MP News: बीएड शिक्षकों की सैलरी रोकी गई, ब्रिज कोर्स में देरी से बढ़ी परेशानी; प्रोबेशन पीरियड बढ़ाने का विरोध
भोपाल। MP के कई जिलों में कार्यरत बीएडधारी प्राथमिक शिक्षकों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। शिक्षकों का आरोप है कि बिना किसी गलती के उन्हें आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई जिलों में उनकी सैलरी रोक दी गई है, जबकि दूसरी ओर ब्रिज कोर्स शुरू होने का इंतजार भी करीब 10 महीने से जारी है।
बीएडधारी शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत नौकरी ज्वाइन की और लगातार स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद वेतन रोकना और प्रोबेशन पीरियड बढ़ाने जैसे फैसलों से हजारों शिक्षकों में नाराजगी है।
कई जिलों में रोका गया वेतन
MP बीएड शिक्षकों के अनुसार प्रदेश के कुछ जिलों में समान पद पर नियुक्त बीएडधारी शिक्षकों को नियमित रूप से पूरा वेतन दिया जा रहा है, जबकि कई अन्य जिलों में उनकी सैलरी रोक दी गई है।
शिक्षकों का कहना है कि जब नियुक्ति प्रक्रिया, पद और जिम्मेदारियां समान हैं, तो अलग-अलग जिलों में अलग-अलग नियम क्यों लागू किए जा रहे हैं। इस असमानता के कारण शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रदेश में सभी बीएडधारी प्राथमिक शिक्षकों के लिए एक समान आदेश जारी किया जाए और लंबित वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए।
फीस जमा होने के बाद भी शुरू नहीं हुआ ब्रिज कोर्स
बीएडधारी शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता ब्रिज कोर्स को लेकर है। शिक्षकों का कहना है कि ब्रिज कोर्स के लिए उनसे फीस ली जा चुकी है, लेकिन अभी तक प्रशिक्षण शुरू नहीं किया गया है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 10 हजार 579 बीएडधारी शिक्षकों से ब्रिज कोर्स के लिए 25-25 हजार रुपये शुल्क लिया गया था। इनमें से 10 हजार 521 शिक्षकों के आवेदन राज्य के नोडल अधिकारी द्वारा स्वीकृत भी किए जा चुके हैं।
इसके बावजूद लगभग 10 महीने बीत जाने के बाद भी ब्रिज कोर्स की शुरुआत नहीं हो पाई है। शिक्षकों का कहना है कि ब्रिज कोर्स शुरू करने में देरी संबंधित संस्थाओं की वजह से हुई है, जिसका खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है।
शिक्षकों ने बताया अपनी स्थिति
बीएड शिक्षकों का कहना है कि वे नियमित रूप से स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। शिक्षण कार्य के अलावा सरकार की ओर से दिए जाने वाले अन्य दायित्वों को भी वे पूरी जिम्मेदारी से निभा रहे हैं।
शिक्षकों ने बताया कि चुनाव ड्यूटी, जनगणना और शिक्षा विभाग से जुड़े अन्य सरकारी कार्यों में भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई है। इसके बावजूद उनकी सेवाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और कई जिलों में उनका प्रोबेशन पीरियड बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
प्रोबेशन पीरियड बढ़ाने का विरोध
MP बीएडधारी प्राथमिक शिक्षकों का कहना है कि प्रोबेशन पीरियड बढ़ाना उनके साथ अन्याय है। उनका कहना है कि जब वे लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं और विभागीय जिम्मेदारियां पूरी कर रहे हैं, तो केवल ब्रिज कोर्स में देरी के कारण उनके सेवा काल को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि प्रोबेशन पीरियड बढ़ाने के फैसले को वापस लिया जाए और शिक्षकों को पहले की व्यवस्था के अनुसार लाभ दिया जाए।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
बीएडधारी प्राथमिक शिक्षकों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं।
- सभी बीएडधारी प्राथमिक शिक्षकों का 100 प्रतिशत वेतन तुरंत जारी किया जाए।
- प्रोबेशन पीरियड बढ़ाने के निर्णय को वापस लिया जाए।
- ब्रिज कोर्स जल्द शुरू किया जाए और इसकी स्पष्ट समय सीमा तय की जाए।
- पूरे प्रदेश में सभी जिलों के लिए एक समान आदेश लागू किया जाए।
- विभागीय या संस्थागत देरी का नुकसान शिक्षकों को न उठाना पड़े।
शिक्षा विभाग और संस्थाओं से समाधान की मांग
शिक्षकों का कहना है कि ब्रिज कोर्स शुरू कराने की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) जैसी संस्थाओं की है।
यदि इन संस्थाओं की प्रक्रिया में देरी हुई है, तो इसका असर शिक्षकों की नौकरी और वेतन पर नहीं पड़ना चाहिए। शिक्षकों ने मध्यप्रदेश सरकार, शिक्षा मंत्रालय, NCTE और NIOS से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
हजारों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा मामला
MP बीएड शिक्षकों का कहना है कि यह सिर्फ वेतन का मामला नहीं है, बल्कि हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। लंबे समय तक वेतन रुकने और सेवा संबंधी अनिश्चितता से आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं।
शिक्षकों को उम्मीद है कि सरकार जल्द इस मामले में निर्णय लेकर राहत प्रदान करेगी। अब सभी की नजरें सरकार और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
