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India ने चिकन नेक में अंडरग्राउंड रेल चलाने की योजना बनाई

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Published On: 3 February 2026
India Fortifies Strategic Chicken Neck Amid Bangladesh, China Concerns
— India Fortifies Strategic Chicken Neck Amid Bangladesh, China Concerns

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चिकन नेक कॉरिडोर: India की कमजोर नस से रणनीतिक सुरक्षा तक

India और बांग्लादेश के बीच के संबंध हमेशा संवेदनशील रहे हैं। पूर्वोत्तर India को बाकी भारत से जोड़ने वाला सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर चिकन नेक कहा जाता है, रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित है और इसकी सबसे संकरी कड़ी केवल 20–25 किलोमीटर चौड़ी है। यह इलाका नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से घिरा हुआ है, जिससे इसकी सामरिक महत्वता और बढ़ जाती है।

पूर्वोत्तर भारत को मुख्य भारत से जोड़ने वाले इस मार्ग की सुरक्षा न केवल देश की अखंडता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह नॉर्थईस्ट राज्यों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए भी बेहद अहम है। हाल ही में भारत ने इस संवेदनशील क्षेत्र में अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया है, जिससे नॉर्थईस्ट राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाली कड़ी को सुरक्षित बनाया जा सके।

चिकन नेक क्यों है रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण

चिकन नेक कॉरिडोर नॉर्थईस्ट के आठ राज्यों को मुख्य भारत से जोड़ता है। इसे “India की कमजोर नस” भी कहा जाता है क्योंकि यह भूगोलिक रूप से बेहद संकीर्ण है और किसी भी संकट या प्राकृतिक आपदा के समय नॉर्थईस्ट को मुख्य भारत से अलग कर सकती है।

इसकी रणनीतिक महत्वता को समझने के लिए कुछ बिंदु महत्वपूर्ण हैं:

  • भौगोलिक संकीर्णता: कॉरिडोर का सबसे संकरा हिस्सा केवल 20–25 किलोमीटर चौड़ा है।
  • सैन्य महत्व: किसी भी अवरोध या रुकावट के कारण सैनिकों और आपूर्ति लाइनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
  • सियासी संवेदनशीलता: यह नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से घिरा हुआ है, इसलिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय तनाव में यह मार्ग जोखिम में आ सकता है।

इसलिए चिकन नेक की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की सामरिक प्राथमिकता है।

बांग्लादेश का प्रभाव और सुरक्षा खतरे

India की चिंताओं में बांग्लादेश का राजनीतिक और सैन्य रुख एक बड़ा कारण है। हाल ही में बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने की खबरें आई हैं। कुछ कट्टर समूहों ने नॉर्थईस्ट को अलग करने और ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ बनाने के अपने विचार व्यक्त किए हैं।

साथ ही, ढाका का चीन के साथ बढ़ता सहयोग, विशेषकर ड्रोन फैक्ट्री के निर्माण में, भारत के लिए अतिरिक्त सुरक्षा खतरा पैदा कर रहा है। ये सैन्य ड्रोन सीमा निगरानी में इस्तेमाल हो सकते हैं, जिससे India  की सुरक्षा चिंताएं बढ़ जाएंगी।

India ने यह निर्णय इसलिए लिया कि चिकन नेक को अधिक सुरक्षित और रणनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए इसे भूमिगत रेल कॉरिडोर के माध्यम से संरक्षित किया जाए।

अंडरग्राउंड रेल परियोजना: योजना और कार्यान्वयन

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बजट में प्रस्तावित इस योजना के तहत कॉरिडोर को चार ट्रैक तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इस परियोजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. भूगर्भीय निर्माण: लगभग 40 किलोमीटर की रेल लाइन को भूमिगत बनाया जाएगा।
  2. स्टेशन और मार्ग: टिन माइल हाट से रंगपानी स्टेशन तक रेल कॉरिडोर जाएगा।
  3. लॉन्ग टर्म कनेक्टिविटी: यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी आपात स्थिति या सुरक्षा खतरे में नॉर्थईस्ट राज्यों की सप्लाई और सैनिकों की आवाजाही प्रभावित न हो।

नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जीएम चेतन श्रीवास्तव ने कहा कि भूमिगत मार्ग केवल सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए भी अहम है।

क्यों है अंडरग्राउंड रेल जरूरी?

सिलीगुड़ी कॉरिडोर की संकरी भौगोलिक संरचना इसे बाहरी खतरे के प्रति संवेदनशील बनाती है।

  • यदि यह पूरी तरह सतही रहता तो किसी भी प्राकृतिक आपदा, आतंकवादी गतिविधि या सैन्य हमले के कारण नॉर्थईस्ट अलग-थलग पड़ सकता था।
  • भूमिगत रेल निर्माण से न केवल कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, बल्कि यह किसी भी संकट की स्थिति में भी भारतीय सेना और आपूर्ति चैनलों के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा।
  • यह रणनीतिक रूप से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और पूर्वोत्तर राज्यों के विकास को मजबूत करेगा।
ऐतिहासिक और सामरिक संदर्भ

2017 के डोकलाम गतिरोध के दौरान भी भारत ने यह महसूस किया कि चिकन नेक की भौगोलिक कमजोरी कितनी संवेदनशील है। इस दौरान सैन्य योजनाकारों ने चेतावनी दी थी कि यहां कोई भी रुकावट नॉर्थईस्ट को अलग कर सकती है और आपूर्ति लाइनों को बाधित कर सकती है।

इस अनुभव ने यह स्पष्ट किया कि यह मार्ग न केवल भौगोलिक बल्कि सैन्य दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंडरग्राउंड रेल कॉरिडोर इसी रणनीतिक आवश्यकता का परिणाम है।

भविष्य में संभावित प्रभाव

इस परियोजना के लागू होने के बाद भारत को कई लाभ होंगे:

  1. राष्ट्रीय सुरक्षा में सुधार: नॉर्थईस्ट की सुरक्षा मजबूत होगी।
  2. सैन्य रणनीति में लचीलापन: आपातकाल में सैनिक और सामग्री आसानी से पहुंच सकेगी।
  3. आर्थिक और क्षेत्रीय विकास: पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
  4. भौगोलिक चुनौती का समाधान: संकीर्ण कॉरिडोर के जोखिम को कम करना संभव होगा।
  5. सांप्रदायिक और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता: भारत का यह कदम पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट संदेश देगा कि देश अपनी सीमाओं और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा के प्रति गंभीर है।

निष्कर्ष

चिकन नेक कॉरिडोर भारत की रणनीतिक कमजोर नस है, जिसे सुरक्षित रखना देश के लिए जरूरी है। अंडरग्राउंड रेल कॉरिडोर इस क्षेत्र की सुरक्षा, कनेक्टिविटी और नॉर्थईस्ट राज्यों के विकास को सुनिश्चित करेगा।

बांग्लादेश और चीन की गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक स्थिति को मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह परियोजना भारत की यह प्रतिबद्धता दर्शाती है कि देश अपने संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी चुनौती या खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और लंबे समय तक सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कदम उठा रहा है।

इस परियोजना से पूर्वोत्तर में आर्थिक गतिविधियों और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र की जनसंख्या और जीवन स्तर में सुधार होगा।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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