हासिल की।
मटकी फूटते ही पूरा विद्यालय परिसर ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ और ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। विद्यार्थियों में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला।
राधा-कृष्ण की झांकी रही आकर्षण का केंद्र
विद्यालय में तैयार की गई राधा-कृष्ण की झांकी भी समारोह का विशेष आकर्षण रही। विद्यालय संस्था के अध्यक्ष जीवन टेलर ने झांकी सजाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। झांकी को फूलों और अन्य सजावटी सामग्री से आकर्षक रूप दिया गया।
झांकी के माध्यम से विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण और राधा के जीवन एवं भारतीय धार्मिक परंपराओं से परिचित कराने का प्रयास किया गया। विद्यार्थियों ने झांकी के सामने भगवान श्रीकृष्ण के भजनों और जयकारों के साथ उत्सव का आनंद लिया।
माखन-मिश्री और पंचामृत का प्रसाद वितरित
समारोह के समापन पर भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय माखन-मिश्री, पंचामृत और मिठाइयों का भोग लगाया गया। पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद का वितरण किया गया।
विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों और उपस्थित अभिभावकों के बीच प्रसाद बांटा गया। सभी ने एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान विद्यालय परिसर में धार्मिक सौहार्द और उत्सव का माहौल बना रहा।
श्रीकृष्ण के आदर्शों पर चलने का दिया संदेश
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाध्यापक शंकरलाल भिलाला सहित विद्यालय के शिक्षकों ने विद्यार्थियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बच्चों से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेने और हमेशा सत्य तथा धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
शिक्षकों ने कहा कि जन्माष्टमी जैसे आयोजनों से बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता की भावना भी विकसित करते हैं।
इस अवसर पर शिक्षक रामकरण राठौर, मोहम्मद सोहेल अंसारी, मोहम्मद तारीक अंसारी, राधेश्याम शर्मा, राजाराम भारतीय, अनीता सक्सेना, विशाल भिलाला सहित विद्यालय के विद्यार्थी, शिक्षक और अन्य उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बना और विद्यालय परिसर दिनभर कृष्ण भक्ति एवं सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर रहा।
