सीएम कार्यक्रम के बाद बदहाल हुआ शासकीय महाविद्यालय का खेल मैदान, विधायक वीरसिंह भूरिया ने जताई नाराजगी
कलेक्टर को पत्र लिखकर मैदान की सफाई, समतलीकरण और क्षतिग्रस्त बाउंड्रीवाल के पुनर्निर्माण की मांग, खेल गतिविधियां हुईं प्रभावित
संवाददाता : जीवनलाल जैन
थांदला (झाबुआ)। मुख्यमंत्री के स्व-सहायता समूह सम्मेलन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद अब थांदला का शासकीय महाविद्यालय एक नई समस्या से जूझ रहा है। 31 जुलाई को आयोजित इस बड़े सरकारी कार्यक्रम के लिए महाविद्यालय के खेल मैदान का उपयोग किया गया था, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के कई दिन बाद भी मैदान अपनी मूल स्थिति में नहीं लौट पाया है। मैदान में जगह-जगह गड्ढे, अस्थायी ढांचों के अवशेष, भारी वाहनों की आवाजाही से क्षतिग्रस्त सतह और सफाई का अभाव अब विद्यार्थियों और खिलाड़ियों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
इस स्थिति पर क्षेत्रीय विधायक वीरसिंह भूरिया ने नाराजगी व्यक्त करते हुए झाबुआ कलेक्टर को पत्र लिखकर तत्काल मैदान की सफाई, समतलीकरण और क्षतिग्रस्त बाउंड्रीवाल के पुनर्निर्माण की मांग की है। विधायक का कहना है कि सरकारी कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सार्वजनिक संपत्तियों को पूर्व स्थिति में लाना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है, ताकि आम नागरिकों और विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बाद मैदान की बिगड़ी स्थिति
31 जुलाई को आयोजित मुख्यमंत्री के स्व-सहायता समूह सम्मेलन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही थी। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए महाविद्यालय परिसर में विशाल स्तर पर तैयारियां की गई थीं।
मैदान में बड़े-बड़े डोम लगाए गए, मंच तैयार किया गया तथा वाहनों की आवाजाही के लिए अस्थायी व्यवस्थाएं की गईं। आयोजन के दौरान भारी वाहनों और मशीनों के प्रवेश के कारण खेल मैदान की सतह कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई।
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मैदान की समुचित सफाई और मरम्मत नहीं होने से उसकी स्थिति लगातार खराब बनी हुई है।
विधायक वीरसिंह भूरिया ने कलेक्टर को लिखा पत्र
क्षेत्रीय विधायक वीरसिंह भूरिया ने 7 अगस्त को झाबुआ कलेक्टर को पत्र भेजकर पूरे मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने पत्र में लिखा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बाद खेल मैदान की सफाई नहीं होने से विद्यार्थियों और खिलाड़ियों में असंतोष व्याप्त है।
उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि नगर परिषद को तत्काल निर्देश देकर मैदान की साफ-सफाई कराई जाए तथा उसे पुनः खेल गतिविधियों के योग्य बनाया जाए।
विधायक ने यह भी कहा कि यदि समय रहते मैदान की मरम्मत नहीं हुई तो विद्यार्थियों की नियमित खेल गतिविधियां लंबे समय तक प्रभावित रहेंगी।
महाविद्यालय प्रशासन ने भी उठाई आवाज
केवल जनप्रतिनिधियों ने ही नहीं, बल्कि शासकीय महाविद्यालय प्रशासन ने भी इस समस्या को गंभीरता से उठाया है।
महाविद्यालय के प्राचार्य ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को पत्र लिखकर मैदान की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री कार्यक्रम के दौरान मैदान में तीन बड़े डोम स्थापित किए गए थे। इन डोमों की स्थापना और जल निकासी व्यवस्था के लिए मैदान में कई स्थानों पर नालियां खोदी गई थीं।
कार्यक्रम के बाद इन गड्ढों और नालियों को समतल नहीं किया गया, जिसके कारण पूरा मैदान ऊबड़-खाबड़ हो गया है।
खेल गतिविधियों पर पड़ा सीधा असर
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार खेल मैदान विद्यार्थियों के लिए नियमित खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है।
लेकिन वर्तमान स्थिति में मैदान पर दौड़ना, अभ्यास करना या किसी भी प्रकार की खेल प्रतियोगिता आयोजित करना कठिन हो गया है।
उबड़-खाबड़ मैदान खिलाड़ियों के लिए दुर्घटना का कारण भी बन सकता है।
कॉलेज के विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें नियमित अभ्यास के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं और खेल गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं।
20 फीट लंबी बाउंड्रीवाल भी हुई क्षतिग्रस्त
