ज्येष्ठ अधिकमास उज्जैन 2026 में श्रद्धालुओं को मिलेगा विशेष पुण्य अवसर। जानें अधिक मास का महत्व, तिथियां, पूजा विधि और उज्जैन में कुंभ जैसा माहौल।
ज्येष्ठ अधिकमास उज्जैन 2026: आध्यात्मिक ऊर्जा का महापर्व
ज्येष्ठ अधिकमास उज्जैन 2026 इस वर्ष एक अत्यंत दुर्लभ और पवित्र संयोग लेकर आ रहा है। लगभग आठ साल बाद बनने वाला यह अधिक मास न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि उज्जैन को एक बार फिर कुंभ जैसी दिव्यता से भर देगा। 2 मई से प्रारंभ होकर 29 जून तक चलने वाला यह काल श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्य फल देने वाला माना गया है।
अधिक मास क्या होता है?
ज्येष्ठ अधिकमास उज्जैन 2026 को समझने के लिए पहले अधिक मास का अर्थ जानना जरूरी है।भारतीय पंचांग के अनुसार, हर महीने में 30 तिथियां होती हैं, जो कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में विभाजित होती हैं। लेकिन तिथियों की गति सूर्य और चंद्रमा की चाल के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है।इसी असंतुलन को संतुलित करने के लिए लगभग हर 32 महीने 16 दिन बाद एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
ज्येष्ठ अधिकमास उज्जैन 2026 की प्रमुख तिथियां
- प्रारंभ: 2 मई 2026
- कृष्ण पक्ष: 2 मई – 16 मई
- अधिक मास पुण्य काल: 17 मई – 15 जून
- अंतिम शुक्ल पक्ष: 16 जून – 29 जून
यह पूरा समय पूजा, दान, तप और भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
अधिक मास का धार्मिक महत्व

पुराणों के अनुसार इस दौरान:
- भगवान विष्णु की आराधना
- भागवत कथा श्रवण
- तप और साधना
- दान और पुण्य
- तीर्थ स्नान
इन सभी कार्यों से कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है। इस महीने को “पुरुषोत्तम मास” भी कहा जाता है क्योंकि इसे स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है।
उज्जैन में क्यों दिखेगा कुंभ जैसा नजारा?

इसके मुख्य कारण:
- चौरासी महादेव के दर्शन
- नौ नारायण मंदिरों की यात्रा
- शिप्रा नदी में स्नान
- भागवत कथा और धार्मिक आयोजन
इन सभी कारणों से उज्जैन में वातावरण बिल्कुल कुंभ मेले जैसा हो जाएगा, खासकर सिंहस्थ से पहले यह एक बड़ा आध्यात्मिक संकेत माना जा रहा है।
नौ नारायण और चौरासी महादेव का महत्व
उज्जैन में स्थित नौ नारायण मंदिर और चौरासी महादेव का दर्शन अधिक मास में विशेष फलदायी माना जाता है।मान्यता है कि:
- सभी 84 महादेव के दर्शन से पापों का नाश होता है
- नौ नारायण के दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है
इस दौरान देशभर से भक्त इन सभी स्थानों की यात्रा करते हैं।
सप्त सागर की वर्तमान स्थिति
जहां एक ओर ज्येष्ठ अधिकमास उज्जैन 2026 में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी, वहीं दूसरी ओर उज्जैन के प्रसिद्ध सप्त सागर की स्थिति चिंता का विषय है।
- कई सागर अतिक्रमण का शिकार हो रहे हैं
- साफ-सफाई और संरक्षण की कमी
- कुछ सागर सिकुड़कर बहुत छोटे हो गए हैं
यह स्थिति प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है कि धार्मिक धरोहरों को संरक्षित किया जाए।
श्रद्धालुओं के लिए क्या करें?
रोज स्नान और ध्यान करें
भगवान विष्णु का पूजन करें
गरीबों को दान दें
धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें
संयम और सात्विक जीवन अपनाएं
क्या न करें:
- क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहें
- मांसाहार और नशे से बचें
- गलत कार्यों से दूरी रखें
निष्कर्ष
ज्येष्ठ अधिकमास उज्जैन 2026 केवल एक धार्मिक महीना नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का स्वर्णिम अवसर है।आठ वर्षों बाद आने वाला यह दुर्लभ संयोग उज्जैन को एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगा। यदि इस अवसर का सही उपयोग किया जाए, तो यह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
