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Indore Social Activist Strike: अवैध होर्डिंग के खिलाफ पत्नी संग उपवास पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता, मारपीट का लगाया आरोप

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Published On: 17 September 2026
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Indore Social Activist Strike: अवैध होर्डिंग के खिलाफ पत्नी संग उपवास पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता, मारपीट का लगाया आरोप

प्रहलाद पांडेय ने BJP विधायक गोलू शुक्ला के कथित समर्थकों पर घेरकर हमला करने का आरोप लगाया; मोबाइल छीनने और रिकॉर्डिंग डिवाइस तोड़ने का भी दावा

इंदौर। शहर में सार्वजनिक स्थानों पर लगे कथित अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर हटाने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडेय अपनी पत्नी संगीता पांडेय के साथ रीगल चौराहे पर स्थित गांधी प्रतिमा के नीचे उपवास पर बैठ गए। दोनों ने नगर निगम और प्रशासन से शहरभर में बिना अनुमति लगाई गई प्रचार सामग्री के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की।

इस आंदोलन के बीच प्रहलाद पांडेय ने आरोप लगाया कि कथित अवैध होर्डिंग का वीडियो बनाते समय उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने हमलावरों को भाजपा विधायक गोलू शुक्ला का समर्थक बताया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र अथवा पुलिस स्तर पर पुष्टि सामने नहीं आई है। विधायक की ओर से भी तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

अवैध होर्डिंग हटाने की मांग को लेकर उपवास

प्रहलाद पांडेय और संगीता पांडेय ने आरोप लगाया कि इंदौर के कई प्रमुख मार्गों, चौराहों और सार्वजनिक संपत्तियों पर नियमों के विरुद्ध होर्डिंग और पोस्टर लगाए जा रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम और संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

दोनों सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कार्रवाई सभी के खिलाफ समान रूप से होनी चाहिए। होर्डिंग अथवा पोस्टर किसी आम व्यक्ति, व्यावसायिक संस्था या प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति से संबंधित हो, नियमों का उल्लंघन होने पर उसे हटाया जाना चाहिए।

उन्होंने इस मुद्दे की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए गांधी प्रतिमा के नीचे उपवास शुरू किया। इस दौरान उन्होंने शहर की सुंदरता, यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठाए।

मरीमाता चौराहे पर मारपीट का आरोप

प्रहलाद पांडेय के अनुसार वह मरीमाता चौराहे पर लगे कथित अवैध बैनर और पोस्टरों का वीडियो बना रहे थे। इसी दौरान कुछ लोग उनके पास पहुंचे और कथित रूप से उनके साथ विवाद करने लगे।

पांडेय ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में आरोप लगाया कि लगभग 15 लोगों ने उन्हें घेर लिया और मारपीट की। उन्होंने दावा किया कि उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया, रिकॉर्ड किए गए वीडियो को डिलीट कराया गया और रिकॉर्डिंग में इस्तेमाल होने वाला उपकरण भी तोड़ दिया गया।

वीडियो में प्रहलाद पांडेय भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वह पिछले कई महीनों से सार्वजनिक संपत्ति के कथित दुरुपयोग और अवैध प्रचार सामग्री के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने इस कथित हमले के लिए भाजपा विधायक गोलू शुक्ला से जुड़े लोगों को जिम्मेदार बताया।  के अनुसार भी पांडेय ने मोबाइल छीनने और डिवाइस तोड़ने का आरोप लगाया है।

दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई

प्रहलाद पांडेय द्वारा लगाए गए आरोपों पर विधायक गोलू शुक्ला अथवा उनके प्रतिनिधियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इसलिए मारपीट करने वाले लोगों की पहचान और उनके किसी राजनीतिक व्यक्ति से संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

मामले में पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के समय क्या हुआ था, विवाद में कौन-कौन शामिल थे और क्या पांडेय द्वारा लगाए गए आरोपों का समर्थन करने वाले वीडियो, सीसीटीवी फुटेज या प्रत्यक्षदर्शी उपलब्ध हैं।

जानकारी के अनुसार पांडेय ने प्रारंभिक तौर पर घटना को लेकर एफआईआर दर्ज नहीं कराई थी। यदि वह पुलिस को औपचारिक शिकायत देते हैं तो बयान, मेडिकल परीक्षण, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जा सकती है।

केवल सुंदरता नहीं, सुरक्षा से भी जुड़ा है मामला

शहर में अवैध होर्डिंग और पोस्टर केवल सौंदर्य का विषय नहीं हैं। सड़क किनारे अथवा चौराहों पर गलत स्थान पर लगाए गए बड़े बैनर वाहन चालकों का ध्यान भटका सकते हैं। ट्रैफिक संकेत, दिशा-सूचक बोर्ड और सीसीटीवी कैमरे ढकने से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

बिना अनुमति सार्वजनिक संपत्ति पर प्रचार सामग्री लगाने से दीवारों, विद्युत खंभों, डिवाइडरों और अन्य सरकारी संसाधनों को नुकसान पहुंच सकता है। निर्धारित समय के बाद प्रचार सामग्री नहीं हटाए जाने पर शहर की सफाई व्यवस्था पर भी अतिरिक्त भार पड़ता है।

प्रहलाद पांडेय की मांग है कि नगर निगम शहर में सर्वे कराकर सभी अनधिकृत प्रचार सामग्रियों को हटाए और उन्हें लगाने वालों के खिलाफ नियमों के अनुसार जुर्माना तथा अन्य कार्रवाई करे।

पहले भी विरोध प्रदर्शन कर चुका है दंपती

प्रहलाद और संगीता पांडेय इससे पहले भी विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर प्रदर्शन कर चुके हैं। जुलाई 2026 में दोनों ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आवास के बाहर प्रदर्शन किया था। पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में दोनों को हिरासत में लिया था और कानूनी कार्रवाई के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया था।

उस घटनाक्रम के बाद दंपती और प्रशासन के बीच प्रदर्शन की अनुमति तथा विरोध दर्ज कराने के तरीके को लेकर विवाद सामने आया था। इसके बावजूद दोनों ने अलग-अलग नागरिक मुद्दों पर अपनी गतिविधियां जारी रखीं।

निष्पक्ष जांच की उठी मांग

ताजा घटनाक्रम में दो प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं। पहला, शहर में कथित अवैध होर्डिंग और पोस्टरों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई। दूसरा, वीडियो रिकॉर्ड कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता के साथ कथित मारपीट का आरोप।

यदि सार्वजनिक स्थान पर किसी व्यक्ति के साथ मारपीट की गई और उसका फोन या उपकरण छीना गया तो यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला है। वहीं, किसी जनप्रतिनिधि के समर्थकों पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि भी निष्पक्ष जांच से ही हो सकती है।

फिलहाल प्रहलाद पांडेय द्वारा लगाए गए आरोप उनका पक्ष हैं। संबंधित विधायक, कथित हमलावरों, पुलिस और नगर निगम की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। नागरिकों ने प्रशासन से अवैध होर्डिंग के खिलाफ बिना भेदभाव कार्रवाई करने और मारपीट के आरोपों की पारदर्शी जांच कराने की मांग की है।

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