मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज प्रवचन में इंदौर के दलाल बाग स्थित विद्या सुधा सत्संग मंडप में सुख, दुख, मुस्कान, सद्भाव और जीवन के आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रेरणादायी संदेश दिया। पढ़ें पूरी खबर।
मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज प्रवचन: दुख में भी मुस्कुराने का संदेश, अभाव में सद्भाव अपनाने की सीख
इंदौर। यदि जीवन में सच्चा सुख पाना चाहते हैं तो अभाव में सद्भाव और दुख में भी सुख का आनंद लेना सीखिए। यही जीवन को सफल और आनंदमय बनाने का सबसे बड़ा मंत्र है। यह प्रेरणादायी संदेश जगत पूज्य तीर्थचक्रवर्ती मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने शुक्रवार को इंदौर के दलाल बाग स्थित विद्या सुधा सत्संग मंडप में आयोजित विशाल धर्मसभा में अपने प्रवचन के दौरान दिया।धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनिश्री के प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
दुख में मुस्कुराने का संदेश
मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि भरे पेट तो पूरी दुनिया हंसती है, लेकिन जो भूखा रहकर भी मुस्कुराता है वही सच्चा तपस्वी होता है।उन्होंने कहा कि तपस्वी व्यक्ति अभाव और कठिन परिस्थितियों में भी अपनी मुस्कान नहीं खोता। यदि मनुष्य दुख में भी सुख ढूंढना सीख जाए और अभाव में भी सद्भाव बनाए रखे, तो उसी दिन से उसका जीवन आनंदमय बनने लगता है।
भगवान के सामने दुख नहीं, सुख की कहानी सुनाओ
प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने कहा कि आज अधिकांश लोग अपने दुखों की चर्चा अधिक करते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी भगवान के दरबार में जाओ तो अपने सुख और कृतज्ञता की बात करो।उन्होंने कहा—
“भगवान के सामने दुख की कहानी नहीं, सुख की कहानी सुनाओ ताकि भगवान भी दुखी न हों।”
आंसुओं पर मुनिश्री का प्रेरक संदेश
मुनिश्री ने भावुक होकर रोने की प्रवृत्ति पर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया।उन्होंने कहा—
“स्त्री का शस्त्र आंसू है और पुरुष का शस्त्र तलवार।”
साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि—
- अपनी पीड़ा पर निकले आंसू जहर के समान हैं।
- दूसरों के दुख को देखकर निकले आंसू मोती के समान हैं।
उन्होंने कहा कि किसी के सामने रोकर उसकी दया का पात्र बनने से बेहतर है कि व्यक्ति आत्मबल विकसित करे।
मुस्कान कभी मत खोना
मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि आंखों में आंसू आ जाना स्वाभाविक है, लेकिन होठों की मुस्कान कभी नहीं जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और धर्म का मार्ग मनुष्य को हर कठिन परिस्थिति से बाहर निकाल सकता है।
धर्मसभा में समाजजन रहे उपस्थित
इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
- राहुल सेठी
- आकाश कोल
- आनंद गोधा
- कमल जैन चेलेजर
- विपुल बाझलं
- श्रीमती साधना दगडे
- श्रीमती मुक्ता जैन
- श्रीमती सोनाली बागढ़िया
सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजश्रेष्ठी मौजूद रहे।
निष्कर्ष
मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज का यह संदेश केवल धार्मिक प्रवचन नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। यदि व्यक्ति अभाव में सद्भाव और दुख में भी मुस्कुराना सीख ले, तो जीवन की अधिकांश परेशानियां स्वतः छोटी लगने लगती हैं।
