हरिपुर में सात दिवसीय भागवत एवं राम कथा का छठवां दिन: गोवर्धन लीला और रुक्मणी विवाह पर झूमा हरिपुर
सिरोंज। ग्राम हरिपुर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा एवं श्री राम कथा में गुरुवार को भक्ति का महासागर उमड़ पड़ा। कथा के छठवें दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंचे और पूरा गांव भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। दिनभर चले इस धार्मिक आयोजन में विभिन्न प्रसंगों ने श्रद्धालुओं के हृदय को भावविभोर कर दिया।
दोपहर की कथा में गोवर्धन पर्वत का रोमांचक प्रसंग
श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिवस पर कथा व्यास पंडित अंकित कृष्ण तेनुगुरिया जी महाराज ने गोवर्धन पर्वत धारण की लीला का बड़ा ही रोचक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब देवराज इंद्र को अपने ऊपर अभिमान हो गया और उन्होंने ब्रज में मूसलाधार बारिश कर दी, तब मात्र 7 वर्ष के नन्हे कान्हा ने अपनी सबसे छोटी उंगली पर 7 दिनों तक गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों और गौ-धन की रक्षा की थी। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु “बोल गोवर्धन महाराज की जय” के जयकारों से पूरे पंडाल को गुंजायमान कर उठे। कथा व्यास जी ने इस लीला के माध्यम से भक्तों को यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति और समर्पण से बड़ी से बड़ी विपत्ति को भी टाला जा सकता है।
रुक्मणी विवाह की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
गोवर्धन लीला के पश्चात कथा में भगवान श्री कृष्ण और देवी रुक्मणी के विवाह का भव्य एवं मनोहारी प्रसंग सुनाया गया। इस अवसर पर व्यासपीठ के सामने भगवान कृष्ण और रुक्मणी जी की मनमोहक विवाह की झांकी सजाई गई, जिसे दूल्हा-दुल्हन की भांति आकर्षक ढंग से सजाया गया था। विवाह प्रसंग के दौरान महिला श्रोताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने आगे आकर हल्दी से भगवान के पांव पखारे और पारंपरिक मंगल गीत गाकर वातावरण को उत्सवमय बना दिया। पूरा पंडाल उस समय किसी शादी समारोह जैसा प्रतीत हो रहा था, जहां हर कोई भक्ति और उल्लास में डूबा हुआ था।

रात्रि में केवट प्रसंग सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु
रात्रि 9 बजे से प्रारंभ हुई श्री राम कथा के पंचम दिवस पर कथा व्यास स्वाति किशोरी जी ने श्री राम वनवास और केवट प्रसंग का बड़ा ही भावुक एवं मार्मिक वर्णन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पिता दशरथ के वचन का पालन करने के लिए भगवान राम राजमहल का त्याग कर वनगमन को निकले, और गंगा किनारे केवट ने अत्यंत प्रेम और श्रद्धा के साथ उनके चरण धोकर नाव से गंगा पार कराई। केवट की अनन्य भक्ति और भगवान राम के प्रेम से परिपूर्ण इस प्रसंग को सुनकर पंडाल में बैठे कई बुजुर्गों और महिलाओं की आंखें नम हो गईं।
कथा व्यास ने दिया सच्चे प्रेम का संदेश
इस मार्मिक प्रसंग के दौरान कथा व्यास स्वाति किशोरी जी ने कहा कि केवट ने संपूर्ण संसार को यह सीख दी कि भगवान को पाने के लिए धन-संपत्ति की नहीं, बल्कि सच्चे और निश्छल प्रेम की आवश्यकता होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में सच्ची भक्ति और समर्पण के भाव को अपनाकर ही मनुष्य ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और देर रात तक कथा श्रवण करते रहे।
भक्तिमय माहौल में डूबा रहा पूरा गांव
छठवें दिन के इस आयोजन ने संपूर्ण हरिपुर गांव को भक्ति के रंग में रंग दिया। दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठानों और रात्रि कालीन कथा प्रसंगों ने श्रद्धालुओं के मन को आध्यात्मिक शांति और आनंद से भर दिया। आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में भी कथा के महत्वपूर्ण प्रसंगों का श्रवण कराया जाएगा, जिसके लिए ग्रामवासियों में अत्यधिक उत्साह देखा जा रहा है।
