Indore की पिनेकल द ग्रैंड कॉलोनी फिर विवादों में, संभागायुक्त के फैसले पर उठे सवाल
Indore। शहर की चर्चित पिनेकल द ग्रैंड कॉलोनी एक बार फिर विवादों में आ गई है। इंदौर से स्थानांतरण से ठीक पहले तत्कालीन संभागायुक्त सुदाम खाड़े द्वारा लिया गया एक फैसला अब प्रशासनिक और कानूनी चर्चा का विषय बन गया है। निपानिया स्थित इस कॉलोनी के मामले में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) द्वारा निरस्त की गई अनुमति को दोबारा बहाल कर दिया गया है।
इस निर्णय के बाद जहां कॉलोनाइजरों को बड़ी राहत मिली है, वहीं शिकायतकर्ताओं और प्रभावित प्लॉटधारकों ने इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से चल रहे विवाद और अनियमितताओं के बावजूद अनुमति बहाल करना न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
हाईकोर्ट आदेश के बाद रद्द हुई थी अनुमति
जानकारी के अनुसार, पिनेकल द ग्रैंड कॉलोनी के नक्शे और अनुमति को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (TNCP) ने कॉलोनी की अनुमति और नक्शे को निरस्त कर दिया था।
इसके बाद कॉलोनाइजरों ने इस फैसले के खिलाफ संभागायुक्त कार्यालय में अपील की। मामले की सुनवाई के बाद तत्कालीन संभागायुक्त सुदाम खाड़े ने TNCP के आदेश को निरस्त करते हुए कॉलोनी की अनुमति बहाल कर दी।
संभागायुक्त के इस निर्णय के बाद कॉलोनी से जुड़ा विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। अब दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क दे रहे हैं।
कॉलोनाइजरों ने दी थी यह दलील
सुनवाई के दौरान कॉलोनाइजरों की ओर से तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट के आदेश की सही व्याख्या नहीं की गई और इसी आधार पर TNCP ने कॉलोनी का नक्शा रद्द कर दिया।
कॉलोनाइजरों का कहना है कि संभागायुक्त का फैसला उनके पक्ष में कानूनी राहत के रूप में आया है। उनके अनुसार, कॉलोनी से संबंधित सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पूरी की गई थीं और अनुमति बहाल होने से विकास कार्य आगे बढ़ सकेंगे।
शिकायतकर्ताओं ने फैसले पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, शिकायतकर्ताओं और कुछ प्लॉटधारकों ने संभागायुक्त के फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कॉलोनी में वर्षों से विकास कार्यों, जमीन हस्तांतरण और अनुमतियों को लेकर कई शिकायतें सामने आती रही हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासनिक जांच में भी कई स्तरों पर अनियमितताओं की बात सामने आई थी। इसके बावजूद अनुमति बहाल करने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है।
उनका कहना है कि वे इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
पहले भी विवादों में रही है कॉलोनी
पिनेकल द ग्रैंड कॉलोनी का विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी कॉलोनी को लेकर कई प्रशासनिक कार्रवाई हो चुकी हैं।
नगर निगम की कॉलोनी सेल द्वारा विकास कार्यों और भूखंडों के क्रय-विक्रय को लेकर रोक लगाने जैसे आदेश जारी किए गए थे। इसके अलावा अलग-अलग विभागों द्वारा परियोजना की जांच भी की जा चुकी है।
कॉलोनी से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी प्रशासन और शिकायतकर्ताओं के बीच विवाद सामने आते रहे हैं। अब संभागायुक्त के नए आदेश के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।
आगे बढ़ सकता है कानूनी विवाद
संभागायुक्त के फैसले के बाद अब मामला एक बार फिर न्यायालय तक पहुंच सकता है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपनाएंगे।
वहीं कॉलोनाइजर पक्ष इसे अपने लिए बड़ी राहत मान रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में न्यायालय क्या रुख अपनाता है और प्रशासनिक स्तर पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
फिलहाल पिनेकल द ग्रैंड कॉलोनी का मामला इंदौर में जमीन, कॉलोनी विकास और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर एक बड़े विवाद के रूप में सामने आया है।
