Indore निशुल्क सकोरे वितरण अभियान का तृतीय चरण सफलतापूर्वक संपन्न
Indore। जीवदया और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से संचालित निशुल्क सकोरे वितरण अभियान का तृतीय चरण शहर में उत्साह और सहभागिता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। राष्ट्रीय खंडेलवाल (सरावगी) दिगम्बर जैन महिला संगठन द्वारा आयोजित इस अभियान के माध्यम से इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों में समाजजनों को सकोरे वितरित किए गए, ताकि भीषण गर्मी के दौरान पक्षियों और मूक प्राणियों के लिए पानी और दाना उपलब्ध कराया जा सके।
संगठन की मीडिया एवं जनसंपर्क प्रमुख रुचि चोविश्या जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान की योजना इस प्रकार बनाई गई थी कि शहर के अधिकतम क्षेत्रों तक पहुंच बनाकर हर घर में सकोरे रखवाए जा सकें। अभियान का विस्तार इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा क्षेत्र से लेकर उत्तरी छोर स्थित सुखलिया तक किया गया, जिससे शहर के अलग-अलग हिस्सों में व्यापक स्तर पर जागरूकता फैलाई जा सके।

शहरभर में मंदिरों के माध्यम से हुआ वितरण
अभियान के तहत विभिन्न प्रमुख जैन मंदिरों में सकोरे वितरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। लश्करी मंदिर जी, गौराकुंड में संयोजिका कल्पना बाकलीवाल के नेतृत्व में किरण अजमेरा, संगीता बड़जात्या और मनोरमा अजमेरा ने सेवाएं प्रदान कीं। यहां बड़ी संख्या में समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर सकोरे ग्रहण किए और जीवदया के इस कार्य में सहयोग का संकल्प लिया।
इसी प्रकार श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, सुखलिया में अर्चना काला, वर्षा पाटनी, सारिका पांड्या, साधना गोधा, अर्चना बिलाला, सोनू चांदीवाल और सारिका बड़जात्या ने व्यवस्थाएं संभालीं। मंदिर परिसर में आए लोगों को सकोरे वितरित किए गए और उन्हें नियमित रूप से पानी भरने के लिए प्रेरित किया गया।

राजवाड़ा और मल्हारगंज में भी दिखा उत्साह
माणक चौक मंदिर जी, राजवाड़ा में मध्य क्षेत्र अध्यक्ष पुष्पा काला एवं संयोजिका स्मृति जैन के नेतृत्व में मंजू पहाड़िया, टीना पाटनी, मोनिका पहाड़िया और लता कासलीवाल उपस्थित रहीं। इस दौरान बड़ी संख्या में समाजजन एकत्रित हुए और अभियान को सफल बनाने में योगदान दिया।
वहीं मल्हारगंज स्थित रामाशाह मंदिर में भी आयोजन किया गया, जहां संयोजिका डॉली झांझरी के साथ हिमाली अजमेरा, अनुराधा बिलाला, रेनू वेद, बबीता पाटोदी, अर्चना झांझरी, संगीता छाबड़ा, सोनाली सेठी और नीलम गोधा ने सक्रिय भूमिका निभाई। समाज के प्रफुल्ल गोधा, नितिन बड़जात्या, मनमोहन झांझरी और नरेंद्र छाबड़ा ने भी इस अवसर पर सेवाएं देते हुए जीवदया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।
जीवदया और अहिंसा का संदेश
इस अभियान के दौरान समाजजनों को भगवान महावीर के “जियो और जीने दो” के सिद्धांत को अपनाने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने सभी से अपील की कि वे अपने घरों, छतों और आसपास के स्थानों पर सकोरे रखें और नियमित रूप से उनमें पानी भरें, ताकि गर्मी के मौसम में पक्षियों और अन्य जीवों को जीवनदायिनी सहायता मिल सके।
अभियान के माध्यम से यह भी बताया गया कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी पर्यावरण संरक्षण और जीवदया की दिशा में बड़ा योगदान दिया जा सकता है। पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना न केवल मानवता का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संगठन के पदाधिकारियों का योगदान
इस अभियान को सफल बनाने में संगठन के कई पदाधिकारियों और सदस्यों ने सक्रिय योगदान दिया। संस्थापक संदीप शीतल पहाड़िया, परामर्शदाता ऊषा पाटनी और मार्गदर्शक कल्पना बाकलीवाल के निर्देशन में पूरे कार्यक्रम का संचालन किया गया।
कोषाध्यक्ष शैफाली गंगवाल, किरण अजमेरा, संगठन मंत्री दीपाली बज, संगठन प्रभारी शीतल पहाड़िया, रेखा बाकलीवाल, अंतिम गंगवाल, संगीता बड़जात्या और बबीता लुहाड़िया ने सभी सहयोगियों और समाजजनों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के सामाजिक और सेवा कार्यों में समाज की भागीदारी ही सफलता की कुंजी होती है।
चौथे चरण की तैयारी जारी
संगठन ने जानकारी दी कि इस अभियान का अंतिम और चतुर्थ चरण भी जल्द ही आयोजित किया जाएगा। इस चरण में शहर के अन्य चार मंदिरों में सकोरे वितरित किए जाएंगे, ताकि अभियान का लाभ और अधिक लोगों तक पहुंच सके।
आयोजकों का उद्देश्य है कि इंदौर का हर घर और हर मोहल्ला इस पहल का हिस्सा बने और कोई भी पक्षी या मूक प्राणी पानी की कमी से परेशान न हो। इसके लिए संगठन लगातार प्रयासरत है और लोगों को जोड़ने का कार्य कर रहा है।
निष्कर्ष
निशुल्क सकोरे वितरण अभियान केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और करुणा का प्रतीक बनकर उभरा है। भीषण गर्मी के इस दौर में पक्षियों और मूक प्राणियों के लिए पानी की व्यवस्था करना अत्यंत आवश्यक है।
राष्ट्रीय खंडेलवाल (सरावगी) दिगम्बर जैन महिला संगठन की यह पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज के अन्य वर्गों के लिए भी प्रेरणादायक है। यदि इसी तरह सामूहिक प्रयास जारी रहे, तो निश्चित ही जीवदया और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़े सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
