ग्वालियर फर्जी पासपोर्ट मामला: भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र तक पहुंची STF की जांच
गिरफ्तार एजेंट नसीम अख्तर से पूछताछ में कथित सांठगांठ की जानकारी; DIG ने दो पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच के निर्देश दिए
ग्वालियर/भोपाल। ग्वालियर के फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच का दायरा बढ़कर भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र तक पहुंच गया है। विशेष कार्य बल (STF) की पूछताछ में गिरफ्तार एजेंट नसीम अख्तर ने कथित नेटवर्क के बारे में जानकारी दी है। जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2022 में भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र में तैनात कुछ अधिकारी-कर्मचारियों से संपर्क और संभावित सांठगांठ की बात सामने आई है। फिलहाल इन दावों की जांच चल रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, STF के DIG ने ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर तत्कालीन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला और पुलिसकर्मी भूपेंद्र गुर्जर की भूमिका की जांच करने तथा जांच के निष्कर्ष के आधार पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। दोनों के संबंध में किसी अंतिम निष्कर्ष की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
संदिग्ध दस्तावेजों पर आगे बढ़े आवेदन?
STF के अनुसार, पूछताछ में यह बात सामने आई है कि कुछ मामलों में अधूरे या संदिग्ध दस्तावेज होने के बावजूद पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दस्तावेज किसने तैयार किए, आवेदनों की जांच किन स्तरों पर हुई और प्रक्रिया में किसी कर्मचारी या अधिकारी ने जानबूझकर मदद की थी या नहीं। इन सवालों पर जांच पूरी होना बाकी है।
नसीम अख्तर फिलहाल STF की रिमांड पर है। उससे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, दस्तावेज तैयार करने के तरीके और कथित आर्थिक लेनदेन के बारे में पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी की टीमें ग्वालियर, भोपाल और बैतूल सहित कई जिलों में जानकारी जुटा रही हैं। अलग-अलग स्थानों से मिले रिकॉर्ड को जोड़कर यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि संदिग्ध आवेदनों के पीछे कितने लोग सक्रिय थे।
टूर एंड ट्रेवल्स के काम से जुड़े थे नसीम
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, नसीम पहले भोपाल के एमपी नगर में टूर एंड ट्रेवल्स का काम करता था। STF का कहना है कि इसके बाद वह कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने वाले नेटवर्क से जुड़ा। एजेंसी उसके संपर्कों और लेनदेन की पड़ताल कर रही है, ताकि अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।
मामले का एक अहम पहलू डबरा के बौद्ध विहार से जुड़े पते की जांच भी है। रिपोर्ट के अनुसार, एक ही पते से 17 संदिग्ध पासपोर्ट बनने की बात सामने आई है। STF वहां रहने वाले भिक्षु के नाम पर इस्तेमाल दस्तावेजों, मठ में आने-जाने वाले लोगों और पुराने रिकॉर्ड की जांच कर रही है। एजेंसी ने रेयाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु से जुड़े बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई है। संदिग्ध लेनदेन का पासपोर्ट मामले से संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी बाकी है।
इस जांच में दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले लोगों, आवेदन आगे बढ़ाने की प्रक्रिया और पुलिस सत्यापन की भूमिका पर ध्यान केंद्रित है। पूछताछ में सामने आई जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति की संलिप्तता स्वतः सिद्ध नहीं होती। STF की जांच और संबंधित विभागीय कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संदिग्ध पासपोर्ट कैसे बने और किस स्तर पर चूक या मिलीभगत हुई।
