इंदौर चातुर्मास कलश स्थापना 2026 के तहत परम पूज्य मुनिश्री सिद्धांत सागरजी महाराज का 43वां वर्षायोग सादगीपूर्ण वातावरण में एक कमरे में संपन्न हुआ। पढ़ें पूरी खबर।
इंदौर चातुर्मास कलश स्थापना 2026: एक कमरे में हुआ 43वें चातुर्मास का अद्भुत एवं प्रेरणादायक आयोजन
रिपोर्टर : पारस जैन “पार्श्वमणि”, कोटा (राजस्थान)
इंदौर। इंदौर चातुर्मास कलश स्थापना 2026 ने इस वर्ष सादगी, संयम और आध्यात्मिकता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। देवी अहिल्याबाई होल्कर की पावन नगरी इंदौर में परम पूज्य वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमलसागरजी महाराज के सुयोग्य शिष्य, महान तपस्वी संत परम पूज्य मुनिश्री सिद्धांत सागरजी महाराज के 43वें चातुर्मास का मंगल कलश स्थापना समारोह अत्यंत सादगीपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
यह आयोजन गोमटगिरि के सामने स्थित आकाश ग्रीन कॉलोनी में श्री मनोज सपना मोदी के निजी निवास पर हुआ, जहां बिना किसी बैनर, पोस्टर, पंडाल, मंच, माइक, माला या भव्य सजावट के केवल एक कमरे में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में चातुर्मास की शुरुआत की गई।
चातुर्मास की सादगी बनी प्रेरणा
आज के दौर में जहां धार्मिक आयोजनों में भव्यता और दिखावे का प्रचलन बढ़ता जा रहा है, वहीं इंदौर चातुर्मास कलश स्थापना 2026 ने सादगी और आध्यात्मिक अनुशासन की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की। पूरे आयोजन में केवल पंच परमेष्ठी के प्रतीक स्वरूप पांच मंगल कलश स्थापित किए गए।
इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य केवल धर्म साधना और आत्मकल्याण था, न कि किसी प्रकार का प्रदर्शन।
पांच मंगल कलश की स्थापना
चातुर्मास प्रारंभ होने के साथ पंच परमेष्ठी के प्रतीक स्वरूप पांच मंगल कलश स्थापित किए गए। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना कर मुनिश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रतिदिन सुबह 10 बजे होगी आहारचर्या
पूरे चातुर्मास के दौरान परम पूज्य मुनिश्री सिद्धांत सागरजी महाराज की आहारचर्या प्रतिदिन सुबह 10 बजे सम्पन्न होगी। इसके पश्चात कुछ समय तक श्रद्धालुओं को आशीर्वाद एवं तत्वचर्चा का लाभ मिलेगा।इसके बाद मुनिश्री लगभग 22 घंटे तक तप, ध्यान एवं साधना में लीन रहेंगे तथा अगले दिन पुनः निर्धारित समय पर यही क्रम जारी रहेगा।
43वां चातुर्मास बना विशेष
जानकारी के अनुसार यह परम पूज्य मुनिश्री सिद्धांत सागरजी महाराज का 43वां चातुर्मास है। वर्षों से तप, त्याग और संयममय जीवन जी रहे मुनिश्री का यह वर्षायोग भी अत्यंत अनुशासित और प्रेरणादायक माना जा रहा है।
पारस जैन “पार्श्वमणि” ने साझा किया भावपूर्ण अनुभव
पत्रकार पारस जैन “पार्श्वमणि” ने बताया कि एक अवसर पर जब वे मुनिश्री के दर्शन करने पहुंचे तो मुनिश्री ने उनसे भजन सुनाने का आग्रह किया। उन्होंने भावपूर्ण स्वर में “आगे-आगे अपनी ही अर्थी के गाता चलूं” भजन प्रस्तुत किया।
भजन सुनकर मुनिश्री अत्यंत प्रसन्न हुए और पिच्छिका से आशीर्वाद प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने पांच अन्य भजन भी सुनाए। पारस जैन ने कहा कि मुनिश्री का तप, त्याग, सादगी, वात्सल्य, करुणा और प्रेम प्रत्येक श्रद्धालु को आध्यात्मिक प्रेरणा देता है।
श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत
मुनिश्री सिद्धांत सागरजी महाराज का जीवन संयम, तपस्या और आत्मानुशासन का जीवंत उदाहरण है। उनका सादगीपूर्ण चातुर्मास यह संदेश देता है कि धर्म का वास्तविक स्वरूप दिखावे में नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और सेवा में निहित है।


