MP के शौर्यांश और क्रियांश ने राष्ट्रीय ननचाकू चैंपियनशिप में रचा स्वर्णिम इतिहास,
कानपुर में आयोजित राष्ट्रीय ननचाकू चैंपियनशिप में MP के Indore शहर के होनहार खिलाड़ियों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। देशभर से आए सैकड़ों प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के बीच इंदौर के दो बच्चों—शौर्यांश जैन और क्रियांश तांतेड़—ने अद्भुत खेल कौशल, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया।
इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दोनों खिलाड़ियों की सफलता न केवल उनके परिवारों के लिए गर्व का विषय बनी, बल्कि मध्य प्रदेश के खेल जगत के लिए भी यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
देशभर के 300 प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा
राष्ट्रीय ननचाकू चैंपियनशिप का आयोजन उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में किया गया, जिसमें महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों से करीब 300 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में फाइट, काता और फ्रीस्टाइल जैसी तकनीकी और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण स्पर्धाएं आयोजित की गईं।
प्रतियोगिता का स्तर बेहद ऊंचा था और हर मुकाबले में खिलाड़ियों को अपनी तकनीक, गति, संतुलन और मानसिक दृढ़ता का प्रदर्शन करना पड़ा। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में इंदौर के खिलाड़ियों का पदक जीतना उनकी कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास का प्रमाण है।
शौर्यांश जैन का शानदार प्रदर्शन, तीन स्वर्ण पदक जीतकर बने चैंपियन
पारसमल जैन के पोते एवं सुमन सेठिया के नाती शौर्यांश जैन ने इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में असाधारण प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। उन्होंने फाइट, काता और फ्रीस्टाइल—तीनों श्रेणियों में अपने प्रतिद्वंद्वियों को पराजित कर तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
शौर्यांश की तकनीकी दक्षता, तेज प्रतिक्रिया और संतुलित आक्रमण ने निर्णायकों और दर्शकों को समान रूप से प्रभावित किया। फाइट कैटेगरी में उन्होंने आक्रामक रणनीति के साथ मुकाबले जीते, वहीं काता और फ्रीस्टाइल में उनकी सटीक चालें और अनुशासित प्रस्तुति काबिले-तारीफ रही।
तीन स्वर्ण पदक जीतकर शौर्यांश ने प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया और मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया।
क्रियांश तांतेड़ की शानदार उपलब्धि, गोल्ड और सिल्वर से बढ़ाया मान
तेजकुमार तांतेड़ के पोते क्रियांश तांतेड़ ने भी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने फाइट स्पर्धा में स्वर्ण पदक और काता स्पर्धा में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
क्रियांश ने फाइट मुकाबलों में अपनी फुर्ती, संतुलन और रणनीतिक सोच से विरोधियों को मात दी। काता स्पर्धा में भी उनका प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा, जहां उन्होंने तकनीकी शुद्धता और अनुशासन के साथ अपनी प्रस्तुति दी।
उनकी इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास से कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
परिवार, समाज और स्कूल में खुशी की लहर
शौर्यांश और क्रियांश की इस ऐतिहासिक जीत के बाद उनके परिवार, स्कूल और समाज में खुशी की लहर दौड़ गई। समाज के गणमान्य सदस्यों ने दोनों बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
बच्चों की उपलब्धि पर उनके स्कूल में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जहां शिक्षकों और प्रबंधन ने दोनों खिलाड़ियों को मंच पर सम्मानित किया। इस अवसर पर बच्चों को भविष्य में भी इसी तरह मेहनत कर प्रदेश और देश का नाम ऊंचा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
खेलों से आत्मविश्वास और अनुशासन का विकास
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि ननचाकू जैसे मार्शल आर्ट खेल बच्चों में आत्मरक्षा, अनुशासन, एकाग्रता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देते हैं। शौर्यांश और क्रियांश की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और समर्थन मिले, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
समाज के लोगों ने जताई खुशी
दोनों खिलाड़ियों की जीत पर पियूष जैन, दिव्या जैन, मयंक तांतेड़ और मोना तांतेड़ सहित समाज के कई लोगों ने हर्ष व्यक्त किया और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सभी ने कहा कि यह सफलता पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है।
प्रदेश के लिए गौरव का क्षण
राष्ट्रीय ननचाकू चैंपियनशिप में शौर्यांश जैन और क्रियांश तांतेड़ की यह उपलब्धि MP के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ती है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती, बस सही दिशा और मेहनत की जरूरत होती है।
आने वाले समय में इन होनहार खिलाड़ियों से और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है। पूरे प्रदेश को विश्वास है कि शौर्यांश और क्रियांश भविष्य में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत और मध्य प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।
