Indore Ujjain Greenfield Corridor का भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया। 2935 करोड़ की इस परियोजना से इंदौर-उज्जैन की दूरी 35 मिनट में तय होगी और 15 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
Indore Ujjain Greenfield Corridor का ऐतिहासिक शुभारंभ: 2935 करोड़ की परियोजना से बदलेगी विकास की तस्वीर
Indore Ujjain Greenfield Corridor का बहुप्रतीक्षित भूमिपूजन शनिवार 20 जून 2026 को इंदौर जिले के सांवेर विधानसभा क्षेत्र स्थित चंद्रावतीगंज में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रदेश में कुल 5257 करोड़ रुपए के विकास कार्यों को भी हरी झंडी दिखाई गई।इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरू होने से इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी और दोनों शहरों के आर्थिक, औद्योगिक, धार्मिक एवं पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी।
Indore Ujjain Greenfield Corridor का भूमिपूजन
Indore Ujjain Greenfield Corridor किसान एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।समारोह के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 38 हजार से अधिक हितग्राहियों को गृह प्रवेश कराया गया। कार्यक्रम को मध्यप्रदेश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की प्रमुख विशेषताएं
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल लंबाई | 48 किलोमीटर |
| सड़क प्रकार | फोरलेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर |
| लागत | 2935 करोड़ रुपए |
| यात्रा समय | लगभग 35 मिनट |
| प्रभावित किसान | 917 |
| अधिग्रहित भूमि | 242.939 हेक्टेयर |
| मुआवजा राशि | 816 करोड़ रुपए |
| निर्माण एजेंसी | MPRDC |
| निर्माण अवधि | 24 महीने |
| लाभान्वित आबादी | लगभग 15 लाख |
Indore Ujjain Greenfield Corridor से 35 मिनट में पूरा होगा सफर
वर्तमान में इंदौर से उज्जैन पहुंचने में लगभग 60 से 90 मिनट का समय लगता है। लेकिन इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनने के बाद यह दूरी मात्र 35 मिनट में तय की जा सकेगी।इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा बल्कि ईंधन की भी बचत होगी। उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
किसानों को मिला 816 करोड़ से अधिक का मुआवजा
परियोजना के लिए कुल 917 किसानों की 242.939 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को 816 करोड़ रुपए से अधिक का मुआवजा प्रदान किया गया है।सरकार का दावा है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और किसान हितैषी बनाया गया है।
15 लाख लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से इंदौर जिले के 20 और उज्जैन जिले के 8 गांव सीधे जुड़ेंगे।इसके अतिरिक्त आसपास के 40 से 50 गांवों के लगभग 15 लाख लोगों को सड़क संपर्क, व्यापार, रोजगार और आवागमन की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
सिंहस्थ 2028 के लिए बनेगा लाइफलाइन
उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को देखते हुए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इंदौर एयरपोर्ट से सीधे Indore Ujjain Greenfield Corridor के माध्यम से उज्जैन पहुंच सकेंगे। इससे सिंहस्थ के दौरान ट्रैफिक दबाव कम होगा और यातायात व्यवस्था बेहतर बनेगी।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने क्या कहा
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश में आधारभूत संरचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास कार्य हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।उन्होंने कहा कि Indore Ujjain Greenfield Corridorकेवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि विकास, निवेश, रोजगार और पर्यटन को गति देने वाला महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है।
विकास और निवेश को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद:
- औद्योगिक निवेश बढ़ेगा
- पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा
- धार्मिक पर्यटन में वृद्धि होगी
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
- ग्रामीण क्षेत्रों का विकास तेज होगा
- लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी
इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर क्यों है खास?
धार्मिक महत्व
उज्जैन विश्व प्रसिद्ध महाकाल नगरी है।
आर्थिक महत्व
इंदौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी है।
पर्यटन महत्व
दोनों शहर लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
भविष्य की जरूरत
सिंहस्थ 2028 और बढ़ती आबादी को देखते हुए यह परियोजना भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करेगी।
निष्कर्ष
Indore Ujjain Greenfield Corridor मध्यप्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है। 2935 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह परियोजना इंदौर और उज्जैन के बीच कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगी। 35 मिनट का सफर, 15 लाख लोगों को लाभ, किसानों को मुआवजा और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिहाज से यह परियोजना प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


