—Advertisement—

नीमच के आदित्य जैन ‘रामायणी सम्मान-2026’ के लिए चयनित, 19 अगस्त को BHU में होगा सम्मान

Author Picture
Published On: 8 August 2026
Neemuch academician Aditya Jain selected for the prestigious Ramayani Samman 2026 for his contributions to research, teaching, writing and Indian knowledge traditions
— Neemuch academician Aditya Jain selected for the prestigious Ramayani Samman 2026 for his contributions to research, teaching, writing and Indian knowledge traditions

—Advertisement—

नीमच के आदित्य जैन ‘रामायणी सम्मान-2026’ के लिए चयनित, 19 अगस्त को BHU में होगा सम्मान

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में 15 वर्षों के अध्यापन, शोध और मौलिक लेखन के योगदान के लिए मिला राष्ट्रीय स्तर का सम्मान

रिपोर्टर: मनोज जैन नायक

मुरैना।  ज्ञानोदय विश्वविद्यालय, नीमच के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दे रहे आदित्य जैन का चयन प्रतिष्ठित ‘रामायणी सम्मान-2026’ के लिए किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रदान किए जाने वाले इस सम्मान के लिए देशभर से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों का चयन किया गया है।

आदित्य जैन को यह सम्मान 19 अगस्त 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाएगा। यह कार्यक्रम रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर भारतीय अध्ययन केंद्र के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

सात श्रेणियों में 28 विभूतियों का चयन

रामायण रिसर्च बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष एवं सांसद अजय भट्ट के अनुसार इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली कुल 28 विभूतियों का चयन सात अलग-अलग श्रेणियों में किया गया है।

इसी क्रम में नीमच के आदित्य जैन का चयन पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में उनके लंबे समय से किए जा रहे कार्यों के लिए किया गया है। चयन समिति के अनुसार उन्होंने पिछले करीब 15 वर्षों से अध्यापन, शोध और मौलिक लेखन के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा, जीवन मूल्यों और नैतिक एवं मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

यह उपलब्धि नीमच के शैक्षणिक और साहित्यिक क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों पर किया कार्य

आदित्य जैन का अकादमिक कार्य केवल पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, अध्यात्म, जीवन मूल्यों, चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास और सामाजिक जागरण जैसे विभिन्न विषयों पर अध्ययन एवं शोध कार्य किया है।

उनके लेखन में भारतीय संस्कृति और जीवन दर्शन से जुड़े विषयों को आधुनिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास दिखाई देता है। उनके शोध और मौलिक लेखों के माध्यम से विद्यार्थियों और पाठकों को भारतीय ज्ञान परंपरा तथा नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध पत्र प्रस्तुत किए

आदित्य जैन के कई शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा वे देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों द्वारा आयोजित 35 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार और कॉन्फ्रेंस में अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं।

उनके शोध कार्यों के विषयों में अध्यात्म, विज्ञान, चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक महत्व जैसे विविध क्षेत्र शामिल रहे हैं।

शैक्षणिक क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहते हुए उन्होंने शोध और अध्यापन को सामाजिक एवं सांस्कृतिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास किया है।

‘सृजन’ पुस्तक में जीवन मूल्यों का संकलन

आदित्य जैन के साहित्यिक एवं मौलिक लेखन की बात करें तो उन्होंने जीवन मूल्यों पर आधारित आचार्य श्री तुलसी के विचारों का संकलन करते हुए ‘सृजन’ नामक पुस्तक का लेखन किया है।

इस पुस्तक में जीवन को बेहतर बनाने वाले नैतिक एवं मानवीय मूल्यों से जुड़े विचारों को केंद्र में रखा गया है। पुस्तक को साहित्य और दर्शन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कृति के रूप में देखा गया है।

‘सृजन’ के प्रकाशन के अवसर पर देश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने आदित्य जैन को शुभकामनाएं भी प्रेषित की थीं। पुस्तक के माध्यम से जीवन मूल्यों, सकारात्मक सोच और सामाजिक चेतना से जुड़े विचारों को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

