इंदौर रंगपंचमी गेर 2026 में मिसाइलों से गुलाल उड़ा, टैंक से रंगों की बौछार हुई। उज्जैन में मुख्यमंत्री ने होली गीतों पर नृत्य किया।
इंदौर रंगपंचमी गेर 2026
मध्यप्रदेश में होली के बाद मनाया जाने वाला सबसे बड़ा रंगोत्सव रंगपंचमी होता है। खासतौर पर इंदौर रंगपंचमी गेर 2026 इस बार अपने भव्य और अनोखे आयोजन के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई।
इस वर्ष इंदौर में पारंपरिक गेर के दौरान मिसाइलों से गुलाल उड़ाया गया, टैंकरों और टैंक से रंगों की बौछार हुई और पूरा शहर रंगों के उत्सव में डूब गया। वहीं उज्जैन में बाबा महाकाल के आशीर्वाद के साथ मुख्यमंत्री ने भी होली गीतों पर झूमकर इस पर्व को और खास बना दिया।
इंदौर रंगपंचमी गेर 2026 की भव्य शुरुआत
इंदौर की पहचान उसकी अनोखी रंगपंचमी गेर से है। हर साल की तरह इस बार भी शहर में भव्य आयोजन हुआ।
सुबह से ही राजवाड़ा, टोरी कॉर्नर और आसपास के क्षेत्रों में हजारों लोग एकत्रित हुए। गेर की शुरुआत टोरी कॉर्नर से हुई, जहां से रंगों की झड़ी लगनी शुरू हो गई।गेर में शामिल टोलियों ने ढोल, ताशे और डीजे की धुनों पर नाचते हुए पूरे शहर को रंगों में सराबोर कर दिया।
मिसाइलों से उड़ता गुलाल बना आकर्षण
इस बार इंदौर रंगपंचमी गेर 2026 का सबसे बड़ा आकर्षण रहा गुलाल उड़ाने के लिए इस्तेमाल की गई विशेष मिसाइलें।इन मिसाइलों के जरिए आसमान में रंगीन गुलाल छोड़ा गया जिससे पूरा आकाश गुलाबी और लाल रंग में रंग गया।जब गुलाल की ये रंगीन लहरें हवा में फैलीं तो हजारों लोग उत्साह से झूम उठे। यह दृश्य इतना अद्भुत था कि लोगों ने मोबाइल कैमरों में इसे कैद कर लिया।
टैंकर और टैंक से रंगों की अनोखी बौछार
इंदौर की गेर में रंगों की बारिश करने के लिए खास व्यवस्था की जाती है।
इस बार
- 3 बड़े टैंकर
- रंगों से भरे टैंक
- हाई प्रेशर पंप
का उपयोग किया गया।इन टैंकरों से सड़कों पर खड़े लोगों पर रंगों की बौछार की गई। जब रंगों की धार लोगों पर पड़ी तो पूरा माहौल उत्साह और मस्ती से भर गया।
उज्जैन में महाकाल मंदिर से शुरू हुआ रंगोत्सव
मध्यप्रदेश में रंगपंचमी की शुरुआत उज्जैन के महाकाल मंदिर से होती है।सुबह बाबा महाकाल को केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंदिर परिसर में रंगोत्सव की शुरुआत हुई।भक्तों ने भगवान महाकाल के सामने गुलाल अर्पित किया और भक्ति गीतों पर नृत्य किया।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में झूमी उज्जैन की गेर
उज्जैन की रंगपंचमी गेर इस बार और भी खास रही क्योंकि इसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने
- होली गीतों पर नृत्य किया
- लोगों के साथ गुलाल खेला
- शहरवासियों को रंगपंचमी की शुभकामनाएं दीं
उनकी मौजूदगी से पूरे कार्यक्रम का उत्साह कई गुना बढ़ गया।
क्यों प्रसिद्ध है इंदौर की गेर
इंदौर की रंगपंचमी गेर को देश की सबसे बड़ी रंगयात्राओं में से एक माना जाता है।
इसकी प्रसिद्धि के कारण:
- हजारों लोगों की भागीदारी
- रंगों की विशाल बारिश
- पारंपरिक ढोल-ताशे
- आकर्षक झांकियां
- पूरे शहर की भागीदारी
हर साल देश-विदेश से लोग इस गेर को देखने इंदौर आते हैं।
मध्यप्रदेश के अन्य शहरों में रंगपंचमी उत्सव
इंदौर और उज्जैन के अलावा प्रदेश के अन्य शहरों में भी रंगपंचमी का उत्साह देखने को मिला।
भोपाल
राजधानी भोपाल में भी लोगों ने सड़कों पर निकलकर रंगों के साथ होली मनाई।
ग्वालियर
ग्वालियर में मंदिरों और चौक-चौराहों पर रंगोत्सव का आयोजन हुआ।
जबलपुर
जबलपुर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और संगीत के साथ रंगपंचमी मनाई गई।
गेर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा
इंदौर की गेर केवल रंगों का उत्सव नहीं है बल्कि यह शहर की सांस्कृतिक पहचान भी है।
इस परंपरा की शुरुआत लगभग 200 वर्ष पहले मानी जाती है।
उस समय लोग
- ढोल
- ताशा
- गुलाल
के साथ जुलूस निकालते थे।समय के साथ यह आयोजन इतना बड़ा हो गया कि आज यह पूरे देश में प्रसिद्ध हो चुका है।
निष्कर्ष
इंदौर रंगपंचमी गेर 2026 ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंदौर केवल स्वच्छता ही नहीं बल्कि संस्कृति और उत्सवों के लिए भी जाना जाता है।मिसाइलों से उड़ता गुलाल, टैंकरों से बरसते रंग और हजारों लोगों की मस्ती ने इस पर्व को यादगार बना दिया।उज्जैन में महाकाल की नगरी से शुरू हुआ यह रंगोत्सव पूरे मध्यप्रदेश में उत्साह और उल्लास का प्रतीक बन गया।

