इंदौर में गृह निर्माण संस्था में करोड़ों का गबन, अध्यक्ष विजय राठी सहित सात पर EOW की बड़ी कार्रवाई
इंदौर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा करते हुए करण गृह निर्माण सहकारी संस्था के अध्यक्ष विजय राठी सहित सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह मामला करोड़ों रुपये की जमीन की कथित हेराफेरी और संस्था के सदस्यों के साथ धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने इसे गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, करण गृह निर्माण सहकारी संस्था की सर्वे क्रमांक 285/1, 286/1, 289 और 236/1(2) की जमीन को लेकर यह पूरा विवाद सामने आया है। आरोप है कि संस्था के अध्यक्ष विजय राठी ने इस जमीन का सौदा गलत तरीके से कर सदस्यों के साथ धोखाधड़ी की।
आरोप है कि लगभग 3 करोड़ 37 लाख रुपये मूल्य की जमीन को मात्र 50 लाख रुपये में बेचने की योजना बनाई गई, जिससे संस्था के सदस्यों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
आम सभा में लिया गया था निर्णय
रिपोर्ट के अनुसार, 20 मार्च 2005 को संस्था की आम सभा में यह निर्णय लिया गया था कि जमीन को बेचकर सदस्यों के लिए अन्य स्थान पर भूमि खरीदी जाएगी। इसके बाद 2 मई 2005 को उप पंजीयक द्वारा कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर इस सौदे की अनुमति भी दे दी गई थी।
हालांकि बाद में इस प्रक्रिया में अनियमितताएं सामने आईं, जिनके आधार पर जांच शुरू की गई।
कैसे हुआ कथित घोटाला?
जांच में सामने आया है कि जमीन का सौदा कागजों में 50 लाख रुपये में दिखाया गया, लेकिन वास्तविक मूल्य करोड़ों में था। जब सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई, तो मामला दबाने के लिए अध्यक्ष की ओर से खाते में लगभग 3.37 करोड़ रुपये जमा कराए गए, लेकिन बाद में यह राशि अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
इसके बाद यह पैसा अलग-अलग कंपनियों के जरिए निकाल लिया गया, जिससे पूरा मामला संदिग्ध हो गया।
किन कंपनियों के जरिए हुआ लेन-देन?
जांच में यह भी सामने आया कि संस्था की राशि का उपयोग दो कंपनियों के बैंक खातों के माध्यम से किया गया:
- तेजकरण इन्फ्रास्ट्रक्चर (रेसकोर्स रोड)
- रामकुंवर बिल्डर्स (श्रीराम नगर)
इन कंपनियों से जुड़े खातों में संस्था की राशि ट्रांसफर की गई और बाद में इसे अलग-अलग तरीकों से निकाला गया।
पत्नी और सहयोगियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में केवल अध्यक्ष ही नहीं बल्कि उनकी पत्नी और कुछ अन्य सहयोगियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
- रामकुंवर बिल्डर्स में नम्रता राठी (अध्यक्ष की पत्नी)
- ज्योति पुराणिक और अभय पुष्करलाल पुराणिक डायरेक्टर के रूप में जुड़े थे
- तेजकरण इन्फ्रास्ट्रक्चर में स्वयं विजय राठी डायरेक्टर थे
इन सभी के खातों के जरिए फंड ट्रांसफर की बात सामने आई है।
EOW की जांच में क्या खुलासा हुआ?
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की प्रारंभिक जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं:
- जमीन की कीमत कम दिखाकर बिक्री
- संस्था के फंड का निजी कंपनियों में ट्रांसफर
- सदस्यों को गुमराह करना
- वित्तीय रिकॉर्ड में हेराफेरी
जांच अधिकारी योगेंद्र सिंह सिसोदिया ने बैंक खातों और लेन-देन का विस्तृत विश्लेषण किया है, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि पैसे को कई चरणों में घुमाकर निकाला गया।
FIR किन-किन पर दर्ज हुई?
EOW ने इस मामले में कुल सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- विजय राठी (अध्यक्ष)
- उनकी पत्नी नम्रता राठी
- अन्य कंपनी निदेशक और सहयोगी
इन सभी पर धोखाधड़ी, गबन और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सहकारिता विभाग और अफसरों की भूमिका की जांच
इस घोटाले में सहकारिता विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या जमीन सौदे की अनुमति देने में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत हुई थी।
सदस्यों को कैसे हुआ नुकसान?
संस्था के सदस्यों का कहना है कि उन्हें यह बताया गया था कि जमीन बेचकर नई जमीन खरीदी जाएगी और सभी को लाभ मिलेगा। लेकिन बाद में न तो नई जमीन खरीदी गई और न ही पैसे का सही उपयोग हुआ।
इससे कई सदस्यों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा और उन्हें लंबे समय तक न्याय की उम्मीद करनी पड़ी।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
फिलहाल EOW ने मामला दर्ज कर लिया है और सभी बैंक खातों, दस्तावेजों और संपत्तियों की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं।
यदि आरोप साबित होते हैं, तो दोषियों को कड़ी कानूनी कार्रवाई और जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
इंदौर का यह मामला एक बार फिर सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और निगरानी की कमी को उजागर करता है। करोड़ों रुपये की जमीन को लेकर हुआ यह कथित घोटाला न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि इससे सैकड़ों सदस्यों के भरोसे को भी ठेस पहुंची है।
अब सभी की नजर EOW की विस्तृत जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी है, जो इस पूरे मामले की सच्चाई को सामने लाएगी।

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