महाविद्यालय प्राचार्य द्वारा भेजे गए पत्र में केवल मैदान की खराब स्थिति का ही उल्लेख नहीं किया गया, बल्कि परिसर की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं।
पत्र के अनुसार कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय परिसर की लगभग 20 फीट लंबी बाउंड्रीवाल दो अलग-अलग स्थानों से क्षतिग्रस्त हो गई है।
प्राचार्य ने लिखा कि बाउंड्रीवाल का शीघ्र पुनर्निर्माण आवश्यक है, क्योंकि इससे महाविद्यालय परिसर की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने लोक निर्माण विभाग से जल्द मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है।
थांदला में पहले से ही खेल मैदानों की कमी
स्थानीय लोगों का कहना है कि थांदला क्षेत्र में पहले से ही पर्याप्त खेल मैदान उपलब्ध नहीं हैं।
दशहरा मैदान की सीमित उपयोगिता और अन्य खेल संसाधनों के अभाव में शासकीय महाविद्यालय का मैदान ही विद्यार्थियों और युवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण खेल स्थल माना जाता है।
यही कारण है कि मैदान की वर्तमान स्थिति को लेकर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में चिंता बढ़ गई है।
यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो आगामी खेल गतिविधियां और प्रतियोगिताएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
खिलाड़ियों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
मैदान की बदहाल स्थिति को लेकर विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों में भी नाराजगी देखी जा रही है।
खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें नियमित अभ्यास के लिए सुरक्षित मैदान उपलब्ध होना चाहिए।
अभिभावकों का भी मानना है कि सरकारी कार्यक्रमों के लिए यदि शैक्षणिक संस्थानों के खेल मैदानों का उपयोग किया जाता है तो कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्हें तुरंत पूर्व स्थिति में बहाल किया जाना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों ने उठाई जिम्मेदारी तय करने की मांग

विधायक प्रतिनिधि वीरेंद्र बारिया, शहर कांग्रेस अध्यक्ष आनंद चौहान तथा सरपंच रमेश भाबर ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि बड़े सरकारी आयोजनों के बाद सार्वजनिक परिसंपत्तियों की मरम्मत और पुनर्स्थापना की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए।
यदि कार्यक्रमों के कारण खेल मैदान, सड़कें या अन्य सार्वजनिक संपत्तियां क्षतिग्रस्त होती हैं, तो संबंधित विभागों को तुरंत उनकी मरम्मत करानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
विद्यार्थियों ने जल्द कार्रवाई की मांग की
महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी प्रशासन से मैदान को जल्द से जल्द पूर्व स्थिति में लाने की मांग की है।
उनका कहना है कि नियमित खेल गतिविधियां शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और एक सुरक्षित खेल मैदान उनकी मूल आवश्यकता है।
विद्यार्थियों ने प्रशासन से अनुरोध किया कि मैदान का समतलीकरण, सफाई और मरम्मत जल्द पूरी कराई जाए ताकि वे पुनः खेल अभ्यास शुरू कर सकें।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

विधायक वीरसिंह भूरिया के पत्र और महाविद्यालय प्रशासन द्वारा लोक निर्माण विभाग को भेजे गए पत्र के बाद अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं।
क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन शीघ्र ही मैदान का निरीक्षण कर सफाई, समतलीकरण और बाउंड्रीवाल निर्माण का कार्य शुरू करेगा।
यदि समय रहते आवश्यक सुधार कार्य पूरे कर दिए जाते हैं तो थांदला के विद्यार्थियों, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को बड़ी राहत मिलेगी।
सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण की भी है जिम्मेदारी
यह पूरा मामला केवल एक खेल मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही का भी महत्वपूर्ण उदाहरण है।
सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन आवश्यक है, लेकिन उनके बाद सार्वजनिक परिसरों को पूर्व स्थिति में बहाल करना भी उतना ही जरूरी है। यदि इस दिशा में समय पर कार्रवाई की जाए तो शैक्षणिक संस्थानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस मुद्दे पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और कब तक शासकीय महाविद्यालय थांदला का खेल मैदान पुनः अपने पुराने स्वरूप में लौटकर विद्यार्थियों और खिलाड़ियों के उपयोग के लिए तैयार हो पाता है।
