भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम
आठनेर। शासकीय महाविद्यालय आठनेर में 3 अगस्त 2026 को भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत महान वैज्ञानिक आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय की जयंती एवं राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस का आयोजन उत्साह और गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत की वैज्ञानिक विरासत, महान वैज्ञानिकों के योगदान और रसायन विज्ञान के महत्व से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज पाटिल एवं डॉ. वर्जिनिया दवंडे के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार के सदस्यों एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. वर्जिनिया दवंडे द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात उपस्थित अतिथियों एवं विद्यार्थियों ने आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया।
आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय के जीवन और उपलब्धियों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में डॉ. गजानन ठाकरे ने अपने व्याख्यान के माध्यम से आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय के जीवन, वैज्ञानिक उपलब्धियों और समाज के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय का जन्म 2 अगस्त 1861 को बंगाल के खुलना जिले के रारुली कातिपारा गांव में हुआ था। वे भारत के महान रसायन वैज्ञानिकों में से एक थे, जिन्होंने अपने शोध कार्यों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम गौरवान्वित किया।
डॉ. ठाकरे ने बताया कि आचार्य राय ने वर्ष 1895 में मरक्यूरस नाइट्राइट नामक अकार्बनिक यौगिक की खोज की थी। यह खोज रसायन विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसके कारण उन्हें विश्व स्तर पर पहचान मिली।
उन्होंने कहा कि आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय केवल वैज्ञानिक ही नहीं थे, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण की भावना से प्रेरित समाजसेवी भी थे। उन्होंने भारत में स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 1901 में बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स कंपनी की स्थापना की, जो देश की पहली स्वदेशी फार्मास्यूटिकल कंपनी के रूप में जानी जाती है।

विज्ञान और आत्मनिर्भरता के प्रेरणास्रोत थे आचार्य राय
वक्ताओं ने कहा कि आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय का पूरा जीवन विज्ञान, शिक्षा और समाज सेवा को समर्पित रहा। उन्होंने भारतीय युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और शोध के प्रति रुचि बढ़ाने का कार्य किया।
उनका मानना था कि किसी भी देश की प्रगति के लिए विज्ञान और तकनीक का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों को शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और स्वदेशी उद्योगों की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में बताया गया कि आचार्य राय का जीवन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी मेहनत, लगन और देश के प्रति समर्पण आज भी युवाओं को नई दिशा प्रदान करता है।

विद्यार्थियों को दी गई वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा
राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को विज्ञान के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। शिक्षकों ने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नए शोध, नवाचार और संभावनाओं के बारे में बताया गया। साथ ही उन्हें वैज्ञानिक सोच विकसित करने और समाज हित में विज्ञान के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।
महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी करते हुए आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को जाना। विद्यार्थियों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम उन्हें देश के महान वैज्ञानिकों के योगदान को समझने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

महाविद्यालय स्टाफ की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रभारी प्रोफेसर हरिकिशन कोगे, प्रोफेसर माधुरी तुम्बेकर, प्रोफेसर डॉ. पिंहासदास वाडिवा, डॉ. निलेश धुर्वे, प्रोफेसर आशीष कुमार धोटे सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रोफेसर प्रमोद गायकवाड द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी अतिथियों और विद्यार्थियों को जोड़े रखा तथा आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय के वैज्ञानिक योगदान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुरेंद्र जीतपुर ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक चेतना और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति सम्मान बढ़ाने में सहायक होते हैं।

भारतीय वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस के आयोजन के माध्यम से महाविद्यालय में उपस्थित सभी लोगों ने भारत की वैज्ञानिक परंपरा को आगे बढ़ाने और विज्ञान के क्षेत्र में नए प्रयास करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि ज्ञान, शोध और नवाचार के माध्यम से समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय का जीवन इस बात का प्रमाण है कि समर्पण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
शासकीय महाविद्यालय आठनेर में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हुआ, जिसमें भारतीय विज्ञान के गौरवशाली इतिहास और महान वैज्ञानिक के योगदान को सम्मानपूर्वक याद किया गया।
