प्रेस विज्ञप्ति
दादी जानकी की छठवीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई
“दादी जानकी जी ने अपने आत्मबल और शुभभावना से दुनिया भर के लोगों के हृदयों को बदल दिया।” – ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी
Indore , 26 मार्च 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्व मुख्य प्रशासिका और विश्व की सबसे स्थितप्रज्ञ योगिनी, राजयोगिनी दादी जानकी जी की छठवीं पुण्यतिथि ज्ञानशिखर, ओमशांति भवन, इंदौर में वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी संगठनों, स्वास्थ्य, प्रशासन और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
दादी जानकी जी को उनके अद्वितीय योगबल, आत्मबल और स्थिर मानसिकता के कारण “संसार की सबसे स्थितप्रज्ञ योगिनी” का खिताब मिला। उनकी यह स्थिरता और योगिक साधना उन्हें वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाने के साथ-साथ लाखों लोगों के जीवन में परिवर्तन का माध्यम बनी।
दादी जानकी का जीवन और प्रेरणा
ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी, इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि दादी जानकी जी का जीवन न केवल अपने समय की, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि दादी जी ने भाषा न जानने के बावजूद अपने दृढ़ निश्चय, ध्यान और योगिक साधना के माध्यम से पूरे विश्व में ईश्वरीय ज्ञान का प्रचार किया।
दादीजी ने यह सिद्ध कर दिया कि कोई भी व्यक्ति आध्यात्मिक साधना और आत्मबल के माध्यम से अपनी सीमाओं को पार कर सकता है और जीवन में उच्चतम आध्यात्मिक ऊँचाई प्राप्त कर सकता है। उनके आत्मबल और शुभभावना ने अलग-अलग संस्कृति और पाश्चात्य सभ्यता के लोगों के हृदयों में परिवर्तन किया। यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि को हर वर्ष “वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस” के रूप में मनाया जाता है।
विशेष अनुभव और कथाएँ
पुष्पश्री हॉस्पिटल के मालिक डॉ. गिरीश टावरी ने साझा किया कि 2019 में दादीजी के इंदौर प्रवास के दौरान जिस बिस्तर पर उन्होंने विश्राम किया, वह अब उनके हॉस्पिटल में रखा गया है। उन्होंने अनुभव किया कि इस बिस्तर पर सोने वाले मरीजों का उपचार अन्य मरीजों की तुलना में तेजी से होता है। यह उनके अद्वितीय योगबल और सकारात्मक ऊर्जा का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
कस्टम विभाग के कमिश्नर भ्राता दिनेश बिसेन ने कहा कि दादीजी के मस्तिष्क से निरंतर डेल्टा तरंगें निकलती थीं, जो उनके स्थिर मानसिक और आत्मिक स्वरूप का प्रमाण हैं। उनके कर्मेंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण और आत्मा के प्रति उनकी गहरी भक्ति ने उन्हें अद्वितीय आध्यात्मिक शक्ति प्रदान की।
श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि समारोह
इस अवसर पर कस्टम विभाग के कमिश्नर दिनेश बिसेन, उद्योगपति अमीन वैद्य, वन संरक्षक किरण बिसेन, डॉ. गिरीश टावरी, डॉ. संगीता टावरी, वाणिज्य कर विभाग के पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर एम.पी. चौरसिया, ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी, ब्रह्माकुमारी अनीता दीदी और ब्रह्माकुमारी उषा दीदी सहित बड़ी संख्या में भाई-बहन उपस्थित थे। सभी ने दादीजी को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनकी शिक्षाओं और आदर्शों को याद किया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने साझा किया कि दादी जानकी जी ने न केवल अपने जीवन में आत्मसाधना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, बल्कि उन्होंने समाज और विश्व के लोगों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि किसी भी परिस्थिति में स्थिरता, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण से जीवन को उच्चतम स्तर पर पहुंचाया जा सकता है।
दादी जानकी का वैश्विक योगदान
दादी जानकी जी ने अपने योग और ध्यान के माध्यम से लाखों लोगों को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की दिशा में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने दुनिया भर के लोगों को यह सिखाया कि किसी भी समस्या का समाधान केवल बाहरी प्रयासों से नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और स्थिरता से संभव है। उनके द्वारा शुरू किए गए ब्रह्माकुमारी कार्यक्रम और शिक्षा संस्थान आज भी लोगों के जीवन में बदलाव ला रहे हैं।
ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने बताया कि दादीजी का संदेश यह था कि जीवन की वास्तविक शक्ति आत्मा की शक्ति में निहित है। उनके मार्गदर्शन और शिक्षाओं से लाखों लोगों ने अपने जीवन में आध्यात्मिक अनुशासन अपनाया और मानसिक शांति प्राप्त की।
अनुभव और प्रशंसा
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. संगीता टावरी ने कहा कि दादीजी का प्रभाव केवल उनके समय तक सीमित नहीं रहा। आज भी उनकी शिक्षाएं और आशीर्वाद हर व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने उदाहरण के रूप में बताया कि दादीजी ने जो ऊर्जा और सकारात्मकता उत्पन्न की, उसका अनुभव आज भी उनके आस-पास के लोग महसूस करते हैं।
उद्योगपति अमीन वैद्य ने कहा कि दादीजी के दृष्टिकोण और उनका कार्य लोगों को आत्मविश्वास, आशा और आध्यात्मिक बल देता है। उनके आदर्शों से समाज में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा मिला है।
समापन
इस समारोह का उद्देश्य केवल दादी जानकी जी को याद करना नहीं था, बल्कि उनकी शिक्षाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना और उनके आदर्शों से प्रेरित होना था। कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थित लोगों द्वारा दादीजी को श्रद्धांजलि अर्पित करने, पुष्पांजलि देने और उनके जीवन के अद्वितीय उदाहरणों को याद करने के साथ हुआ।
ब्रह्माकुमारी संगठन की टीम ने कहा कि दादीजी की पुण्यतिथि पर यह आयोजन उन्हें याद करने, उनके संदेश को समझने और जीवन में आत्मसाक्षात्कार के लिए प्रेरणा लेने का अवसर है। उनका जीवन यह सिखाता है कि धैर्य, स्थिरता, सेवा भाव और योगिक साधना से कोई भी व्यक्ति अपने और समाज के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
ईश्वरीय सेवा में,
ब्रह्माकुमारी अनीता
ज्ञानशिखर, ओमशांति भवन, इंदौर
