भिंड के ऋषभ सत्संग भवन में पर्यूषण पर्व पर जैन गरबा-डांडिया का आयोजन हुआ। धार्मिक भजनों पर महिलाओं और बच्चों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं।
जैन गरबा-डांडिया में भक्ति के रंग में रंगे श्रद्धालु, महिलाओं-बच्चों ने दी आकर्षक प्रस्तुतियां
पर्यूषण पर्व पर ऋषभ सत्संग भवन भिंड में आयोजन, धार्मिक भजनों की धुन पर हुआ गरबा-डांडिया
भिंड (मनोज जैन नायक)। पर्यूषण पर्व के अवसर पर जिन मंदिरों एवं जैन समाज में चल रहे धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला में ऋषभ सत्संग भवन भिंड में जैन गरबा-डांडिया कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आर्यिका विजिज्ञासा श्रीमाता जी के मंगल आशीर्वाद से श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महिला महासभा एवं युवा महासभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में समाज के महिलाओं, बच्चों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके बाद धार्मिक भजनों की मधुर धुनों पर गरबा और डांडिया की प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ।
रंग-बिरंगे परिधानों में महिलाओं ने खेला डांडिया
कार्यक्रम में महिलाओं ने रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में हाथों में डांडिया लेकर धार्मिक गीतों पर आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों ने भी गरबा-डांडिया में उत्साह के साथ भाग लिया। भक्ति संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों से पूरा आयोजन स्थल भक्तिमय वातावरण में रंग गया।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यूषण पर्व के दौरान धार्मिक आराधना के साथ समाज के बच्चों और युवाओं को जैन संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ना भी था। सामूहिक प्रस्तुतियों के दौरान समाजजनों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
समाजजनों ने की सहभागिता
कार्यक्रम में वैश्य महासम्मेलन के ओमप्रकाश बाबूजी, गोलालारिय समाज के अध्यक्ष धर्मेंद्र जैन, संजीव जैन, बल्लू जैन, विनोद जैन, मयंक जैन, बासु जैन, रत्ना जैन, सपना जैन, प्रीति जैन, नितेश जैन, राखी जैन और रिंकी जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महिला महासभा की अध्यक्ष रानी जैन, युवा महासभा अध्यक्ष अभिषेक जैन ‘मोनू’ और महामंत्री सोनल जैन सहित दोनों संगठनों के कार्यकारिणी सदस्यों ने आयोजन में सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन पार्षद मनोज जैन ने किया। इस दौरान समाज के गणमान्य नागरिकों के साथ पत्रकार भी उपस्थित रहे। आयोजन के समापन पर समाजजनों ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को संस्कारों और परंपराओं से जोड़ने पर जोर दिया।


