क्लर्क कॉलोनी दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धा से मनाया भगवान पुष्पदंत का मोक्ष कल्याणक महापर्व
अभिषेक-शांतिधारा के बाद निर्वाण कांड का पाठ कर चढ़ाया गया निर्वाण लाडू, उत्तम शौच धर्म पर पंडित नवीन जैन ने दिए प्रवचन
इंदौर। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के पावन अवसर पर क्लर्क कॉलोनी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में दसवें तीर्थंकर श्री 1008 भगवान पुष्पदंतनाथ का मोक्ष कल्याणक महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर में भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद निर्वाण कांड का पाठ करते हुए भगवान पुष्पदंतनाथ के चरणों में निर्वाण लाडू समर्पित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के महिला-पुरुषों ने सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
मंदिर परिसर सुबह से ही भगवान पुष्पदंतनाथ के जयकारों और भक्ति गीतों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए भगवान के जीवन, तप, त्याग और मोक्ष कल्याणक का स्मरण किया। आयोजन के दौरान समाज के लोगों ने सत्य, संयम, संतोष और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया।
अभिषेक और शांतिधारा से हुआ धार्मिक कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल श्रीजी के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ भगवान का अभिषेक किया। इसके बाद विश्व शांति, समाज की सुख-समृद्धि और सभी जीवों के कल्याण की भावना से शांतिधारा संपन्न कराई गई।
मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से मंगल पाठ किया। धार्मिक वातावरण के बीच भगवान पुष्पदंतनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। अभिषेक और शांतिधारा के दौरान मंदिर परिसर में उपस्थित समाजजनों ने भगवान के जयकारे लगाए।
देव-शास्त्र-गुरु एवं दशलक्षण धर्म की पूजा
अभिषेक और शांतिधारा के पश्चात देव-शास्त्र-गुरु की पूजा की गई। इसके साथ ही दशलक्षण धर्म के सभी अंगों की पूजा संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान पुष्पदंतनाथ की विशेष पूजा करते हुए उनके गुणों का स्मरण किया।
पूजन के दौरान धर्म, अहिंसा, सत्य, संयम और आत्मकल्याण की भावना व्यक्त की गई। श्रद्धालुओं ने कहा कि तीर्थंकर भगवान का जीवन प्रत्येक व्यक्ति को सांसारिक मोह से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। पूजा में समाज के बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठजनों ने उत्साह के साथ सहभागिता की।
निर्वाण कांड का पाठ कर चढ़ाया निर्वाण लाडू
भगवान पुष्पदंतनाथ के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में निर्वाण कांड का पाठ किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के मोक्ष प्राप्ति के पावन प्रसंग का स्मरण करते हुए अपने जीवन में धर्म, तप और संयम को अपनाने की भावना व्यक्त की।
मंदिर के प्रचार प्रमुख प्रवीण जैन ने बताया कि भगवान पुष्पदंतनाथ ने सम्मेद शिखर के सुप्रभ कूट से निर्वाण प्राप्त किया था। मोक्ष कल्याणक के अवसर पर आयोजित यह अनुष्ठान आत्मा को कर्मों के बंधन से मुक्त करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि पूरे आयोजन में समाजजनों की सक्रिय भागीदारी रही।
उत्तम शौच धर्म पर पंडित नवीन जैन के प्रवचन
धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पंडित नवीन जैन ने दशलक्षण धर्म के अंतर्गत उत्तम शौच धर्म के महत्व पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि उत्तम शौच धर्म का अर्थ केवल शरीर और आसपास की बाहरी सफाई तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ मन और आत्मा को लोभ, लालच, ईर्ष्या, द्वेष और बुरे विचारों से मुक्त कर पवित्र बनाना है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य बाहरी वस्तुओं को साफ रखने के लिए अनेक प्रयास करता है, लेकिन वास्तविक शुद्धता तभी प्राप्त होती है, जब मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, द्वेष और कपट का भाव न हो। लोभ और लालच मनुष्य को अशांत करते हैं, जबकि संतोष का भाव जीवन में सुख और स्थिरता प्रदान करता है।
धन-संपत्ति के मोह से दूर रहने का संदेश
पंडित नवीन जैन ने कहा कि धन और संपत्ति के प्रति अत्यधिक मोह मनुष्य के भीतर लोभ को बढ़ाता है। इच्छाओं की कोई सीमा नहीं होती। एक इच्छा पूरी होते ही दूसरी इच्छा जन्म ले लेती है। इस कारण व्यक्ति को अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं को सीमित रखते हुए संतोष का भाव अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तम शौच धर्म व्यक्ति को आंतरिक पवित्रता, संतोष और सरलता का मार्ग दिखाता है। मन से ईर्ष्या और द्वेष निकालकर प्रत्येक जीव के प्रति समानता और करुणा का भाव रखना ही आत्मशुद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सच्ची शुद्धता मन और आत्मा की होती है। केवल बाहरी स्वच्छता से आत्मकल्याण संभव नहीं है।
संगीत की धुन पर हुई भगवान की मंगल आरती
प्रवचन के बाद भगवान की मंगल आरती की गई। आरती के दौरान मंदिर में भक्तिमय वातावरण बन गया। बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं और पुरुषों ने संगीत की मधुर धुनों पर नृत्य करते हुए भक्ति भाव से आरती की। श्रद्धालुओं ने भगवान पुष्पदंतनाथ के जयकारे लगाए और धर्मलाभ प्राप्त किया।
सामूहिक आरती के दौरान बच्चों और युवाओं में भी विशेष उत्साह दिखाई दिया। पूरा मंदिर परिसर भगवान की भक्ति और जयघोष से गूंज उठा। समाजजनों ने इस धार्मिक आयोजन को आत्मशुद्धि और धार्मिक संस्कारों को मजबूत करने वाला बताया।
बड़ी संख्या में समाजजन हुए शामिल
मोक्ष कल्याणक महापर्व में आनंद जैन, नवीन गोधा, दिलीप बज, एसके सोगानी, संजय जैन, सिद्धार्थ गंगवाल, पवन जैन, आलोक जैन, विशाल जैन, नीरज जैन और विमल डेडी सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी ने भगवान पुष्पदंतनाथ के बताए मार्ग पर चलने और अपने जीवन में लोभ, लालच, ईर्ष्या तथा द्वेष का त्याग कर संतोष एवं आत्मशुद्धि की भावना अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन ने श्रद्धालुओं को दशलक्षण धर्म के सिद्धांतों को समझने और उन्हें दैनिक जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।