सामाजिक और साहित्यिक योगदान के लिए पहले भी हो चुके हैं सम्मानित

आदित्य जैन को उनके लेखन और सामाजिक-साहित्यिक योगदान के लिए इससे पहले भी सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

समाचार पत्रों में प्रकाशित उनके मौलिक आलेखों तथा सामाजिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में उनके योगदान का मूल्यांकन करते हुए जिला प्रशासन द्वारा वर्ष 2022 में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह में उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

इससे पहले मिले सम्मान और अब राष्ट्रीय स्तर के ‘रामायणी सम्मान-2026’ के लिए चयन को उनके शैक्षणिक, साहित्यिक और सामाजिक योगदान की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

19 अगस्त को BHU में होगा सम्मान समारोह

‘रामायणी सम्मान-2026’ का मुख्य समारोह 19 अगस्त 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में आयोजित किया जाएगा। गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाला यह समारोह भारतीय संस्कृति, रामायण अध्ययन और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है।

रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा भारतीय अध्ययन केंद्र के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में चयनित विभूतियों को उनके संबंधित क्षेत्रों में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया जाएगा।

इसी समारोह में आदित्य जैन को पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ‘रामायणी सम्मान-2026’ प्रदान किया जाएगा।

सम्मान के संयोजक हैं सेवानिवृत्त IAS डॉ. देवदत्त शर्मा

इस राष्ट्रीय सम्मान समारोह के संयोजक सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. देवदत्त शर्मा हैं। सम्मान के लिए विभिन्न क्षेत्रों से चयनित विभूतियों के कार्यों का मूल्यांकन किया गया है।

आदित्य जैन का चयन भी उनके लंबे अकादमिक अनुभव, शोध कार्य, मौलिक लेखन और सामाजिक-साहित्यिक योगदान को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

नीमच के लिए भी गौरव का अवसर

आदित्य जैन के राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मान के लिए चयन से नीमच के शैक्षणिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी उत्साह का माहौल है। स्थानीय स्तर पर इसे जिले के लिए गौरव की उपलब्धि माना जा रहा है।

शिक्षा, शोध और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले आदित्य जैन ने पिछले 15 वर्षों के दौरान विभिन्न विषयों पर काम किया है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शोध पत्र प्रस्तुत करने के साथ-साथ उन्होंने मौलिक लेखन के माध्यम से सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों को भी सामने रखा है।

भारतीय मूल्यों को अकादमिक कार्य से जोड़ने का प्रयास

आदित्य जैन के कार्यों की एक विशेषता भारतीय जीवन मूल्यों और आधुनिक शिक्षा के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास रही है। उनके शोध और लेखन में चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास, सामाजिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है।

‘रामायणी सम्मान-2026’ के लिए उनका चयन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अकादमिक एवं साहित्यिक क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा और नैतिक मूल्यों से जुड़े कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्व दिया जा रहा है।

सम्मान की घोषणा से शुभकामनाओं का दौर

आदित्य जैन के ‘रामायणी सम्मान-2026’ के लिए चयन की जानकारी सामने आने के बाद उनके शुभचिंतकों, सहकर्मियों और शिक्षा एवं साहित्य जगत से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल है।

लोगों ने उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला यह सम्मान उन्हें भविष्य में भी शोध, अध्यापन और मौलिक लेखन के क्षेत्र में निरंतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।

निष्कर्ष

ज्ञानोदय विश्वविद्यालय, नीमच के सहायक प्राध्यापक आदित्य जैन का ‘रामायणी सम्मान-2026’ के लिए चयन शिक्षा, शोध, साहित्य और सामाजिक मूल्यों के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को मिली राष्ट्रीय पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

15 वर्षों के अध्यापन एवं शोध अनुभव, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 35 से अधिक सेमिनार और कॉन्फ्रेंस में शोध पत्र प्रस्तुत करने तथा ‘सृजन’ जैसी पुस्तक के लेखन के साथ उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों को अपने अकादमिक एवं साहित्यिक कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया है।

अब 19 अगस्त 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जाएगा। उनकी यह उपलब्धि नीमच के साथ-साथ शिक्षा और साहित्य जगत के लिए भी गौरव का विषय है।

 

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp