निर्जला ग्यारस Nagda के अवसर पर किराना व्यापारी महिला मंडल ने गोपाल गोशाला में गौसेवा, गुड़-खली-चारा वितरण, भजन, आरती और फलाहारी प्रसादी का आयोजन किया। पढ़ें पूरी खबर।
निर्जला ग्यारस Nagda: किराना व्यापारी महिला मंडल द्वारा उपवास के साथ गौसेवा एवं प्रसादी वितरण का आयोजन
निर्जला ग्यारस Nagda: गौसेवा के साथ मनाया गया पावन पर्व
Nagda। निर्जला ग्यारस नागदा के पावन अवसर पर किराना व्यापारी महिला मंडल द्वारा स्थानीय पाल्या रोड स्थित गोपाल गोशाला में श्रद्धा एवं सेवा भाव के साथ धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिला मंडल की सदस्यों ने निर्जला उपवास रखते हुए गोशाला में मौजूद मूक पशुओं को गुड़, खली एवं हरा चारा खिलाकर गौसेवा की।इसके बाद गोशाला परिसर स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के भजनों का संगीतमय गायन किया। भजन के पश्चात भगवान की विधिवत आरती संपन्न हुई।
गोपाल गोशाला में गौसेवा बनी मुख्य आकर्षण
निर्जला ग्यारस Nagda के अवसर पर महिला मंडल की ओर से गोशाला में गायों को गुड़, खली एवं चारा वितरित कर गौसेवा की गई। महिला मंडल का कहना है कि गौसेवा भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और धार्मिक पर्वों पर इसका विशेष महत्व माना जाता है।
राधा-कृष्ण मंदिर में हुआ भजन एवं आरती
गोपाल गोशाला स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भजन प्रस्तुत किए। इसके बाद भगवान श्री राधा-कृष्ण की सामूहिक आरती की गई। पूरे वातावरण में भक्तिमय माहौल बना रहा।
श्रद्धालुओं को वितरित की गई फलाहारी खिचड़ी एवं ठंडाई
आरती के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं को फलाहारी खिचड़ी एवं ठंडाई का वितरण किया गया। महिला मंडल की ओर से सभी श्रद्धालुओं को प्रसादी ग्रहण कराई गई।
निर्जला ग्यारस का धार्मिक महत्व
इस अवसर पर किराना व्यापारी महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती प्रीति पोरवाल एवं मंजूबाला पोरवाल ने बताया कि निर्जला ग्यारस का हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
उन्होंने बताया कि यह व्रत सभी पापों के नाश एवं मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन बिना अन्न एवं जल ग्रहण किए व्रत रखने से वर्ष भर आने वाली सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
महाभारत काल में पांडु पुत्र भीम को भूख और प्यास सहन नहीं होती थी, लेकिन वे एकादशी व्रत का पुण्य भी प्राप्त करना चाहते थे। तब महर्षि व्यास ने उन्हें ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर निर्जल उपवास रखने की सलाह दी। भीम द्वारा इस व्रत को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।
कार्यक्रम में रही इनकी उपस्थिति
कार्यक्रम में किराना व्यापारी महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती प्रीति पोरवाल, मंजूबाला पोरवाल, रीमा पोरवाल, रेखा जैन, किरण राठौर, पुष्पा रघुवंशी, मोनिका सोलंकी, वंदना पोरवाल, रूपाली पोरवाल, सीमा पोरवाल, संगीता पोरवाल, पिंकी पोरवाल सहित महिला मंडल की अनेक सदस्य उपस्थित रहीं।
रिपोर्टर
रिपोर्ट: जीवनलाल जैन, Nagda
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