भीनमाल विकास परिषद ने हरियाली अमावस्या पर गोपाल कृष्ण गौशाला में पौधारोपण किया। गौ-सेवा, जीवदया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण: भीनमाल में गौ-सेवा के साथ शुरू हुआ प्रेरक अभियान, 2026 की खास पहल
भीनमाल। हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण का संदेश देते हुए स्थानीय भीनमाल विकास परिषद द्वारा गोपाल कृष्ण गौशाला परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण अभियान का आगाज किया गया। परिषद ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जीवदया, गौ-सेवा और समाज सेवा के संदेश के साथ इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत गौ-सेवा से
हरियाली अमावस्या के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत गौ-माता की सेवा से की गई। परिषद के सदस्यों ने गोपाल कृष्ण गौशाला में गौ-वंश के लिए ग्वार की चूरी, गुड़ एवं हरा चारा खिलाया। सदस्यों ने गौ-सेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण और जीवदया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इसके बाद गौशाला परिसर में पौधारोपण किया गया। परिषद के सदस्यों ने पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम के माध्यम से समाज में पर्यावरण संरक्षण के साथ जीवों के प्रति संवेदना और सेवा भावना का संदेश दिया गया।
हरियाली अमावस्या से हर वर्ष शुरू होता है अभियान
परिषद के संरक्षक इंजीनियर नेनाराम चौहान ने बताया कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से भीनमाल विकास परिषद द्वारा प्रतिवर्ष हरियाली अमावस्या से पौधारोपण अभियान शुरू किया जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी गोपाल कृष्ण गौशाला परिसर से इस पुनीत कार्य की शुरुआत की गई।
उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों की देखभाल और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी समाज की है। हरियाली बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
हरियाली अमावस्या का धार्मिक और सामाजिक महत्व
परिषद सदस्य विवेकानंद बिस्सा ने हरियाली अमावस्या के धार्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में हरियाली अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन किया गया दान-पुण्य, सेवा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्य शुभ एवं फलदायी माने जाते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का गहरा संबंध है। पेड़-पौधे पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में धार्मिक अवसरों को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा से जोड़ना समाज के लिए सकारात्मक संदेश है।
पक्षियों के लिए भी नियमित व्यवस्था
भीनमाल विकास परिषद द्वारा केवल पौधारोपण तक ही पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों को सीमित नहीं रखा गया है। परिषद पक्षियों के लिए बनाए गए चबूतरों में नियमित रूप से अनाज और पानी की व्यवस्था भी कर रही है।
परिषद के सदस्यों ने बताया कि गर्मी और बदलते मौसम के बीच पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था जीवदया की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पर्यावरण संरक्षण के साथ जीवों की सेवा को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।
जल्द शुरू होंगे मानव सेवा के नए प्रकल्प
परिषद सदस्य विवेकानंद बिस्सा ने बताया कि पर्यावरण और जीवदया के साथ परिषद आने वाले समय में व्यापक स्तर पर मानव सेवा के नए प्रकल्प भी शुरू करने की दिशा में कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि समाज सेवा का उद्देश्य केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं होना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण, जीवदया और मानव सेवा को साथ लेकर चलने से समाज में सेवा की भावना और मजबूत होगी।
कार्यक्रम में इनकी रही सहभागिता
हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण और गौ-सेवा के इस कार्यक्रम में भीनमाल विकास परिषद के अनेक पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस अवसर पर ओम प्रकाश खेतावत, राजेंद्र छाजेड़, दिनेश भाटी, संदीप देसाई, गौतम सिंघवी, सुरेश सोलंकी, अरविंद माहेश्वरी एवं अशोक धारीवाल सहित कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने पौधारोपण तथा गौ-सेवा में अपना सराहनीय सहयोग दिया।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
भीनमाल विकास परिषद द्वारा हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण की यह पहल धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा से जोड़ने का संदेश देती है। गौ-सेवा, जीवदया, पक्षियों के लिए दाना-पानी और पौधारोपण जैसे प्रयास समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
हरियाली अमावस्या पर शुरू किया गया यह अभियान आने वाले समय में व्यापक रूप ले और लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर वृक्ष बनें, यही कार्यक्रम से जुड़ी संस्था और सदस्यों की भावना है।
रिपोर्ट: मुकेश सोलंकी, भीनमाल

